मार्केट न्यूज़

3 min read | अपडेटेड April 23, 2026, 10:56 IST
सारांश
आईटी सर्विस दिग्गज कोफोर्ज ने एनकोरा के अधिग्रहण (एक्विजिशन) की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी ने इस डील के लिए 550 मिलियन डॉलर का लोन जुटाया है और क्यूआईपी (QIP) लाने का विचार छोड़ दिया है। कंपनी को उम्मीद है कि इस डील से वित्त वर्ष 2027 में उसकी ग्रोथ को बड़ी मजबूती मिलेगी।
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कोफोर्ज ने एनकोरा के साथ मिलकर अब ग्लोबल लेवल पर अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी कर ली है।
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी कोफोर्ज लिमिटेड ने ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने एलान किया है कि उसने एनकोरा के अधिग्रहण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसकी घोषणा पहले ही की गई थी। यह अधिग्रहण कोफोर्ज के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है क्योंकि इससे कंपनी की ताकत और उसकी काम करने की क्षमता में काफी इजाफा होने की उम्मीद है। हालांकि आज कंपनी के शेयर पर इसका कुछ खास असर नहीं देखा जा रहा है। कंपनी का शेयर हल्की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहा है।
इस बड़े अधिग्रहण को पूरा करने के लिए कोफोर्ज ने अपनी फंडिंग की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने बताया कि उसने 550 मिलियन डॉलर का तीन साल के लिए लोन हासिल किया है, जिस पर 4.6 पर्सेंट का फिक्स्ड ब्याज लगेगा। इस लोन के मिल जाने की वजह से कंपनी ने अब क्यूआईपी (QIP) लाने का अपना पुराना प्लान पूरी तरह से कैंसिल कर दिया है। कंपनी को इस लोन की पहली किस्त का भुगतान छह महीने के बाद से शुरू करना होगा। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि कंपनी इक्विटी को और ज्यादा पतला नहीं करना चाहती है।
अधिग्रहण के समझौते के तहत एनकोरा के सेलर्स को कोफोर्ज के शेयर अलॉट किए गए हैं। इन शेयरों की कीमत 1815.91 रुपये प्रति शेयर तय की गई है, जो कि दिसंबर में समझौते के समय तय हुए भाव के आधार पर है। कोफोर्ज ने यह भी साफ किया है कि 1 मई 2026 से एनकोरा के वित्तीय आंकड़ों को कोफोर्ज के साथ जोड़ दिया जाएगा यानी कंसोलिडेशन प्रभावी होगा। इसका मतलब यह है कि वित्त वर्ष 2027 के नतीजों में कोफोर्ज को एनकोरा के ऑपरेशन्स का पूरा 11 महीने का फायदा देखने को मिलेगा।
कोफोर्ज को उम्मीद है कि इस अधिग्रहण से कामकाज के खर्चों में काफी बचत होगी। कंपनी ने अनुमान लगाया है कि जनरल और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों में करीब 20 से 25 पर्सेंट तक की बचत यानी सिनर्जी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा कंपनी ने अपने मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को भी नया रूप दिया है। एनकोरा के जिन लीडर्स को कोफोर्ज अपने साथ रखना चाहती थी, उन सभी ने कंपनी में अपनी नई भूमिकाएं स्वीकार कर ली हैं। इसी कड़ी में बिजनेस लीडर विजय वर्मा को अब संस्था के सीनियर मैनेजमेंट पर्सनेल (SMP) के रूप में शामिल किया गया है।
यह अधिग्रहण कोफोर्ज को ग्लोबल लेवल पर एक नई पहचान दिलाने वाला साबित होगा। कंपनी का लक्ष्य है कि एआई-लेड इंजीनियरिंग, डेटा और क्लाउड सर्विसेज के दम पर वह वित्त वर्ष 2027 तक 2 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल कर ले। एनकोरा के साथ आने से कोफोर्ज अब लैटिन अमेरिका (LATAM) के मार्केट में भी बड़ी भूमिका निभाएगी, जहां उसके पास बेहतरीन एआई टैलेंट मौजूद होगा। इसके साथ ही हाई-टेक और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर में भी कंपनी का स्केल काफी बढ़ जाएगा और अमेरिकी क्लाइंट्स के साथ उसके रिश्ते और मजबूत होंगे। अब यह नई कंपनी करीब 2.5 बिलियन डॉलर के आकार वाली फर्म बन गई है।
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