बिजनेस न्यूज़
.png)
4 min read | अपडेटेड June 15, 2026, 13:23 IST
सारांश
देश में थोक महंगाई की रफ्तार एक बार फिर बहुत तेज हो गई है। मई के महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई बढ़कर 9.68 पर्सेंट पर पहुंच गई है, जो अप्रैल में 8.26 पर्सेंट थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन, बिजली और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह उछाल आया है।

ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई के आंकड़ों में बड़ा उछाल देखने को मिला है।| Image source: Shutterstock
देश में आम जनता से लेकर बिजनेस जगत के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। मई के महीने में थोक महंगाई की रफ्तार में बहुत तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोमवार को सरकार की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI पर आधारित महंगाई की दर मई में बढ़कर 9.68 पर्सेंट के स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल के महीने में यह आंकड़ा 8.26 पर्सेंट पर था। इसका मतलब यह है कि केवल एक महीने के भीतर ही थोक महंगाई में एक बड़ा उछाल आया है। इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से फ्यूल, पावर, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और खाने पीने की चीजों की कीमतों में आई भारी तेजी को जिम्मेदार माना जा रहा है। थोक बाजार में बढ़ती कीमतों का सीधा असर आने वाले समय में रिटेल मार्केट पर भी पड़ता हुआ दिखाई दे सकता है।
सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की तरफ से थोक महंगाई के इन आंकड़ों को देश के सामने जारी किया गया। इस बार के आंकड़ों में मंत्रालय ने एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार ने थोक महंगाई की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले आधार वर्ष यानी बेस ईयर में बदलाव कर दिया है। अब तक थोक महंगाई को मापने के लिए साल 2011-12 को आधार वर्ष माना जाता था, लेकिन अब इसे बदलकर साल 2022-23 कर दिया गया है। इस नए आधार वर्ष के लागू होने के बाद ही मई महीने के आंकड़े तैयार करके जारी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और कीमतों के उतार चढ़ाव की अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी। इस नई सीरीज में देश के औद्योगिक उत्पादन और उपभोग के बदलते तौर तरीकों को शामिल करने की कोशिश की गई है ताकि महंगाई का एकदम सही रूप सामने आ सके। हालांकि इस नए बेस ईयर के बावजूद महंगाई के ग्राफ में लगातार बढ़ोतरी ही देखने को मिल रही है।
मई के महीने में थोक महंगाई को इस ऊंचे स्तर पर ले जाने में सबसे बड़ा हाथ ईंधन और बिजली यानी फ्यूल एंड पावर सेगमेंट का रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इस सेगमेंट में महंगाई की दर अप्रैल के मुकाबले मई में बहुत तेजी से भागी है। अप्रैल में ईंधन और बिजली क्षेत्र की थोक महंगाई जहां 24.89 पर्सेंट के स्तर पर थी, वह मई के महीने में बढ़कर सीधे 30.33 पर्सेंट पर पहुंच गई है। बिजली और ईंधन की कीमतों में आई इस भारी तेजी के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। जब फैक्ट्रियों को चलाने के लिए बिजली और माल ढुलाई के लिए ईंधन महंगा मिलता है, तो कंपनियों के लिए अपने ऑपरेशन को संभालना काफी मुश्किल हो जाता है, जिसका बोझ अंत में आम उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।
ईंधन और बिजली सेगमेंट के भीतर भी अगर सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े कहीं से आए हैं, तो वह क्रूड पेट्रोलियम का क्षेत्र है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों से क्रूड पेट्रोलियम की कीमतों में बहुत भयानक उछाल देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, क्रूड पेट्रोलियम के सेक्टर में थोक महंगाई की दर मई के महीने में 61.51 पर्सेंट के बेहद डरावने स्तर पर पहुंच गई है। इससे पिछले महीने यानी अप्रैल में क्रूड पेट्रोलियम की महंगाई दर 56.31 पर्सेंट दर्ज की गई थी। इस तरह क्रूड पेट्रोलियम की थोक महंगाई में एक ही महीने में लगभग पांच पर्सेंट से अधिक की बड़ी वृद्धि देखी गई है। क्रूड पेट्रोलियम के इतना महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों पर सीधा दबाव बढ़ रहा है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
Debt-Service Coverage Ratio (DSCR): Meaning, Formula And How To Use & Calculate It
How to Transfer Shares from One Demat Account to Another: A Quick Guide
How To Use Fibonacci Retracement For Support And Resistance
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs