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4 min read | अपडेटेड September 07, 2026, 07:11 IST
सारांश
सितंबर के पहले हफ्ते में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 7443 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। जुलाई और अगस्त में भारी खरीदारी के बाद विदेशी निवेशकों का मूड अचानक बदल गया है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने फिर से बिकवाली शुरू कर दी है।
भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो महीनों से जारी तेजी और विदेशी पैसों की आवक पर अचानक ब्रेक लग गया है। जुलाई और अगस्त में बंपर खरीदारी करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी FPI एक बार फिर बिकवाली के मोड में आ गए हैं। सितंबर महीने के पहले ही हफ्ते में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 7,443 करोड़ रुपये की भारी रकम निकाल ली है। अचानक हुई इस बड़ी निकासी से रिटेल निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है और बाजार में गिरावट का डर सताने लगा है।
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का रुख पिछले कुछ समय से काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। जुलाई के महीने में एफपीआई ने भारतीय बाजार में 20,200 करोड़ रुपये का नेट निवेश किया था। इसके बाद अगस्त में यह आंकड़ा और बढ़कर 30,919 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। लगातार दो महीने की इस खरीदारी से उम्मीद जताई जा रही थी कि विदेशी पैसा बाजार में टिका रहेगा। हालांकि सितंबर के पहले ही हफ्ते में 7,443 करोड़ रुपये की बिकवाली ने पूरा गणित बिगाड़ दिया है। इससे पहले मार्च से लेकर जून तक लगातार चार महीने तक विदेशी निवेशक सिर्फ बिकवाली ही कर रहे थे। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज इंडिया लिमिटेड यानी सीडीएसएल के ताजा आंकड़ों के अनुसार साल 2026 में अब तक एफपीआई की कुल बिकवाली 2.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जो साल 2025 में 1.66 लाख करोड़ रुपये रही थी।
विदेशी निवेशकों की इस अचानक घबराहट और बिकवाली के पीछे कई बड़े ग्लोबल कारण बताए जा रहे हैं। यस सिक्योरिटीज के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर राजकुमार राठी के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह बनी है। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल आने और डॉलर के लगातार मजबूत होने से विदेशी निवेशक जोखिम उठाने से बच रहे हैं। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार में काफी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि ग्लोबल बॉन्ड यील्ड का रुख ही एफपीआई का अगला कदम तय करेगा। वहीं बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार पर लगातार दबाव बनाए रखेगा। हालांकि सभी एक्सपर्ट्स और निवेशकों की नजरें मध्य सितंबर में होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हैं। फेड रिजर्व के फैसलों से ही यह साफ होगा कि विदेशी निवेशक वापस भारत लौटेंगे या बिकवाली का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।
विदेशी निवेशकों ने केवल शेयर बाजार से ही पैसा नहीं निकाला है, बल्कि डेट यानी बॉन्ड बाजार से भी जमकर निकासी की है। सितंबर के पहले सप्ताह में एफपीआई ने फुली एक्सेसिबल रूट यानी एफएआर के तहत 377 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके अलावा वॉलंटरी रिटेंशन रूट यानी वीआरआर के जरिए 231 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई है। हालांकि जनरल रूट के जरिए 217 करोड़ रुपये का छोटा निवेश जरूर देखने को मिला है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे बाजार का सेंटीमेंट फिलहाल कमजोर ही नजर आ रहा है।
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