मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड October 12, 2026, 11:36 IST
सारांश
सरकार ने नेशनल स्टील पॉलिसी विजन 2047 का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत 2047 तक 604 मिलियन टन क्रूड स्टील उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस ऐलान के बाद सोमवार को सेल, JSW स्टील और टाटा स्टील के शेयरों में तेजी देखने को मिली है।

नेशनल स्टील पॉलिसी विजन 2047 का ड्राफ्ट जारी होने के बाद स्टील और इंफ्रा शेयरों में एक्शन।
12 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में स्टील मेकर्स, आयरन ओर माइनिंग, स्टील प्रोसेसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के शेयर्स निवेशकों की नजर में रहे। सरकार ने 'नेशनल स्टील पॉलिसी विजन 2047' का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जिसका मकसद 2047 तक देश में 604 मिलियन टन क्रूड स्टील का प्रोडक्शन हासिल करना है। इस बड़े ऐलान के बाद बाजार में स्टील स्टॉक्स पर मिला-जुला असर देखने को मिला है। सेल (SAIL) का शेयर 1.64% की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि JSW स्टील (JSW Steel) में 0.96%, जिंदल स्टेनलेस (JSL) में 0.22% और टाटा स्टील (Tata Steel) में 0.12% की बढ़त दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ माइनिंग कंपनी एनएमडीसी (NMDC) का शेयर 0.81% की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है।
सरकार द्वारा जारी इस नीतिगत ड्राफ्ट में 2047 तक प्रति व्यक्ति स्टील खपत को बढ़ाकर 302 किलोग्राम और स्टील एक्सपोर्ट को 45 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही देश में फिनिश्ड स्टील की डिमांड 505 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। इससे पहले लागू नेशनल स्टील पॉलिसी 2017 में 2030 तक 300 मिलियन टन कैपेसिटी और 160 किलोग्राम प्रति व्यक्ति खपत का लक्ष्य रखा गया था। नई नीति का मुख्य फोकस आयरन ओर और कोकिंग कोल जैसे कच्चे माल की सुरक्षा बढ़ाना, इम्पोर्ट पर निर्भरता घटाना और देश के कुल प्रोडक्शन में हाई-एंड स्टील का शेयर बढ़ाना है। ड्राफ्ट के अनुसार, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की हिस्सेदारी देश की कुल स्टील खपत में 67% है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग सामान, एप्लायंसेज और पैकेजिंग सेक्टर्स 28% योगदान देते हैं। अर्बनाइजेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल इंफ्रा से भी स्टील की मांग तेजी से बढ़ेगी।
इस लॉन्ग-टर्म पॉलिसी का सीधा फायदा देश की प्रमुख स्टील और माइनिंग कंपनियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। टाटा स्टील, JSW स्टील, सेल और जिंदल स्टील जैसी बड़ी कंपनियां 604 मिलियन टन की कैपेसिटी बढ़ाने के सरकारी लक्ष्य से भविष्य में फायदा उठा सकती हैं। वहीं हाई-वैल्यू स्टील पर जोर दिए जाने से जिंदल स्टेनलेस जैसी स्पेशलाइज्ड स्टील कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। कच्चे माल की सुरक्षा पर फोकस रहने से एनएमडीसी (NMDC), लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी और मॉयल (MOIL) जैसी माइनिंग कंपनियों के लिए आयरन ओर और मैंगनीज ओर की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा स्टील बनाने की भट्टियों में इस्तेमाल होने वाले रिफ्रैक्ट्री प्रोडक्ट्स सप्लाई करने वाली कंपनी आरएचआई मैग्नेसिटा इंडिया (RHI Magnesita India) भी इस कैपेसिटी एक्सपेंशन से फायदे में रह सकती है।
स्टील प्रोडक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बढ़ने से कई सहयोगी सेक्टर्स को भी बूस्ट मिलेगा। देश में 67% स्टील की खपत कंस्ट्रक्शन और इंफ्रा में होती है, जिससे एलएंडटी (L&T) जैसी दिग्गज इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी के ऑपरेशन्स को सपोर्ट मिल सकता है। रेलवे, माइनिंग और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ने से बीईएमएल (BEML) के लिए मौके पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा स्टील का प्रोडक्शन और रॉ मैटेरियल का मूवमेंट बढ़ने से लॉजिस्टिक्स और फ्रेट ट्रांसपोर्ट कंपनियों को फायदा होगा। कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) और ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (TCI) जैसी कंपनियों को माल ढुलाई की मांग बढ़ने का फायदा मिल सकता है। हालांकि यह पॉलिसी अभी ड्राफ्ट स्टेज में है, इसलिए कंपनियों के परफॉर्मेंस पर इसका वास्तविक असर आगे चलकर ही साफ हो पाएगा।
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