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मार्केट न्यूज़

आपकी पॉलिसी का पैसा कहां निवेश करती है एलआईसी? सरकार ने संसद में दी पूरी जानकारी

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड August 05, 2026, 13:08 IST

सारांश

भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी पॉलिसीधारकों का पैसा शेयर बाजार में कैसे निवेश करती है, इसको लेकर सरकार ने संसद में जानकारी दी है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि एलआईसी कंपनियों के परफॉर्मेंस, फंडामेंटल्स और फ्यूचर आउटलुक के आधार पर ही निवेश के फैसले लेती है।

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एलआईसी अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए कड़े नियमों का पालन करती है।

भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC के पॉलिसीधारक और इससे जुड़े लोग अक्सर यह जानना चाहते हैं कि उनके प्रीमियम का पैसा शेयर बाजार और प्राइवेट कंपनियों में किस तरह निवेश किया जाता है। हाल ही में LIC के ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस को लेकर जारी चर्चाओं के बीच सरकार ने संसद में इस पूरे मामले पर स्थिति साफ कर दी है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार 3 अगस्त को लोकसभा में बताया कि एलआईसी पिछले पांच सालों से लिस्टेड प्राइवेट कंपनियों के शेयरों में पॉलिसीधारकों के फंड को किस तरह मैनेज और इन्वेस्ट करती आ रही है।

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सांसद के सवाल पर वित्त राज्य मंत्री का जवाब

लोकसभा सांसद राजीव राय द्वारा पूछे गए कई सवालों के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले पांच सालों के दौरान लिस्टेड कंपनियों में LIC का एक्सपोजर समय-समय पर बदलता रहा है। एलआईसी किसी भी लिस्टेड कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने या घटाने का फैसला अपने स्वतंत्र इन्वेस्टमेंट असेसमेंट, अप्रूव्ड इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क और उन कंपनियों के फ्यूचर आउटलुक को ध्यान में रखकर ही करती है। हालांकि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि LIC उन सभी कंपनियों की पूरी लिस्ट सार्वजनिक नहीं करती है जिनमें उसने निवेश किया है। बिजनेस के लिहाज से सभी कंपनियों की लिस्ट उजागर करना सही नहीं होगा और इससे LIC के फाइनेंशियल हितों पर सीधा असर पड़ सकता है।

किन पैमानों पर होता है शेयरों का चुनाव?

इक्विटी में निवेश करने के तरीके को समझाते हुए वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि LIC किसी भी प्राइवेट या पीएसयू कंपनी के शेयर में पैसा लगाने से पहले कई अहम पैमानों की बारीकी से जांच करती है। इसमें कंपनी के फंडामेंटल्स, उसकी फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और बिजनेस की संभावनाओं का गहराई से मूल्यांकन किया जाता है। यह पूरा प्रोसेस तय इक्विटी इन्वेस्टमेंट क्राइटेरिया, ड्यू डिलिजेंस और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी का पालन करते हुए पूरा किया जाता है। इसके साथ ही एलआईसी का पूरा निवेश इंश्योरेंस एक्ट 1938, LIC एक्ट 1956, इर्डाई निवेश नियम, सेबी गाइडलाइंस, आरबीआई के नियमों और LIC की अपनी इन्वेस्टमेंट कमेटी व बोर्ड से मंजूर पॉलिसी के तहत ही संचालित होता है।

निगरानी व्यवस्था और स्टॉप-लॉस मैकेनिज्म

फाइनेंस मिनिस्ट्री ने LIC के ऑडिट और मॉनिटरिंग सिस्टम के बारे में भी विस्तार से जानकारी साझा की। एलआईसी में इन्वेस्टमेंट ट्रांजैक्शन से जुड़े चेक और कंट्रोल की जांच कॉनकरेंट ऑडिटर्स द्वारा की जाती है, जबकि पूरी प्रक्रिया की समीक्षा स्टैच्युटरी ऑडिटर्स, सिस्टम ऑडिटर्स, आईएफसी ऑडिटर्स और इंफॉर्मेशन सिस्टम्स ऑडिटर्स करते हैं। LIC समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करती है और रिटर्न्स की तुलना एनएसई 100 और एनएसई 200 जैसे प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स से करती है। इसके अलावा एसेट एलोकेशन और सेक्टर एक्सपोजर की समीक्षा की जाती है और जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस भी किया जाता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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