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  1. पैकेज्ड फूड पर ‘रेड अलर्ट’ लगाने की तैयारी! Nestle, Britannia, ITC समेत कई शेयरों पर दबाव

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पैकेज्ड फूड पर ‘रेड अलर्ट’ लगाने की तैयारी! Nestle, Britannia, ITC समेत कई शेयरों पर दबाव

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड August 31, 2026, 12:22 IST

सारांश

आज Nestle India का शेयर करीब 2 फीसदी तक गिरकर 1427.30 रुपये के भाव पर आ गया। Britannia Industries के शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी नजर आई। इसके अलावा ITC, Varun Beverages और Tata Consumer Products के शेयर भी हल्की गिरावट के साथ लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे।

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FSSAI पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के पैकेट के सामने लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दे रहा है। (AI generated Image)

आज 31 अगस्त को पैकेज्ड फूड और बेवरेज कंपनियों के कई शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है। दरअसल, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव है। इस खबर के बीच Nestle India, Britannia Industries, ITC, Tata Consumer Products और Varun Beverages जैसे शेयरों में कमजोरी नजर आ रही है।

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आज के कारोबार में Nestle India का शेयर करीब 2 फीसदी तक गिरकर 1427.30 रुपये के भाव पर आ गया। Britannia Industries के शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी नजर आई। इसके अलावा ITC, Varun Beverages और Tata Consumer Products के शेयर भी हल्की गिरावट के साथ लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे।

क्या है FSSAI का प्रस्ताव?

29 अगस्त की PTI रिपोर्ट के मुताबिक FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि वह ऐसे पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के पैकेट के सामने लाल रंग का प्रमुख चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दे रहा है, जिनमें ज्यादा मात्रा में अतिरिक्त सैचुरेटेड फैट, अतिरिक्त चीनी या नमक हो।

प्रस्ताव के तहत अगर किसी प्रोडक्ट में इन तीन में से कम से कम दो पोषक तत्व तय सीमा से ज्यादा हैं, तो उसके पैकेट पर लाल रंग के हेक्सागोन यानी छह कोनों वाले निशान में चेतावनी दी जा सकती है।

पैकेट पर क्या लिखा होगा?

प्रोडक्ट के हिसाब से लेबल पर “High Fat”, “High Sugar”, “High Salt” या “Highly Sweetened Beverage” जैसी चेतावनी लिखी जा सकती है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को बिना ज्यादा जानकारी पढ़े यह समझने में मदद करना है कि किसी प्रोडक्ट में चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा है। FSSAI ने ये प्रस्ताव ICMR-NIN की Dietary Guidelines for Indians, 2024 में दिए गए मानकों के आधार पर रखा है।

सुप्रीम कोर्ट में मामला क्यों पहुंचा?

यह मामला ‘3S and Our Health Society’ नाम के एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने पैकेज्ड फूड पर अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लगाने की मांग की है। 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI की देरी पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या सरकार नहीं चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें। इसके बाद FSSAI ने कोर्ट में अपना अनुपालन हलफनामा दाखिल किया और प्रस्ताव की जानकारी दी।

हालांकि, अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है। इसलिए तुरंत कंपनियों की कमाई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। लेकिन निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि भविष्य में कंपनियों को प्रोडक्ट की रेसिपी बदलनी पड़ सकती है, अनुपालन लागत बढ़ सकती है और ग्राहकों की पसंद भी बदल सकती है।

किन कंपनियों पर नजर रहेगी?

Nestle India के नूडल्स, चॉकलेट, कन्फेक्शनरी और अन्य पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के कारण यह प्रमुख कंपनी है जिस पर नजर रहेगी। Britannia के बिस्किट और बेकरी प्रोडक्ट्स भी चीनी, नमक और फैट के लिहाज से अहम हैं। ITC के बिस्किट, स्नैक्स और अन्य FMCG प्रोडक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं, हालांकि उसके विविध कारोबार से कुछ राहत मिल सकती है। Tata Consumer पर असर प्रोडक्ट के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। वहीं Varun Beverages के लिए “Highly Sweetened Beverage” लेबल अहम है, क्योंकि इसका कारोबार शुगर वाली कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से काफी जुड़ा है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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