मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड August 25, 2026, 14:43 IST
सारांश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने DRDO द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की टेक्नोलॉजी को भारतीय रक्षा उद्योग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है। इससे देश में मिसाइलों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

भारतीय कंपनियों और एमएसएमई को मिसाइल निर्माण का मौका मिलेगा।
भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के विजन को हासिल करने की दिशा में एक बहुत बड़ा फैसला लिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की टेक्नोलॉजी को देश के भीतर ही प्रोडक्शन के लिए भारतीय रक्षा उद्योग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत अब देश की घरेलू कंपनियां ही इन सभी मिसाइल सिस्टम्स का उत्पादन भारत में ही करेंगी। इस ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) को देश के रक्षा इकोसिस्टम में घरेलू उद्योगों की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योगों को जरूरी योग्यताओं, सर्टिफिकेशन और रेगुलेटरी आवश्यकताओं के अनुसार मिसाइलों का स्वदेशी यानी इंडिजीनस उत्पादन शुरू करने का एक बेहतरीन मौका मिलेगा। हालांकि अभी तक इस फैसले से डिफेंस सेक्टर के शेयर पर बहुत खास असर नहीं देखा जा रहा है। टॉप डिफेंस स्टॉक अभी भी सामान्य तौर पर कारोबार कर रहे हैं।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से मिसाइल प्रणालियों के डेवलपमेंट से लेकर उनके इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी औद्योगिक उत्पादन तक का सफर काफी आसान और सफल हो जाएगा। यह फैसला एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम के विकास और निर्माण के लिए भारतीय उद्योग की क्षमताओं का उपयोग करने के DRDO के लगातार जारी प्रयासों को दर्शाता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाना और भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को और अधिक मजबूत बनाना है। इसके अलावा, मिसाइल निर्माण की पूरी सप्लाई चेन में भारतीय एमएसएमई (MSME) और अन्य टेक्नोलॉजी पार्टनर्स की बड़े पैमाने पर भागीदारी के लिए नए दरवाजे खुलेंगे, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के उद्योगों को भी विकास के नए अवसर मिलेंगे।
सरकार की इस खास योजना का मुख्य लक्ष्य भारतीय सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल कैपेसिटी को काफी बेहतर बनाना है। इसके साथ ही विदेशों से हथियारों और रक्षा प्रणालियों के आयात पर निर्भरता को कम करना और देश के भीतर ही डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन को लगातार बढ़ाना है। यह कदम भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की ग्रोथ को काफी सहयोग प्रदान करेगा और इसे एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। जब देश में ही आधुनिक मिसाइल सिस्टम का निर्माण होगा, तो इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक ढांचे को भी एक नई मजबूती मिलेगी।
DRDO एडवांस्ड डिफेंस तकनीकों के ट्रांसफर को आसान बनाने और भारतीय उद्योगों द्वारा उन्हें बेहतर ढंग से अपनाने की प्रक्रिया में मदद करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसके लिए DRDO भारतीय रक्षा उद्योगों के साथ मिलकर काफी गहराई से काम करता रहेगा। इस तरह की मजबूत साझेदारी से देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा भारत रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक शक्तिशाली और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर सकेगा। आने वाले समय में यह ऐतिहासिक निर्णय देश के रक्षा उद्योग को एक नया आयाम देने में अहम भूमिका निभाएगा।
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