मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड June 18, 2026, 07:56 IST
सारांश
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी दो दिवसीय मीटिंग के बाद ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में कमिटी ने दरों को 3.5 पर्सेंट से 3.75 पर्सेंट के दायरे में बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखी गई।

यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया गया।
अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने दुनिया भर के बाजारों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा फैसला लिया है। चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में फेडरल ओपन मार्केट कमिटी यानी एफओएमसी ने 17 जून को समाप्त हुई दो दिनों की मीटिंग के बाद प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। ऑफिशियल फाइलिंग के मुताबिक, अमेरिका में बेंचमार्क ब्याज दरें 3.5 पर्सेंट से 3.75 पर्सेंट के पुराने दायरे में ही बनी रहेंगी। फेडरल रिजर्व के इस फैसले का सीधा असर अमेरिकी शेयर बाजार पर देखने को मिला, जहां सभी प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। इस फैसले का असर 18 जून को एशियाई बाजारों में भी महसूस किया जा रहा है।
FOMC की जून पॉलिसी के नतीजों के मुताबिक, कमिटी ने वेस्ट एशिया संकट के कारण सप्लाई चैन में आए झटके को देखते हुए ब्याज दरों को होल्ड पर रखने का फैसला किया है। इस संकट की वजह से अमेरिका में महंगाई दर लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। फेडरल रिजर्व के पास इकोनॉमी में महंगाई को कंट्रोल करने के साथ-साथ लेबर मार्केट में नौकरियों की ग्रोथ को बढ़ाने की दोहरी जिम्मेदारी होती है। कमिटी ने अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा कि इस दोहरी जिम्मेदारी को सहारा देने के लिए फेडरल फंड रेट के टारगेट दायरे को 3.5 पर्सेंट से 3.75 पर्सेंट पर बनाए रखने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त रिजर्व बनाए रखने की पॉलिसी की भी पुष्टि की गई है। इस बार जून 2026 की पॉलिसी मीटिंग में सभी 12 सदस्यों ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को मौजूदा लेवल पर बनाए रखने के पक्ष में वोट दिया। साल 2024 में हुई एक एफओएमसी मीटिंग के बाद यह पहला मौका है जब सभी सदस्य इस फैसले पर पूरी तरह सहमत दिखे हैं।
फेडरल रिजर्व का कहना है कि वेस्ट एशिया विवाद की अनिश्चितताओं के बावजूद यूनाइटेड स्टेट्स में इकोनॉमिक एक्टिविटी मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है। हालांकि, सप्लाई में आए व्यवधान के कारण एनर्जी सहित कुछ सेक्टर्स में कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई अभी भी 2 पर्सेंट के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों से पता चलता है कि मई 2026 को समाप्त हुए 12 महीनों में अमेरिका की सीपीआई महंगाई दर बढ़कर 4.2 पर्सेंट पर पहुंच गई, जो अप्रैल 2026 में 3.8 पर्सेंट के लेवल पर थी। कमिटी ने अपने बयान में दोहराया है कि वह कीमतों में स्थिरता लाने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी तरफ, अमेरिका के जॉब मार्केट में बढ़त देखी गई है। मई 2026 में नॉन-फार्म पेरोल एम्प्लॉयमेंट में 1,72,000 की बढ़त हुई है। इसमें मुख्य रूप से लेजर और हॉस्पिटैलिटी, लोकल गवर्नमेंट और हेल्थ केयर जैसे सेक्टर्स में नौकरियां बढ़ी हैं। इस दौरान अमेरिका में अनएंप्लॉयमेंट रेट यानी बेरोजगारी दर 4.3 पर्सेंट पर स्थिर बनी रही। कमिटी के अनुसार, नौकरियों में हो रही बढ़त वर्कफोर्स के साथ तालमेल बिठा रही है।
यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के मॉनेटरी पॉलिसी एक्शन के बाद 17 जून को इंट्राडे ट्रेडिंग सेशन के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स नीचे गिर गए। मार्केट वॉच के आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती गिरावट के बाद दोपहर के कारोबारी सेशन में भी डाउ जोंस, एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट गिरावट के साथ ही ट्रेड कर रहे थे। ट्रेडिंग सेशन की समाप्ति पर डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.98 पर्सेंट की गिरावट के साथ 51,492.55 पॉइंट्स पर बंद हुआ, जो इसके पिछले सेशन में 51,999.67 पॉइंट्स पर था। इसी तरह, S&P 500 इंडेक्स भी 1.21 पर्सेंट टूटकर 7,420.10 पर बंद हुआ, जो पिछले मार्केट सेशन में 7,511.35 पॉइंट्स के लेवल पर था। टेक कंपनियों के प्रभुत्व वाला नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स भी 1.34 पर्सेंट का नुकसान उठाकर 26,021.66 पॉइंट्स पर बंद हुआ, जो इसके पिछले क्लोजिंग में 26,376 पॉइंट्स पर था।
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