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4 min read | अपडेटेड May 14, 2026, 13:07 IST
सारांश
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 4 मई 2026 को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) लॉन्च किया है। यह सोने में निवेश का एक डिजिटल तरीका है, जहां आपका सोना सुरक्षित तिजोरी में रहेगा और उसकी रसीद आपके डीमैट अकाउंट में दिखेगी। आप इसे शेयर की तरह खरीद-बेच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर असली सोना भी ले सकते हैं।

एनएससी (NSE) का इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) अब सोने में निवेश को बनाएगा और भी आसान। | Image: Shutterstock
भारत में सोना सिर्फ एक कीमती धातु या गहना नहीं है, बल्कि यह बचत करने का सबसे पुराना और भरोसेमंद तरीका रहा है। लेकिन फिजिकल गोल्ड यानी असली सोना अपने पास रखने की अपनी अलग चुनौतियां होती हैं। चोरी होने का डर, शुद्धता की चिंता और उसे बेचते वक्त मिलने वाले कम दाम हमेशा निवेशकों को परेशान करते हैं। अब इन सारी परेशानियों का समाधान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) लेकर आया है। NSE ने 4 मई 2026 को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी ईजीआर की शुरुआत की है। यह सोने में निवेश करने का एक बिल्कुल नया और आधुनिक तरीका है, जो पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित है।
ईजीआर को अगर आसान बोलचाल की भाषा में समझें तो यह सोने की एक डिजिटल रसीद है। इसमें आपका फिजिकल सोना सरकारी मान्यता प्राप्त एक सुरक्षित तिजोरी में जमा रहता है और उसकी एक डिजिटल रसीद आपके डीमैट अकाउंट में आ जाती है। यह बिल्कुल वैसे ही काम करता है जैसे किसी कंपनी के शेयर आपके डीमैट अकाउंट में दिखाई देते हैं। इस सुविधा को लॉन्च करने के दिन NSE ने खुद एक किलो सोने की ईंट को तिजोरी में रखकर उसकी डिजिटल रसीद बनाई और उसे एक्सचेंज पर लिस्ट किया। इसमें खास बात यह है कि सोना पहले सेबी (SEBI) से मान्यता प्राप्त तिजोरी में जमा होता है, जहां उसके वजन और शुद्धता की बारीकी से जांच की जाती है। जांच सफल होने के बाद उतनी ही यूनिट आपके डीमैट खाते में ट्रांसफर कर दी जाती हैं।
ईजीआर में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको शुद्धता को लेकर रत्ती भर भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। यहां सोना 999 यानी 24 कैरेट और 995 दोनों शुद्धता के साथ मिलता है। चूंकि सोना सेबी से मान्यता प्राप्त तिजोरी में रखा होता है, इसलिए इसकी पूरी गारंटी सरकार की निगरानी में होती है। इसमें मेकिंग चार्ज या मिलावट जैसा कोई झंझट नहीं होता है। आप इसे सोमवार से शुक्रवार तक सुबह नौ बजे से रात साढ़े ग्यारह बजे तक शेयर की तरह कभी भी खरीद या बेच सकते हैं। पैसों का हिसाब-किताब भी खरीद-बेच के अगले कारोबारी दिन यानी टी प्लस वन बेसिस पर पूरा हो जाता है।
अक्सर लोगों को लगता है कि सोने में निवेश के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है, लेकिन ईजीआर ने इसे छोटे निवेशकों के लिए भी आसान बना दिया है। आप इसमें 100 मिलीग्राम से लेकर एक किलो तक की यूनिट में सोना खरीद सकते हैं। यानी अगर आपके पास बहुत कम बजट है, तो भी आप धीरे-धीरे सोना इकट्ठा कर सकते हैं। इसके लिए बस आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना चाहिए और पैन, आधार व बैंक अकाउंट के जरिए आपकी केवाईसी पूरी होनी चाहिए। आम निवेशक से लेकर जौहरी और बड़ी कंपनियां भी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकती हैं।
अगर आप कभी अपनी डिजिटल रसीद के बदले असली सोना घर लाना चाहते हैं, तो इसकी भी बहुत सरल व्यवस्था की गई है। इसके लिए आपको सुबह दस बजे से दोपहर तीन बजे के बीच एक रिक्वेस्ट देनी होती है, जो तीन दिन तक मान्य रहती है। इसके बाद आपकी डिजिटल रसीद बंद हो जाएगी और आपको असली सोना सौंप दिया जाएगा। इसमें एक कमाल की सुविधा यह है कि अगर आपने सोना मुंबई की तिजोरी में जमा कराया है, तो आप उसे दिल्ली, अहमदाबाद या देश की किसी भी मान्यता प्राप्त तिजोरी से निकाल सकते हैं। हालांकि, फिजिकल डिलीवरी लेने पर आपको तीन पर्सेंट जीएसटी और तिजोरी का चार्ज अलग से देना होगा।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा सोना खरीदा जाता है, लेकिन यहां सोने का कारोबार अभी भी काफी हद तक बिना किसी कड़े नियमों के चलता है। हर शहर में सोने की कीमतें अलग होती हैं और शुद्धता का कोई एक मानक नहीं होता है। एनएससी का यह कदम सोने के बाजार को शेयर बाजार की तरह पारदर्शी बनाने की एक कोशिश है। इससे टाइटन और कल्याण ज्वैलर्स जैसी बड़ी कंपनियों को भी अपने ऑपरेशन को मैनेज करने में मदद मिलेगी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने भी 2022 में ऐसी कोशिश की थी, लेकिन अब एनएससी ने इसे नई तकनीक और बेहतर तैयारी के साथ पेश किया है।
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