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3 min read | अपडेटेड March 18, 2026, 08:59 IST
सारांश
जीएसपी क्रॉप साइंस का आईपीओ आज 18 मार्च को बंद हो रहा है। दूसरे दिन तक यह कुल 0.98 गुना सब्सक्राइब हुआ है। रिटेल हिस्से में रिस्पॉन्स थोड़ा ठंडा है, जबकि एनआईआई कैटेगरी में अच्छी डिमांड देखी गई है। कंपनी एग्रोकेमिकल सेक्टर में काम करती है और इसका बिजनेस मॉडल काफी मजबूत है।

जीएसपी क्रॉप साइंस का आईपीओ आज बंद हो रहा है।
एग्रोकेमिकल सेक्टर की दिग्गज कंपनी जीएसपी क्रॉप साइंस के आईपीओ में पैसा लगाने का आज आखिरी मौका है। 16 मार्च को खुला यह आईपीओ आज यानी 18 मार्च 2026 को बंद होने जा रहा है। दूसरे दिन के अंत तक कंपनी का इश्यू लगभग पूरा भरने के करीब पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 17 मार्च की शाम तक यह आईपीओ कुल 0.98 गुना सब्सक्राइब हुआ था। अब सबकी नजर आज के आखिरी दिन पर है कि निवेशक इसमें कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं।
इस आईपीओ के अलग-अलग हिस्सों की बात करें तो मिला-जुला रिस्पॉन्स देखने को मिल रहा है। दूसरे दिन शाम 5 बजे तक रिटेल कैटेगरी में यह सिर्फ 0.21 गुना ही भरा था, जो बताता है कि छोटे निवेशक फिलहाल थोड़े सावधान हैं। हालांकि, बड़े निवेशकों यानी क्यूआईबी कैटेगरी में इसे 1.28 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। सबसे ज्यादा उत्साह एनआईआई कैटेगरी में दिखा है, जहां इश्यू 2.40 गुना सब्सक्राइब हुआ है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब 400 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है, जिसमें 240 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे।
जीएसपी क्रॉप साइंस का बिजनेस काफी पुराना और फैला हुआ है। कंपनी को एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। यह मुख्य रूप से कीटनाशक, फफूंदनाशक और खरपतवार नाशक जैसी दवाएं बनाती है। कंपनी का ऑपरेशन दो हिस्सों में बंटा है। पहला है फॉर्मूलेशन, जो सीधे किसानों के काम आता है और दूसरा है टेक्निकल्स, जो दवाएं बनाने के लिए बेस के रूप में इस्तेमाल होता है। कंपनी का हेड ऑफिस अहमदाबाद में है और यह भारत के 20 राज्यों के साथ-साथ दुनिया के 37 से ज्यादा देशों में अपना सामान एक्सपोर्ट करती है। कंपनी के पास 500 से ज्यादा प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन और 100 से ज्यादा पेटेंट हैं, जो इसकी रिसर्च क्षमता को दिखाते हैं।
किसी भी निवेश से पहले उसके रिस्क को समझना बहुत जरूरी है। जीएसपी क्रॉप साइंस के साथ सबसे बड़ा रिस्क मानसून पर निर्भरता है। अगर भारत में बारिश कम होती है, तो कंपनी के प्रोडक्ट्स की मांग घट सकती है, जिससे ऑपरेशन से रेवेन्यू पर असर पड़ता है। इसके अलावा कंपनी पर करीब 52 करोड़ रुपये के कानूनी मामले भी चल रहे हैं। अगर फैसला कंपनी के खिलाफ आता है, तो इसका असर नेट प्रॉफिट पर दिखेगा। एक और बड़ी बात यह है कि कंपनी कच्चे माल के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कंपनी के EBITDA मार्जिन पर दबाव बन सकता है।
फिलहाल ग्रे मार्केट से कोई बहुत अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP फिलहाल 0 रुपये पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि 320 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से शेयर की लिस्टिंग उसी रेट पर होने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार की चाल और आखिरी दिन के सब्सक्रिप्शन को देखकर इसमें बदलाव हो सकता है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपना कर्ज चुकाने और फ्यूचर ग्रोथ के लिए करना चाहती है।
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