पर्सनल फाइनेंस
.png)
3 min read | अपडेटेड March 17, 2026, 16:08 IST
सारांश
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए ईपीएफ और पीपीएफ दोनों ही शानदार स्कीम हैं। लेकिन जब बात ज्यादा मुनाफे की आती है, तो ईपीएफ बाजी मार लेता है। 15 साल के निवेश पर दोनों स्कीम के बीच करीब 3.4 लाख रुपये का अंतर आता है।

बेहतर कल के लिए आज ही चुनें सही सेविंग स्कीम और देखें अपने पैसे को बढ़ते हुए।
रिटायरमेंट की प्लानिंग करना आज के समय में बहुत जरूरी हो गया है। हर कोई चाहता है कि जब वह काम करना बंद करे, तो उसके पास एक मोटा फंड हो जिससे बुढ़ापा आराम से कटे। इसके लिए भारत में दो सबसे पॉपुलर ऑप्शन ईपीएफ और पीपीएफ हैं। ये दोनों ही सरकारी गारंटी वाली स्कीमें हैं और इनमें निवेश करना पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि अगर वे हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं, तो 15 साल बाद उन्हें किसमें ज्यादा पैसा मिलेगा।
ईपीएफ यानी एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो किसी कंपनी में नौकरी करते हैं। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12 पर्सेंट हिस्सा जमा करता है और इतना ही हिस्सा कंपनी की ओर से भी दिया जाता है। फिलहाल ईपीएफओ इस जमा पर 8.25 पर्सेंट का सालाना ब्याज दे रहा है। अगर आप ईपीएफ में हर महीने 10 हजार रुपये का निवेश करते हैं, तो 15 साल में आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये हो जाएगा। 8.25 पर्सेंट ब्याज की दर से 15 साल बाद आपका कुल फंड करीब 35,96,445 रुपये (लगभग 35.96 लाख) तैयार हो जाएगा। यह स्कीम उन लोगों के लिए बहुत अच्छी है जो एक फिक्स इनकम कमाते हैं और लंबे समय के लिए बड़ी रकम जोड़ना चाहते हैं।
पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड की बात करें तो यह स्कीम हर किसी के लिए खुली है। चाहे आप नौकरी करते हों, अपना छोटा बिजनेस चलाते हों या घर पर रहते हों, आप किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाकर अपना पीपीएफ अकाउंट खुलवा सकते हैं। वर्तमान में सरकार इस पर 7.1 पर्सेंट का सालाना ब्याज दे रही है। अगर आप पीपीएफ में भी हर महीने 10 हजार रुपये यानी साल के 1.2 लाख रुपये जमा करते हैं, तो 15 साल बाद आपका फंड करीब 32,54,567 रुपये (लगभग 32.54 लाख) बनेगा। यहां भी आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये ही रहेगा, लेकिन ब्याज कम होने की वजह से मैच्योरिटी की रकम ईपीएफ से कम रह जाती है।
इन दोनों स्कीमों के बीच अगर हम तुलना करें तो सबसे बड़ा अंतर ब्याज दर का ही है। ईपीएफ और पीपीएफ के रिटर्न में 15 साल के दौरान करीब 3.4 लाख रुपये का अंतर आ रहा है। इसके अलावा पात्रता को लेकर भी बड़ा फर्क है। ईपीएफ केवल सैलरीड क्लास के लिए है, जबकि पीपीएफ में कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। लॉक-इन पीरियड के मामले में पीपीएफ थोड़ा सख्त है क्योंकि इसमें 15 साल तक पैसा लॉक रहता है, हालांकि कुछ सालों बाद इसमें से थोड़ा पैसा निकालने या लोन लेने की सुविधा मिलती है। वहीं ईपीएफ में शादी, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए समय से पहले भी कुछ पैसा निकाला जा सकता है।
टैक्स बचाने के मामले में ये दोनों स्कीमें एक जैसी ही हैं। इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत आपको साल में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स में छूट मिलती है। इसके अलावा इन पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी रकम भी टैक्स फ्री होती है। अगर आप एक कर्मचारी हैं, तो ईपीएफ आपके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि इसमें ब्याज ज्यादा मिलता है। लेकिन अगर आप अपना काम करते हैं, तो पीपीएफ आपके लिए अपना फ्यूचर सिक्योर करने का सबसे सुरक्षित और बेहतरीन जरिया है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
Senior Citizen Savings Scheme: A Safe Investment Option for Retirees
Pradhan Mantri Awas Yojana (PMAY) 2026: How to Apply, Eligibility, and Required Documents
TDS Rate FY 2025-26
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs