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  1. ये De-Worsified क्या होता है? जिसको लेकर रॉबर्ट कियोसाकी ने चेताया, आपके पोर्टफोलियो से है कनेक्शन

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ये De-Worsified क्या होता है? जिसको लेकर रॉबर्ट कियोसाकी ने चेताया, आपके पोर्टफोलियो से है कनेक्शन

Upstox

3 min read | अपडेटेड June 15, 2026, 14:32 IST

सारांश

मशहूर लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने इनवेस्टर्स को 'डी-वॉरसीफाइड' पोर्टफोलियो को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। जब कोई इनवेस्टर बिना सोचे-समझे बहुत सारे एसेट्स में पैसा लगा देता है, तो उसे ओवर-डाइवर्सिफिकेशन या डी-वॉरसीफिकेशन कहते हैं।

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अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो आपको डी-वॉरसीफाइड होने से बचना होगा।

निवेश की दुनिया में अक्सर डाइवर्सिफिकेशन यानी अलग-अलग जगहों पर पैसा लगाने की सलाह दी जाती है ताकि रिस्क को कम किया जा सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा डाइवर्सिफिकेशन आपके लिए नुकसानदेह भी हो सकता है? 'रिच डैड पुअर डैड' जैसी मशहूर किताब के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने हाल ही में इनवेस्टर्स को इसी बारे में चेताया है। उन्होंने एक खास टर्म 'डी-वॉरसीफाइड' (Deworsified) का जिक्र करते हुए कहा है कि यह आदत आपके पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के बजाय और खराब कर देती है। अगर आप भी अपने पैसे को कई अलग-अलग जगहों पर फैलाकर यह सोच रहे हैं कि आप सुरक्षित हैं, तो आपको कियोसाकी की इस चेतावनी को बहुत ध्यान से समझने की जरूरत है। आज के समय में बहुत से लोग इस जाल में फंसकर अपना भारी नुकसान कर बैठते हैं।

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क्या होता है डी-वॉरसीफाइड पोर्टफोलियो?

आम तौर पर नए इनवेस्टर्स को सिखाया जाता है कि अपने सारे अंडे एक टोकरी में न रखें। इसी चक्कर में कई लोग बिना रिसर्च किए बीस या तीस अलग-अलग कंपनियों के स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड्स, गोल्ड और रियल एस्टेट में पैसा लगा देते हैं। जब डाइवर्सिफिकेशन अपनी तय सीमा से बाहर चला जाता है, तो उसे इनवेस्टमेंट की भाषा में डी-वॉरसीफिकेशन कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपने अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के चक्कर में उसे और कमजोर और खराब कर दिया है। रॉबर्ट कियोसाकी का मानना है कि जब आप बहुत ज्यादा इनवेस्टमेंट टूल्स में पैसा लगा देते हैं, तो आप किसी भी एक इनवेस्टमेंट पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं। इससे आपका रिस्क तो कम नहीं होता, लेकिन आपके पोर्टफोलियो का नेट प्रॉफिट और मिलने वाला रेवेन्यू जरूर घट जाता है।

रॉबर्ट कियोसाकी ने क्यों दी यह बड़ी चेतावनी

रॉबर्ट कियोसाकी हमेशा से पारंपरिक इनवेस्टमेंट आइडियाज के खिलाफ रहे हैं और अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। उनका कहना है कि बहुत सारी जगहों पर थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाना इस बात का सबूत है कि आपको मार्ग की सही जानकारी नहीं है। कियोसाकी के मुताबिक डाइवर्सिफिकेशन उन लोगों के लिए है जो मार्केट को नहीं समझते और डर के साए में जीते हैं। वह कहते हैं कि अमीर बनने के लिए आपको अपने पोर्टफोलियो को डी-वॉरसीफाइड करने के बजाय कुछ चुनिंदा और मजबूत एसेट्स पर फोकस करना चाहिए। जब आप केवल उन सेक्टर्स में पैसा लगाते हैं जिनकी आपको गहरी समझ है, तो आपके नुकसान की आशंका बहुत कम हो जाती है। जो लोग बहुत अधिक डाइवर्सिफिकेशन करते हैं, उनका ओवरऑल ऑपरेशनल परफॉर्मेंस बेहद औसत रह जाता है और वे कभी बड़ा रिटर्न नहीं कमा पाते हैं।

अपने पोर्टफोलियो को इस खतरे से कैसे बचाएं?

अगर आप अपने फ्यूचर को सुरक्षित करना चाहते हैं और इनवेस्टमेंट से बढ़िया रेवेन्यू जेनरेट करना चाहते हैं, तो आपको अपने पोर्टफोलियो की तुरंत समीक्षा करनी चाहिए। सबसे पहले उन इनवेस्टमेंट्स को बाहर निकालें जिनके बारे में आपको ज्यादा जानकारी नहीं है और जो आपके कुल रिटर्न को कम कर रहे हैं। अपने पोर्टफोलियो को उन चुनिंदा सेक्टर्स तक सीमित रखें जहां आपको लगता है कि लॉन्ग टर्म में अच्छा प्रॉफिट मिल सकता है। रॉबर्ट कियोसाकी खुद रियल एस्टेट, गोल्ड, सिल्वर और बिटकॉइन जैसी चीजों में फोकस इनवेस्टमेंट करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि थोड़े से एसेट्स पर पैनी नजर रखना, बहुत सारे एसेट्स में पैसा खोने से कहीं बेहतर है। इसलिए अपने इनवेस्टमेंट का सही इंप्लिमेंटेशन करें और केवल उतने ही स्टॉक्स या फंड्स रखें जिन्हें आप आसानी से ट्रैक कर सकें।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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