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4 min read | अपडेटेड January 21, 2026, 11:06 IST
सारांश
Shadowfax Technologies IPO: शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज का आईपीओ पहले दिन निवेशकों को रिझाने में नाकाम रहा। घाटे से मुनाफे में आने के बावजूद कंपनी को मंगलवार शाम तक केवल 0.50 गुना सब्सक्रिप्शन ही मिला। रिटेल निवेशकों ने थोड़ी दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन बड़े निवेशकों की तरफ से रिस्पॉन्स काफी सुस्त है।

शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज के आईपीओ को पहले दिन निवेशकों से उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला है।
लॉजिस्टिक और डिलीवरी सेक्टर की जानी-मानी कंपनी शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज के आईपीओ ने मंगलवार को शेयर बाजार में अपनी दस्तक दी। लेकिन पहले दिन के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे कंपनी और बाजार के जानकारों के लिए थोड़े चिंताजनक हो सकते हैं। कंपनी के लिए सबसे बड़ी पॉजिटिव बात यह रही है कि उसने अपने वित्तीय प्रदर्शन में सुधार किया है और घाटे से निकलकर अब मुनाफे का रास्ता पकड़ लिया है। इसके बावजूद, निवेशकों ने पहले दिन इस आईपीओ के प्रति बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया। मंगलवार की शाम तक मिली जानकारी के मुताबिक, यह आईपीओ कुल मिलाकर केवल आधा यानी 0.50 गुना ही सब्सक्राइब हो सका है। आमतौर पर मुनाफे में लौटने वाली कंपनियों के आईपीओ को लेकर निवेशकों में जो होड़ दिखती है, वह यहां फिलहाल नदारद रही।
शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज ने अपने इस आईपीओ के लिए 124 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है, लेकिन ग्रे मार्केट से आने वाले संकेत निवेशकों को बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं कर रहे हैं। 21 जनवरी 2026 की सुबह तक कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी मात्र 4 रुपये दर्ज किया गया है। अगर हम इस जीएमपी को कंपनी के ऊपरी प्राइस बैंड में जोड़कर देखें, तो इसकी संभावित लिस्टिंग 128 रुपये के आसपास हो सकती है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो निवेशकों को लिस्टिंग के दिन केवल 3.23 फीसदी के मामूली मुनाफे की उम्मीद नजर आ रही है। यही कम मुनाफा शायद निवेशकों को इस आईपीओ से दूर रख रहा है क्योंकि बाजार में इस समय कई अन्य विकल्प मौजूद हैं।
शैडोफैक्स के वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने पिछले तीन सालों में बहुत बड़ी रिकवरी की है। वित्त वर्ष 2023 में कंपनी को 142.64 करोड़ रुपये का भारी शुद्ध घाटा हुआ था। कंपनी के मैनेजमेंट ने इसके बाद अपनी कार्यक्षमता पर ध्यान दिया और खर्चों में कटौती की। इसका नतीजा यह हुआ कि वित्त वर्ष 2024 में यह घाटा घटकर महज 11.88 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी के लिए सबसे बड़ी कामयाबी वित्त वर्ष 2025 में आई, जब उसने 6.43 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर पहली बार खुद को लाभदायक साबित किया। यही नहीं, चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के बीच कंपनी ने 21.04 करोड़ रुपये का शानदार मुनाफा कमाया है, जो पिछले पूरे साल के मुनाफे से तीन गुना ज्यादा है।
मुनाफे के साथ-साथ कंपनी की कमाई यानी रेवेन्यू में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2023 में कंपनी का रेवेन्यू 1,415 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 तक बढ़कर 2,485 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। कंपनी के रेवेन्यू में सालाना करीब 32 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है। शैडोफैक्स ने क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी के क्षेत्र में अपनी पकड़ बहुत मजबूत की है। कंपनी फिलहाल देश के 14,700 से ज्यादा पिन कोड पर अपनी सेवाएं दे रही है। कंपनी का 'एसेट लाइट' मॉडल यानी बिना खुद की गाड़ियां खरीदे डिलीवरी पार्टनर के जरिए काम करना, इसकी बड़ी ताकत बनकर उभरा है। इसके जरिए कंपनी ने अपना रेवेन्यू बढ़ाने में सफलता पाई है।
इतने शानदार आंकड़ों के बाद भी निवेशक इस आईपीओ से क्यों कतरा रहे हैं, इसका सबसे बड़ा कारण इसका महंगा वैल्युएशन बताया जा रहा है। बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी जिस पी/ई रेशियो पर अपने शेयर बेच रही है, वह काफी ज्यादा है। शैडोफैक्स का पी/ई रेशियो करीब 170 के आसपास बैठ रहा है, जबकि इसकी तुलना में ब्लू डार्ट जैसी स्थापित कंपनी 50 के पी/ई पर ट्रेड कर रही है। हालांकि यह दिल्लीवरी जैसी कंपनी के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी निवेशकों को लगता है कि शेयर की कीमत उसके मुनाफे के मुकाबले बहुत ज्यादा रखी गई है। इसके अलावा कंपनी की 75 फीसदी कमाई केवल फ्लिपकार्ट और मीशो जैसे कुछ बड़े क्लाइंट्स से आती है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा रिस्क माना जा रहा है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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