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4 min read | अपडेटेड October 16, 2026, 08:52 IST
सारांश
निवेशकों और कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वे इन बदलावों को समझें और इनके अनुसार अपनी कारोबारी योजना बनाएं। साथ ही, नियमों के लागू होने की प्रभावी तारीख और संबंधित शेयर बाजारों के निर्देशों पर भी नजर रखें।

सेबी का बड़ा फैसला, अब 3:30 से 3:40 बजे तक चलेगा क्लोजिंग ऑक्शन (Photo: Shutterstock)
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर मार्केट में कारोबार के अंतिम समय से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत कारोबार समाप्ति नीलामी सत्र (Closing Auction Session, CAS) के समय और शेयरों और सूचकांकों के वायदा एवं विकल्प (Future and Options, F&O) अनुबंधों के निपटान मूल्य तय करने के प्रोसेस में संशोधन किया गया है। सेबी के इस फैसले का उद्देश्य मार्केट में ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना और शेयरों के अंतिम मूल्य निर्धारण के प्रोसेस को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
सेबी के नए नियमों के मुताबिक, कारोबार क्लोजिंग ऑक्शन सेशन सभी कारोबारी दिनों में दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा। यह कुल 10 मिनट का सेशन होगा। इस दौरान बाजार में शेयरों के अंतिम मूल्य को निर्धारित करने का प्रोसेस पूरा किया जाएगा। कारोबार क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शेयर मार्केट का एक अहम प्रोसेस है। इसका इस्तेमाल शेयरों के क्लोजिंग को तय करने के लिए किया जाता है। शेयर का समापन मूल्य निवेशकों, म्यूचुअल फंड और अन्य बाजार प्रतिभागियों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इसी मूल्य के आधार पर कई निवेश संबंधी कैलकुलेशन और वैल्यूएशन किए जाते हैं। इस सेशन के समय में बदलाव से बाजार के अंतिम चरण में होने वाली गतिविधियों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने में मदद मिलेगी।
सेबी ने शेयरों और सूचकांकों के वायदा एवं विकल्प अनुबंधों के कारोबार के समय में भी बदलाव किया है। नए नियमों के तहत कुछ अपवादों को छोड़कर इन अनुबंधों में कारोबार शाम 3:45 बजे तक जारी रहेगा। वायदा एवं विकल्प कारोबार को एफएंडओ के नाम से जाना जाता है। इसमें निवेशक और कारोबारी शेयरों या सूचकांकों की कीमतों में होने वाले बदलाव के आधार पर सौदे करते हैं। यह बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर निवेशकों की रणनीति और जोखिम पर पड़ता है।
कारोबार के समय और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बीच क्लियर समय-सीमा तय होने से बाजार प्रतिभागियों को अपने सौदों की योजना बनाने में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, निवेशकों को नए नियमों के अनुसार अपने कारोबार का टाइमटेबल और रणनीति पर ध्यान देना होगा।
सेबी ने सौदे की समाप्ति के दिन वाले वायदा एवं विकल्प अनुबंधों के निपटान मूल्य निर्धारित करने के सिस्टम में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब इसके लिए सामान्य कारोबार के अंतिम 30 मिनट के दौरान हुए कारोबार के आधार पर भारांश औसत मूल्य यानी वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी) पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस पद्धति में केवल अलग-अलग सौदों की कीमतों को नहीं देखा जाता, बल्कि यह भी ध्यान रखा जाता है कि किस कीमत पर कितनी मात्रा में कारोबार हुआ। अधिक मात्रा में हुए कारोबार को मूल्य निर्धारण में उसके अनुपात के अनुसार महत्व दिया जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी शेयर या अनुबंध में एक कीमत पर अधिक कारोबार हुआ है और दूसरी कीमत पर कम कारोबार हुआ है, तो वीडब्ल्यूएपी की कैलकुलेशन में अधिक मात्रा वाले कारोबार का प्रभाव ज्यादा होगा। इससे निपटान मूल्य तय करने के लिए कारोबार की वास्तविक गतिविधियों को आधार बनाया जा सकेगा।
निपटान मूल्य वह कीमत होती है, जिसके आधार पर अनुबंध की समाप्ति पर देनदारियों और लाभ-हानि की कैलकुलेशन की जाती है। इसलिए इस मूल्य को तय करने का प्रोसेस का निवेशकों और कारोबारियों के लिए खास महत्व है।
सेबी ने बताया कि ये बदलाव मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा के बाद किए गए हैं। इस प्रक्रिया में आम लोगों से प्राप्त टिप्पणियों, सेबी की द्वितीयक बाजार सलाहकार समिति की सिफारिशों और शेयर बाजारों के साथ हुई चर्चा को ध्यान में रखा गया।
कुल मिलाकर, सेबी के संशोधित नियम शेयर बाजार में कारोबार के अंतिम समय और एफएंडओ अनुबंधों के निपटान मूल्य तय करने की प्रक्रिया को नया स्वरूप देते हैं। निवेशकों और कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वे इन बदलावों को समझें और इनके अनुसार अपनी कारोबारी योजना बनाएं। साथ ही, नियमों के लागू होने की प्रभावी तारीख और संबंधित शेयर बाजारों के निर्देशों पर भी नजर रखें।
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