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मार्केट न्यूज़

बैंकिंग शेयरों में आई बंपर तेजी, जानिए आरबीआई की किस स्कीम ने कराई पैसों की बारिश?

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड September 03, 2026, 11:05 IST

सारांश

आरबीआई की स्पेशल स्वैप फैसिलिटी के तहत भारत में 127.23 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम एफसीएनआर-बी डिपॉजिट आया है। इस बड़ी खबर के बाद गुरुवार 3 सितंबर को बैंकिंग शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। निफ्टी बैंक, पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1% से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया।

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आरबीआई की स्कीम के बाद बैंकिंग शेयरों में आई तेजी। | Image: Shutterstock.

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार 3 सितंबर को बैंकिंग शेयरों में जोरदार बढ़त देखने को मिली। सुबह के कारोबार में निफ्टी बैंक इंडेक्स 0.71% चढ़कर 57577.15 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती सेशन के दौरान इस इंडेक्स ने 57661.40 का उच्च स्तर भी छुआ। बाजार में यह तेजी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई की एक रिपोर्ट के बाद आई है। रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई की स्पेशल स्वैप फैसिलिटी के तहत 31 अगस्त तक देश में 127.23 बिलियन डॉलर का भारी FCNR-B यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट डिपॉजिट आया है। NRI निवेशकों की तरफ से मिले शानदार रिस्पॉन्स को देखते हुए इस योजना की आखिरी तारीख को एक महीने पहले ही बंद कर दिया गया।

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PSU और प्राइवेट बैंक शेयरों में आई जोरदार तेजी

आरबीआई के इस अपडेट से पूरे बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में हरियाली छा गई। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 1.18% की मजबूती के साथ 27931.95 के स्तर पर पहुंच गया। प्राइवेट बैंकों में आरबीएल बैंक 3.62% की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक 0.69%, आईसीआईसीआई बैंक 1.28%, एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक के शेयर भी 1% से ज्यादा चढ़कर कारोबार कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.17% चढ़कर 8611.70 के स्तर पर पहुंच गया। सरकारी बैंकों के इस इंडेक्स में शामिल सभी 12 शेयरों में तेजी देखी गई। इसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र का शेयर 4% से ज्यादा चढ़कर सबसे आगे रहा, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई का शेयर 1.16% बढ़कर 1032.70 रुपये पर पहुंच गया।

क्या है आरबीआई की स्पेशल स्वैप फैसिलिटी?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 8 जून 2026 को FCNR-B डिपॉजिट, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बोरोइंग्स और एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग्स के लिए स्पेशल यूएसडी-आईएनआर फॉरेक्स स्वैप फैसिलिटी लॉन्च की थी। इस योजना का मुख्य मकसद वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बीच देश के एक्सटर्नल सेक्टर को मजबूत बनाना और विदेशी मुद्रा की लिक्विडिटी को बढ़ाना था। आरबीआई के डेटा के मुताबिक इस कदम से देश में विदेशी मुद्रा का भारी प्रवाह हुआ है। 31 अगस्त तक देश में कुल 136.377 बिलियन डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया है। इसमें से अकेले एफसीएनआर-बी डिपॉजिट के जरिए 127.226 बिलियन डॉलर आए हैं, जो नॉन-रेजिडेंट इंडियंस यानी एनआरआई के जबरदस्त भरोसे को दिखाता है।

बैंकिंग सिस्टम और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा यह असर

बैंकिंग सिस्टम में इतने बड़े पैमाने पर विदेशी फंड का आना बैंकों के लिए बेहद फायदेमंद माना जा रहा है। इससे बैंकों के पास फॉरेन करेंसी फंडिंग मजबूत हुई है और बैंकिंग सिस्टम में रुपये की लिक्विडिटी बढ़ी है। जब बैंक इन डॉलर को आरबीआई के साथ बदलकर रुपये में लाते हैं, तो इससे वित्तीय प्रणाली में पैसा बढ़ता है। इससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता यानी क्रेडिट ग्रोथ बढ़ती है। कंपनियां फैक्ट्रियों का विस्तार करने, नए प्रोजेक्ट में निवेश करने और प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए आसानी से लोन ले सकती हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे बैंकों के नेट प्रॉफिट या मार्जिन पर तुरंत बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि बैंकों को इन डिपॉजिट पर ब्याज देना होता है। लेकिन लिक्विडिटी बढ़ने से देश की आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बड़ा सहारा मिलेगा।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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