मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड January 19, 2026, 09:35 IST
सारांश
चांदी की कीमतों ने आज भारतीय बाजार (MCX) पर 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक लेवल पार कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के 94 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचने और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ संबंधी धमकियों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की मांग में भारी उछाल आया है।

चांदी के दामों में क्यों लगातार हो रही है वृद्धि?
भारतीय कमोडिटी बाजार के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों के बजाय चांदी की चमक से लिखा जाएगा। सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी की कीमतों ने वह जादुई आंकड़ा पार कर लिया है जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक करना भी मुश्किल था। चांदी की कीमतें आज 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक लेवल को पार कर गई हैं। बाजार खुलते ही चांदी में जबरदस्त लिवाली देखी गई और देखते ही देखते इसकी कीमतों में करीब 10 हजार रुपये से ज्यादा की बढत दर्ज की गई। इस समय चांदी करीब 3.67 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,98,330 रुपये के आसपास ट्रेड कर रही है, जबकि आज के कारोबार के दौरान इसने 3,01,315 रुपये का अपना अब तक का सबसे हाईएस्ट लेवल छुआ है।
चांदी की कीमतों में आई इस बेतहाशा तेजी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हलचल है। वैश्विक लेवल पर हाजिर चांदी आज 4.4 प्रतिशत उछलकर 93.85 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 94.08 डॉलर का अपना नया रिकॉर्ड लेवल बनाया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा बयान ने पूरी दुनिया के व्यापारिक समीकरण बदल दिए हैं। ट्रंप ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने का अधिकार नहीं मिलता, तब तक वह यूरोप से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाएंगे। इस व्यापार युद्ध की आशंका ने निवेशकों को डरा दिया है और वे अब सुरक्षित निवेश की तलाश में चांदी की तरफ भाग रहे हैं।
जब भी दुनिया में कोई राजनीतिक या व्यापारिक तनाव बढता है, तो निवेशक शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर सोना और चांदी जैसी धातुओं में लगाते हैं। इसे बाजार की भाषा में 'सेफ हेवन बाइंग' कहा जाता है। ट्रंप की टैरिफ वाली धमकी ने यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों में खटास आने की आशंका पैदा कर दी है। इसी वजह से चांदी को अब केवल एक धातु के रूप में नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जा रहा है। चांदी के औद्योगिक इस्तेमाल के साथ-साथ अब निवेश के तौर पर इसकी मांग इतनी ज्यादा बढ गई है कि कीमतों पर लगाम लगाना मुश्किल हो रहा है।
कीमतों के रॉकेट बनने के पीछे एक और बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती में आई गिरावट है। सोमवार को डॉलर इंडेक्स करीब 0.19 प्रतिशत गिरकर 99.18 के लेवल पर आ गया है। नियम के अनुसार, जब भी वैश्विक बाजार में डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार होने वाली कीमती धातुओं के दाम बढ जाते हैं। डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के सस्ता होने से सोना और चांदी खरीदना आसान हो जाता है, जिससे इनकी कीमतों को सपोर्ट मिलता है। आज भी डॉलर की इस कमजोरी ने चांदी की रफ्तार को और तेज कर दिया है, जिससे भारतीय बाजार में कीमतें 3 लाख के पार निकल गईं।
चांदी की कीमतों में आई इस तेजी ने आम आदमी से लेकर निवेशकों तक को हैरान कर दिया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय लेवल पर टैरिफ और व्यापार युद्ध का तनाव कम नहीं हुआ, तो चांदी की कीमतों में और भी उछाल देखा जा सकता है। भारत में चांदी का उपयोग केवल गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब लोग इसे निवेश के एक बड़े हथियार के रूप में देख रहे हैं। एमसीएक्स पर जिस तरह से वॉल्यूम बढ रहा है, उससे संकेत मिलते हैं कि अभी कीमतों में गिरावट की संभावना बहुत कम है। हालांकि, इतनी बड़ी तेजी के बाद बाजार में थोड़ी मुनाफावसूली की आशंका भी बनी रहती है, लेकिन फिलहाल तो चांदी की चमक फीकी पड़ती नहीं दिख रही है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख
What is the Nifty NBFC Index? Constituents, Historical Performance, and Selection Criteria
What Is the BSE Saatvik 100 Index?
What is the Nifty Capital Goods Index? Constituents, Historical Performance, and Selection Criteria
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs