मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड December 25, 2025, 13:19 IST
सारांश
साल 2025 में सोने और चांदी ने रिटर्न के मामले में सेंसेक्स और निफ्टी को काफी पीछे छोड़ दिया है। जहां सोने ने करीब 80 प्रतिशत का मुनाफा दिया, वहीं चांदी 150 प्रतिशत से ज्यादा उछली है। इस तेजी का फायदा मुथूट फाइनेंस और हिंदुस्तान जिंक जैसी कंपनियों के शेयरों को भी मिला है।
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साल 2025 में सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी निवेशकों की पहली पसंद बने रहे।
साल 2025 निवेशकों के लिए एक ऐतिहासिक साल साबित हुआ है, जहां पारंपरिक निवेश के विकल्पों ने आधुनिक शेयर बाजार को पछाड़कर अपनी बादशाहत साबित की है। इस पूरे साल सोने और चांदी की कीमतों में जो तूफान देखने को मिला है, उसने कमाई के पिछले कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4500 डॉलर प्रति औंस के जादुई आंकड़े को पार कर गई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। भारत में सोने के दाम 1.4 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गए हैं, जिसने निवेशकों को करीब 80 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन असली बाजी तो चांदी ने मारी है, जिसने साल 2025 में 150 प्रतिशत से भी ज्यादा की छलांग लगाकर सबको हैरान कर दिया है। भारतीय बाजार में चांदी की कीमत 2.23 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गई है।
सोने की कीमतों में आई इस भारी बढ़त के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारण रहे हैं। अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ने इस साल अपनी मौद्रिक नीतियों में बड़ा बदलाव करते हुए ब्याज दरों में कई बार कटौती की है। ब्याज दरें घटकर 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में आ गई हैं, जिसकी वजह से फिक्स्ड डिपॉजिट और सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों का आकर्षण कम हुआ है। जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो निवेशक सोने की तरफ रुख करते हैं क्योंकि इसमें निवेश की लागत कम हो जाती है।
इसके अलावा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्ध और तनाव की स्थितियों ने भी निवेशकों के मन में असुरक्षा पैदा की है। रूस, यूक्रेन और मध्य पूर्व के संकटों के बीच सोना हमेशा से एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभरा है। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी जारी रखी है, जिससे इसकी कीमतों को लगातार सहारा मिला है।
चांदी के मामले में कहानी थोड़ी अलग और ज्यादा दिलचस्प है। चांदी ने सोने के मुकाबले लगभग दोगुना रिटर्न दिया है, जिसका मुख्य कारण इसकी औद्योगिक खपत है। आज की नई दुनिया में सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और इन सभी में चांदी का इस्तेमाल बहुत जरूरी होता है। अक्षय ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदमों ने चांदी की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है।
दूसरी तरफ चांदी का उत्पादन करने वाली प्रमुख कंपनियों और खदानों से इसकी सप्लाई में कमी आई है, जिससे बाजार में चांदी की किल्लत महसूस की जा रही है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर ने चांदी की कीमतों को 2025 में एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। साथ ही ईटीएफ के जरिए निवेशकों ने भी चांदी में जमकर पैसा लगाया है, जिससे इसकी कीमतों को अतिरिक्त मजबूती मिली है।
कीमती धातुओं में आई इस तेजी का असर सिर्फ सर्राफा बाजार तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा लाभ शेयर बाजार में लिस्टेड संबंधित कंपनियों को भी मिला है। गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों जैसे मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस ने इस साल कमाल का प्रदर्शन किया है। मुथूट फाइनेंस के शेयरों में इस साल लगभग 78.5 प्रतिशत की तेजी देखी गई है। इसका कारण यह है कि सोने के दाम बढ़ने से इन कंपनियों के पास गिरवी रखे सोने की कीमत बढ़ गई है, जिससे उनका बिजनेस और एसेट क्वालिटी दोनों बेहतर हुए हैं। इसी तरह चांदी की माइनिंग और रिफाइनिंग करने वाली कंपनियां जैसे हिंदुस्तान जिंक और वेदांता के शेयरों ने भी निवेशकों को तगड़ा मुनाफा कमाकर दिया है। हिंदुस्तान जिंक के शेयर में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है।
हालांकि, सोने के ऊंचे दामों ने गहने बनाने वाली कंपनियों के लिए कुछ चुनौतियां भी पैदा की हैं। बहुत ज्यादा कीमतें होने की वजह से आम ग्राहकों ने गहनों की खरीदारी में थोड़ी कमी दिखाई है, जिसका असर कुछ कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ा है। जहां टाइटन जैसी बड़ी और भरोसेमंद कंपनी ने 20 प्रतिशत से ज्यादा का सकारात्मक रिटर्न दिया है, वहीं कल्याण ज्वेलर्स और मोतीसंस ज्वेलर्स जैसे शेयरों में इस साल हल्की तेजी देखी गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशक अब उन कंपनियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिनके पास मजबूत कैश फ्लो है और जो सिर्फ रिटेल मांग पर निर्भर नहीं हैं।
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