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4 min read | अपडेटेड August 19, 2026, 13:14 IST
सारांश
अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट कंपनी गाजा कैपिटल के आईपीओ में 21 अगस्त तक बोली लगाई जा सकती है। रिटेल निवेशकों के लिए इसमें 0.69 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। कंपनी फ्रेश इश्यू के पैसों से नए फंड्स में स्पॉन्सर कमिटमेंट और ब्रिज लोन का भुगतान करेगी।

निवेश करने से पहले समझ लें इस आईपीओ की डीटेल।
प्राइमरी शेयर बाजार में आज यानी 19 अगस्त 2026 से एक और प्रमुख पब्लिक इश्यू दांव लगाने के लिए खुल गया है। भारत की जानी-मानी अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट और प्राइवेट इक्विटी फर्म गाजा कैपिटल ब्रांड के तहत काम करने वाली गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड का 550 करोड़ रुपये का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन हो चुका है। निवेशक इस आईपीओ में 21 अगस्त 2026 तक बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के जरिए पहली बार भारत की कोई स्टैंड अलोन और स्वदेशी प्राइवेट इक्विटी फर्म शेयर बाजार में लिस्ट होने जा रही है। पहले दिन के शुरुआती आंकड़ों में निवेशकों का मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है।
19 अगस्त 2026 को दोपहर 12:58 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट का आईपीओ कुल मिलाकर 0.46 गुना यानी 46% सब्सक्राइब हो चुका है। कैटगरी के हिसाब से देखें तो रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स के हिस्से में 0.69 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज हुआ है। वहीं नॉन-इन्स्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी NII कैटेगरी में यह इश्यू 0.53 गुना भरा है। एंकर निवेशकों को छोड़कर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी कैटेगरी में पहले दिन दोपहर तक कोई बोली दर्ज नहीं हुई है।
कंपनी के 550 करोड़ रुपये के इस पब्लिक इश्यू में 450 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 100 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल यानी OFS शामिल है। ऑफर फॉर सेल के तहत कंपनी के प्रमोटर और मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए 152 रुपये से 160 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। आम रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट साइज 93 शेयरों का रखा गया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से निवेशकों को एक लॉट के लिए कम से कम 14,880 रुपये का निवेश करना होगा। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 26 अगस्त 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर होने की संभावना है।
गाजा कैपिटल की शुरुआत साल 2004 में हुई थी। यह कंपनी अल्टरनेटिव एसेट मैनेजर और प्राइवेट इक्विटी फर्म के रूप में काम करती है। यह कंपनी भारतीय मध्य-बाजार में उभरती हुई कंपनियों को ग्रोथ कैपिटल प्रदान करती है। कंपनी मुख्य रूप से एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंज्यूमर और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में निवेश करती है। आईपीओ से मिलने वाले 450 करोड़ रुपये के फ्रेश फंड में से कंपनी लगभग 372 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपने मौजूदा व नए फंड्स में स्पॉन्सर कमिटमेंट को पूरा करने और ब्रिज लोन चुकाने के लिए करेगी। इसके अलावा बची हुई रकम का इस्तेमाल जनरल कॉरपोरेट कामों में किया जाएगा।
कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस की बात करें तो पिछले तीन सालों में इसकी वित्तीय स्थिति मजबूत रही है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू बढ़कर 135.53 करोड़ रुपये रहा है, जो वित्त वर्ष 2025 में 121.99 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024 में 95.64 करोड़ रुपये था। कंपनी का एबिटा वित्त वर्ष 2026 में 72.05 करोड़ रुपये रहा है। वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट वित्त वर्ष 2026 में 81.96 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो वित्त वर्ष 2025 में 61.95 करोड़ रुपये था। कंपनी की इनकम में मैनेजमेंट फीस, कैरीड इंटरेस्ट और स्पॉन्सर कमिटमेंट से मिलने वाला रिटर्न शामिल है।
इस आईपीओ में दांव लगाने से पहले निवेशकों को कंपनी से जुड़े रिस्क फैक्टर्स को भी ध्यान में रखना चाहिए। कंपनी की इनकम का एक बड़ा हिस्सा कैरीड इंटरेस्ट पर निर्भर करता है, जो सीधे तौर पर फंड्स के परफॉरमेंस और सफल एग्जिट पर आधारित होता है। अगर बाजार में सुस्ती आती है या इन्वेस्टमेंट्स की सेलिंग प्रभावित होती है, तो कंपनी की इनकम में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसके अलावा प्राइवेट इक्विटी बिजनेस में अनुभवी प्रोफेश्नल्स और की-पर्सनल पर बहुत अधिक निर्भरता होती है। साथ ही सेबी के नियम और टैक्स नियमों में बदलाव भी कंपनी के बिजनेस मॉडल और फ्यूचर ग्रोथ पर सीधा असर डाल सकते हैं।
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