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  1. क्या फीकी पड़ने लगी हीरों की चमक? 5 साल में आधे रह गए नेचुरल डायमंड के दाम, जानिए क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

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क्या फीकी पड़ने लगी हीरों की चमक? 5 साल में आधे रह गए नेचुरल डायमंड के दाम, जानिए क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

Upstox

4 min read | अपडेटेड October 14, 2026, 12:32 IST

सारांश

नेचुरल हीरों की कीमतों में पिछले पांच सालों में 50% से अधिक की भारी गिरावट आई है। बाजार में जरूरत से ज्यादा सप्लाई और लैब में बनने वाले हीरों की बढ़ती मांग ने इनकी चमक कम कर दी है।

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नेचुरल हीरों की कीमतों में भारी गिरावट के बीच लैब ग्रोन हीरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

कहते हैं कि 'हीरा सदा के लिए होता है' और यह महिलाओं की पहली पसंद माना जाता है, लेकिन अब इसकी चमक कुछ फीकी पड़ती दिख रही है। पिछले पांच सालों में नेचुरल हीरों की कीमतों में लगातार गिरावट आई है और इनके दाम आधे से भी ज्यादा टूट चुके हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा सप्लाई और लैब में बनने वाले हीरों की बढ़ती लोकप्रियता इस तेज गिरावट की मुख्य वजह है।

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एक कैरेट नेचुरल हीरे की कीमत में 51% की भारी गिरावट

रैपापोर्ट ग्रुप के आंकड़ों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक कैरेट नेचुरल हीरे की औसत कीमत घटकर 3,898 डॉलर पर आ गई है। साल 2021 में यह औसत कीमत 8,007 डॉलर थी, यानी इसमें करीब 51% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा निवेश वाले हीरों पर नजर रखने वाला डायमंड स्टैंडर्ड इंडेक्स भी इस साल अगस्त की शुरुआत में अपने सबसे निचले स्तर 2,490 पर पहुंच गया था। डायमंड स्टैंडर्ड के सीईओ कॉर्मैक किन्नी के अनुसार, कोविड के दौरान अधिक प्रोडक्शन के चलते साल 2023 और 2024 में भारी इन्वेंट्री जमा हो गई थी। इसके बाद लैब ग्रोन हीरों के बढ़ते चलन के कारण नेचुरल हीरों की बिक्री में भारी गिरावट देखी गई।

त्योहारी सीजन में लैब ग्रोन हीरों की मांग 20% बढ़ने का अनुमान

भारत में त्योहारी सीजन के करीब आते ही लैब ग्रोन हीरों की मांग तेजी पकड़ रही है। एक बड़े हीरा विक्रेता के मुताबिक, इस त्योहारी सीजन में घरेलू बाजार में लैब ग्रोन हीरों की बिक्री वॉल्यूम के लिहाज से करीब 20% बढ़ सकती है। वहीं टाइटन के एमडी अजय चावला ने जुलाई 2026 की अर्निंग्स कॉल में कहा था कि मांग इस बात पर निर्भर करती है कि ग्राहक के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने बताया कि अब बाजार में स्थिरता आ गई है और लैब ग्रोन बनाम नेचुरल हीरे की जो बहस चल रही थी, वह काफी हद तक शांत हो चुकी है। उनका मानना है कि बाजार में दोनों तरह के हीरे एक साथ मौजूद रहेंगे।

सॉलिटेयर और छोटे हीरों के दामों में स्थिरता के संकेत

बड़ी गिरावट के बावजूद हाल के समय में नेचुरल हीरों, खासकर सॉलिटेयर और छोटे हीरों की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। सितंबर तिमाही में मांग मजबूत रही और त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ इसके टिके रहने की उम्मीद है। टाइटन ने अपने बिजनेस अपडेट में बताया कि ज्यादातर समय मांग अच्छी रही, हालांकि त्योहारों के वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही में जाने से आखिर में थोड़ी सुस्ती आई। कंपनी के 'फेस्टिवल ऑफ डायमंड्स' अभियान से स्टडेड ज्वैलरी में तीस% से अधिक की मजबूत ग्रोथ दर्ज हुई, जबकि सोने के गहनों की बिक्री 20% बढ़ी।

टाइटन के ज्वैलरी डिवीजन के सीईओ अरुण नारायण के अनुसार, सॉलिटेयर और छोटे हीरों दोनों की कीमतों में अब स्थिरता दिख रही है और रिटेल दाम स्थिर हैं। भले ही नेचुरल हीरों के दाम दो दशकों के निचले स्तर पर हैं और 2021 के पीक से 40% से ज्यादा गिरे हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि कीमतें अब अपने निचले स्तर के करीब हैं। भारत में त्योहारी सीजन के चलते कीमतों में स्थिरता की उम्मीद है और बाजार में नेचुरल व लैब ग्रोन दोनों हीरों की मांग साथ बनी रहेगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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