मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड May 10, 2026, 13:18 IST
सारांश
विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने घरेलू मार्केट की चिंता बढ़ा दी है। 2026 में अब तक 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी हो चुकी है। वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती जैसे कारणों से निवेशक पैसा निकाल रहे हैं। हालांकि, बिजली और निर्माण जैसे कुछ सेक्टरों में अब भी विदेशी निवेश आ रहा है।

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली थम नहीं रही है। | Image: Shutterstock
भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 अब तक काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने इस साल घरेलू बाजार में जमकर बिकवाली की है। आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने 2.06 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए हैं। यह स्थिति बाजार के लिए इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि विदेशी निवेशक लगातार तीसरे महीने नेट सेलर बने हुए हैं। अगर हम सिर्फ मई महीने की बात करें, तो अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 14,231 करोड़ रुपए की निकासी कर ली है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का यह रुख घरेलू निवेशकों के मनोबल पर भी असर डाल रहा है।
विदेशी निवेशकों की ओर से की जा रही यह बिकवाली पिछले कुछ समय से लगातार बनी हुई है। शुक्रवार के आंकड़ों को देखें तो FII ने 4,110.60 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। हालांकि, इसी दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने बाजार को संभालने की कोशिश की और 6,748.13 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद बाजार में गिरावट का रुख नहीं बदला। फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली की वजह से बाजार नीचे आ गिरा। निफ्टी 150.50 अंक यानी करीब 0.62 पर्सेंट गिरकर 24,176.15 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बीएसई सेंसेक्स भी 516.33 अंक यानी 0.66 पर्सेंट की गिरावट के साथ 77,328.19 पर आ गया।
साल 2026 की शुरुआत से ही विदेशी निवेशकों का व्यवहार काफी अस्थिर रहा है। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे। इसके बाद फरवरी में थोड़ी राहत मिली जब वे शुद्ध खरीदार बने और 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया। यह निवेश पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिकी और मार्च का महीना इस साल का सबसे खराब समय साबित हुआ। मार्च में वॉर और अन्य वैश्विक कारणों से 1,17,775 करोड़ रुपए की भारी निकासी हुई। अप्रैल में भी यह सिलसिला जारी रहा और 60,847 करोड़ रुपए के शेयर बेचे गए। अब मई में भी हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस भारी बिकवाली के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण हैं। महंगाई, बढ़ती ब्याज दरें और भू-राजनीतिक जोखिमों ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया है। वैश्विक स्तर पर जो आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है, उसके चलते निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा भारतीय रुपया भी लगातार दबाव में है, जिससे विदेशी निवेशकों के डॉलर-समायोजित रिटर्न पर सीधा असर पड़ रहा है। यही वजह है कि वे भारत के मुकाबले ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में पैसा लगा रहे हैं। ताइवान को लगभग 5.5 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया को करीब 4 अरब डॉलर का निवेश मिला है, जबकि भारत से पैसा बाहर जा रहा है।
इतनी बिकवाली के बाद भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां विदेशी निवेशक अब भी पैसा लगा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, एफआईआई बिजली, निर्माण और पूंजीगत सामान जैसे चुनिंदा सेक्टरों में निवेश करने में रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, लार्ज-कैप शेयरों का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा है। घरेलू निवेश के मजबूत फ्लो की वजह से स्मॉल और मिड-कैप यानी एसएमआईडी सेगमेंट को सहारा मिल रहा है। जब तक विदेशी निवेशक भारत में अपना निवेश दोबारा नहीं बढ़ाते, तब तक बाजार में बड़ी तेजी की संभावना कम ही नजर आती है।
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