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4 min read | अपडेटेड November 03, 2026, 13:32 IST
सारांश
गिरते शेयर बाजार के बीच इस धनतेरस सिर्फ पारंपरिक खरीदारी तक सीमित न रहें, बल्कि डायवर्सिफाइड बाइंग को अपनाएं। सोने और चांदी के साथ सस्ते मिल रहे क्वालिटी शेयरों, इंडेक्स फंड्स और फिक्स्ड इनकम में पूंजी बांटने से रिस्क कम होता है।

इस धनतेरस करें निवेश की स्मार्ट प्लानिंग।
धनतेरस का त्योहार केवल पारंपरिक खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने वित्तीय फ्यूचर को सुरक्षित और मजबूत बनाने का भी सबसे अच्छा अवसर है। आमतौर पर लोग इस पावन दिन पर सिर्फ सोना, चांदी या बर्तन खरीदने पर ही ध्यान देते हैं। लेकिन आज जब शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और गिरावट का माहौल बना हुआ है, तब सिर्फ एक जगह पैसा लगाने के बजाय 'डायवर्सिफाइड बाइंग' यानी अलग-अलग संपत्तियों में पैसे बांटकर लगाना सबसे समझदारी भरा कदम है। गिरते बाजार में पोर्टफोलियो को नुकसान से बचाने के लिए एसेट एलोकेशन एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। इसलिए इस धनतेरस सिर्फ बाइंग नहीं, बल्कि स्मार्ट और डायवर्सिफाइड निवेश को हां कहना आपकी वित्तीय सेहत के लिए बहुत जरूरी है।
जब शेयर बाजार में बिकवाली का दौर चलता है, तो किसी एक ही सेक्टर या केवल इक्विटी में सारा पैसा लगाने वाले निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे समय में डायवर्सिफिकेशन यानी अपने निवेश को अलग-अलग एसेट क्लास में बांटना सबसे ज्यादा काम आता है। वित्तीय बाजार का यह पुराना नियम है कि जब शेयर बाजार नीचे गिरता है, तो सोना और डेट फंड्स जैसी संपत्तियां पोर्टफोलियो को मजबूती देती हैं। धनतेरस के मौके पर अगर आप अपने बजट को केवल सोने या किसी एक शेयर में लगाने के बजाय संतुलित तरीके से बांटते हैं, तो बाजार की गिरावट का आपके कुल निवेश पर बुरा असर नहीं पड़ता है। इससे आपका रिस्क घट जाता है और लंबे समय में रिटर्न का संतुलन बना रहता है।
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है, लेकिन इसे भी स्मार्ट तरीके से डायवर्सिफाई किया जा सकता है। फिजिकल गहनों में मेकिंग चार्ज और सुरक्षा की चिंता रहती है। ऐसे में आप अपने निवेश का एक हिस्सा गोल्ड ईटीएफ या डिजिटल गोल्ड में लगा सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ में शुद्धता की पूरी गारंटी मिलती है और इसे कभी भी आसानी से बेचा जा सकता है। इसके अलावा चांदी भी इंडस्ट्रियल मांग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ती खपत के कारण एक शानदार निवेश विकल्प बनकर उभरी है। सोने और चांदी का संतुलित हिस्सा आपके पोर्टफोलियो को महंगाई और मुद्रा के उतार-चढ़ाव से पूरी सुरक्षा देता है।
शेयर बाजार में जारी हालिया करेक्शन को डरने के बजाय एक अच्छे मौके के रूप में देखना चाहिए। जब बाजार गिरता है, तो कई मजबूत कंपनियों के शेयर भी अपने ऊंचे स्तरों से काफी सस्ते दामों पर मिलने लगते हैं। धनतेरस पर आप अपने डायवर्सिफाइड प्लान के तहत लार्जकैप कंपनियों और इंडेक्स फंड्स में थोड़ा-थोड़ा पैसा लगा सकते हैं। इसके लिए SIP का रास्ता चुनना सबसे बेहतर माना जाता है। इससे रुपए कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है। जब बाजार नीचे होता है तो आपको अधिक यूनिट्स मिलती हैं, जो मार्केट के दोबारा ऊपर चढ़ने पर शानदार मुनाफा बनाकर देती हैं।
एक मजबूत और संतुलित पोर्टफोलियो तभी बनता है जब उसमें इक्विटी और कमोडिटी के साथ-साथ फिक्स्ड इनकम का भी सही हिस्सा हो। गिरते बाजार में नियमित रिटर्न के लिए बैंक FD, सरकारी बॉन्ड्स और शॉर्ट टर्म डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना जरूरी है। यह हिस्सा उस समय पूंजी की सुरक्षा करता है जब बाकी बाजार में मंदी छाई होती है। वित्तीय जानकारों की सलाह है कि इस धनतेरस केवल परंपरा निभाने के लिए एकतरफा खरीदारी न करें, बल्कि अपने लक्ष्यों के अनुसार 50% इक्विटी, 25% गोल्ड और 25% फिक्स्ड इनकम जैसे फार्मूले पर विचार करें। यह रणनीति आपको बाजार के हर झटके से सुरक्षित रखेगी।
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