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NSE ने SEBI को सौंपे IPO डॉक्यूमेंट्स, ₹30,000 करोड़ जुटाने का प्लान, कौन बेचेगा कितने शेयर?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड June 18, 2026, 08:47 IST

सारांश

अनलिस्टेड मार्केट में वैल्यूएशन के आधार पर इस आईपीओ का साइज करीब 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह बहुप्रतीक्षित आईपीओ अक्टूबर 2024 में आए हुंदै मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के इश्यू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है।

एनएसई आईपीओ

एनएसई ने सेबी के पास आईपीओ दस्तावेज जमा किए

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (Initial Public Offering, IPO) की मंजूरी के लिए बुधवार को बाजार नियामक सेबी के पास मसौदा दस्तावेज (Draft Red Herring Prospectus, DRHP) दाखिल कर दिए। करीब 30,000 करोड़ रुपये के साइज वाला यह इश्यू पूरी तरह मौजूदा शेयरधारकों की बिक्री पेशकश (OFS) पर आधारित होगा। सूत्रों ने कहा कि अनलिस्टेड मार्केट में वैल्यूएशन के आधार पर इस आईपीओ का साइज करीब 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह बहुप्रतीक्षित आईपीओ अक्टूबर 2024 में आए हुंदै मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के इश्यू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है। DRHP के मुताबिक, एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश पर आधारित होगा जिसमें मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। इस इश्यू के जरिए शेयरधारक सामूहिक रूप से एनएसई में अपनी करीब 6% हिस्सेदारी बेचेंगे।

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NSE में किसके पास कितनी हिस्सेदारी?

प्रमुख हिस्सेदारी विक्रेताओं में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शामिल है, जो 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा, जबकि एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। एसबीआई की एनएसई में 3.23% हिस्सेदारी है, जबकि उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33% हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 4.44% हिस्सेदारी है। अन्य प्रमुख विक्रेताओं में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (1.19 करोड़ शेयर), अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्रा. लि. (1.12 करोड़ शेयर), बैंक ऑफ बड़ौदा (1.10 करोड़ शेयर) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (1.09 करोड़ शेयर) शामिल हैं। हालांकि एनएसई में सबसे अधिक 10.72% की हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) इस इश्यू में कोई शेयर नहीं बेचेगी।

एनएसई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 6 फरवरी को प्रस्तावित आईपीओ को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India, SEBI) से अनापत्ति प्रमाणपत्र (No Objection Certificate, NOC) मिलने के बाद दी गई थी। एनएसई के लिस्ट होने का प्लान लगभग एक दशक से अलग-अलग नियामकीय कारणों, खासकर ‘को-लोकेशन’ विवाद की वजह से अटका हुआ था। जनवरी में सेबी द्वारा एनओसी दिए जाने के बाद आईपीओ प्रोसेस को फिर से तेजी मिली। आईपीओ की तैयारी के तहत एनएसई ने 20 मर्चेंट बैंकर के अलावा कानूनी सलाहकारों और अन्य मध्यस्थों की नियुक्ति की है।

क्यों अटका हुआ था NSE का आईपीओ?

अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई का वैल्यूएशन पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका जा रहा है। एक्सचेंज के लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं। एनएसई ने पहली बार 2016 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी। को-लोकेशन मामले में एनएसई ने जून, 2025 में सेबी के सामने सेटलमेंट एप्लीकेशन दर्ज की थी। इस मामले में कुछ ब्रोकरों पर एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम तक खास पहुंच हासिल करने का आरोप था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एनएसई ने 2025 में मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की थी, जिससे उसके लिस्ट होने की राह आसान हुई।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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