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  1. NSE बनाम BSE, जानिए लिस्टिंग गेन से लेकर बिजनेस तक कौन सा एक्सचेंज है ज्यादा मजबूत?

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NSE बनाम BSE, जानिए लिस्टिंग गेन से लेकर बिजनेस तक कौन सा एक्सचेंज है ज्यादा मजबूत?

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड September 24, 2026, 15:24 IST

सारांश

BSE के बाद अब देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE की भी मार्केट में एंट्री हो चुकी है। लिस्टिंग गेन से लेकर बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट तक दोनों एक्सचेंजों में बड़ा अंतर है, जिसे आज हम डीटेल में समझने वाले हैं।

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NSE vs BSE: किसका IPO Listing Gain ज्यादा, किसका बिजनेस बड़ा?

देश के शेयर बाजार के दो सबसे बड़े पिलर NSE और BSE की तुलना हमेशा से निवेशकों के आकर्षण का केंद्र रही है। साल 2017 में BSE के लिस्ट होने के बाद अब NSE भी शेयर बाजार में लिस्ट हो चुका है। NSE का शेयर BSE पर 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ, जो कि इसके 1,785 रुपये के इश्यू प्राइस से 0.84% का प्रीमियम था। वहीं अगर BSE के इतिहास को देखें तो 3 फरवरी 2017 को 806 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले BSE 1,069.20 रुपये पर लिस्ट हुआ था, जिससे निवेशकों को 32.66% का लिस्टिंग गेन मिला था।

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आज BSE का शेयर अपने इश्यू प्राइस से 305.79% और लिस्टिंग प्राइस से 205.90% ऊपर 3,270.70 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। दोनों के वैल्यूएशन की बात करें तो NSE का P/E मल्टीपल लगभग 42.9 गुना है, जबकि BSE का P/E मल्टीपल 54.28 गुना के स्तर पर है।

बिजनेस और मार्केट शेयर में कौन आगे?

स्टॉक एक्सचेंज का मुख्य बिजनेस खरीदारों और बिकवालों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म देना है, जिससे वे ट्रेडिंग कर सकें। इसमें एक्सचेंज ट्रांजैक्शन, लिस्टिंग और मार्केट डेटा से रेवेन्यू कमाते हैं। बिजनेस के पैमाने पर NSE का काफी बड़ा दबदबा है। वित्त वर्ष 2026 तक NSE के पास 13.23 करोड़ से ज्यादा यूनिक रजिस्टर्ड इनवेस्टर और 3,005 लिस्टेड कंपनियां थीं। दूसरी तरफ BSE के पास 5,900 से ज्यादा लिस्टेड कंपनियां हैं, लेकिन ट्रेडिंग एक्टिविटी के मामले में उसका शेयर कम है। NSE कैश मार्केट के करीब 93% हिस्से पर कब्जा रखता है और स्टॉक फ्यूचर्स सेगमेंट में भी इसका लगभग पूरा कंट्रोल है। BSE 150 साल पुराना ऐतिहासिक एक्सचेंज होने के कारण ज्यादा कंपनियों को लिस्ट किए हुए है, लेकिन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम के कारण एक्टिव ट्रेडर्स NSE का रुख करते हैं। nse-vs-bse-ipo

कमाई के मामले में कौन मजबूत?

वित्त वर्ष 2026 में NSE ने लगभग 16,601 करोड़ रुपये का ऑपरेशन से रेवेन्यू और 10,302 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल किया है। वहीं इसी अवधि के दौरान BSE ने लगभग 4,834 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 2,487 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इस हिसाब से NSE का रेवेन्यू BSE से 3.4 गुना और नेट प्रॉफिट 4 गुना से भी ज्यादा है। हालांकि मार्जिन के मामले में दोनों काफी करीब हैं। वित्त वर्ष 2026 में NSE का ऑपरेटिंग एबिटा मार्जिन 66.9% और BSE का 64% रहा है। रिटर्न ऑन नेट वर्थ के मामले में BSE 45% के साथ NSE के 33% से आगे है, जिसकी मुख्य वजह NSE का बड़ा कैपिटल बेस और उसका बड़ा ट्रेजरी इनवेस्टमेंट है।

फ्यूचर ग्रोथ की बात करें तो दोनों एक्सचेंजों का रोडमैप अलग अलग है। NSE के पास पहले से ही मार्केट का बड़ा हिस्सा है, इसलिए उसकी फ्यूचर ग्रोथ पूरे मार्केट के विस्तार और नए सेग्मेंट्स पर निर्भर करती है। NSE का फोकस इक्विटी, डेरिवेटिव्स, इंडेक्स और गिफ्ट सिटी के जरिए इंटरनेशनल मार्केट में पैर पसारने पर है। हालांकि डेरिवेटिव्स नियमों में बदलाव का असर इसके रेवेन्यू पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ BSE का मार्केट शेयर अभी कम है, इसलिए छोटे सेग्मेंट्स में भी ग्रोथ मिलने पर उसके रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। BSE ने हाल ही में सेंसेक्स ऑप्शंस के जरिए डेरिवेटिव्स मार्केट में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है।

इस पूरी लिस्टिंग पर कैपवाइज फाइनेंशियल सर्विसेज के फाउंडर और सीईओ नरेश बियानी का कहना है कि NSE की लिस्टिंग भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव है। अब देश का सबसे बड़ा एक्सचेंज खुद पब्लिक के प्रति जवाबदेह हो गया है। को-लोकेशन जैसे रेगुलेटरी विवादों के एक दशक लंबे दौर के खत्म होने के बाद अब भारत भी अमेरिका, ब्रिटेन, हॉन्गकॉन्ग और जर्मनी जैसे देशों की कतार में शामिल हो गया है जिनके प्रमुख एक्सचेंज लिस्टेड हैं।

नरेश बियानी का मानना है कि 12 गुना इंस्टीट्यूशनल डिमांड के बाद भी सपाट लिस्टिंग होना अनुशासित प्राइसिंग को दिखाता है, न कि सुस्त सेंटिमेंट को। ध्यान देने वाली एकमात्र चीज डेरिवेटिव्स पर आने वाले नियम हैं जो NSE की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय बाजार ने इतने बड़े आईपीओ को बिना किसी परेशानी के पचा लिया है। यह प्रमोटर्स, पीई फंड्स और MSME कंपनियों के लिए एक ग्रीन सिग्नल है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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