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6 min read | अपडेटेड August 10, 2026, 13:01 IST
सारांश
आरडी इंडस्ट्रीज आईपीओ का अलॉटमेंट आज देर शाम तक फाइनलाइज हो जाएगा। अगर आपने इस आईपीओ में दांव लगाया है, तो आपके खाते में इसके शेयर आए या नहीं? इसका फैसला आज रात तक हो जाएगा। आरडी इंडस्ट्रीज का सब्सक्रिप्शन शानदार रहा था।

आरडी इंडस्ट्रीज आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस आज होगा फाइनलाइज (Photo: Ardee Industries)
आरडी इंडस्ट्रीज आईपीओ का सब्सक्रिप्शन विंडो 7 अगस्त को क्लोज हो गया था और आज इस आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस फाइनलाइज किया जाना है। आज देर शाम तक पता चल जाएगा कि किन निवेशकों को आरडी इंडस्ट्रीज के शेयर अलॉट हुए हैं और किनके हाथ निराश लगी है। आरडी इंडस्ट्रीज का प्लान फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल के कॉम्बिनेशन से 426 करोड़ रुपये तक जुटाने का है। आरडी इंडस्ट्रीज के शेयर एनएसई और बीएसई दोनों पर लिस्ट होंगे, लिस्टिंग की संभावित डेट 12 अगस्त तय की गई है। आरडी इंडस्ट्रीज आईपीओ के लिए फाइनल इश्यू प्राइस 53 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। एप्लीकेशन के लिए लॉट साइज 281 शेयर है। एक व्यक्तिगत निवेशक (रिटेल) के लिए जरूरी कम से कम निवेश की राशि 14,893 (281 शेयर) रुपये तय की गई थी।
अगर आपने भी इस आईपीओ में दांव लगाया है, तो अपना अलॉटमेंट स्टेटस कुछ आसान स्टेप्स में पता कर सकते हैं।
इश्यू टाइप में 'Equity' सेलेक्ट करें।
इश्यू नेम के लिए ड्रॉपडाउन मेनू से आईपीओ का नाम सेलेक्ट करें।
इसके बाद अपना एप्लिकेशन नंबर या PAN दर्ज करें।
अब I'm not a robot पर चेक करने के बाद Search पर क्लिक करें।
इसके Equity & SME IPO bid details' को सेलेक्ट करें।
इश्यू सिंबल के लिए ड्रॉपडाउन लिस्ट से कंपनी नाम सेलेक्ट करें।
इसके बाद PAN नंबर और एप्लिकेशन नंबर दर्ज करें।
अब Submit बटन पर क्लिक करें।
ड्रॉपडाउन मेनू से कंपनी का नाम सेलेक्ट करें।
निवेशकों को अब PAN, एप्लिकेशन नंबर या DP क्लाइंट ID जैसी जानकारी भरनी होगी।
इसके बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें।
कैसा रहा था सब्सक्रिप्शन?
आरडी इंडस्ट्रीज आईपीओ 138.83 गुना सब्सक्राइब हुआ था। 7 अगस्त, 2026 को शाम 6:54:36 बजे (तीसरे दिन) तक, इस पब्लिक इश्यू को रिटेल कैटेगरी में 47.77 गुना, QIB (एंकर को छोड़कर) कैटेगरी में 202.26 गुना और NII कैटेगरी में 266.75 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।
आरडी इंडस्ट्रीज का फोकस इस्तेमाल हो चुकी लेड बैटरियों से मेटल की रिकवरी और उसे दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाने पर है। कंपनी आधुनिक तकनीक की मदद से लेड स्क्रैप को प्रोसेस कर शुद्ध लेड और अलग-अलग ग्रेड के लेड एलॉय तैयार करती है। रीसाइक्लिंग आधारित बिजनेस मॉडल होने के कारण कंपनी प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देने का दावा करती है।
कंपनी के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बैटरी बनाने, इंडस्ट्रियल उपकरण, ऊर्जा भंडारण और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में किया जाता है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहन, टेलीकॉम बैकअप सिस्टम और ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग भविष्य में इस बिजनेस के लिए मौके पैदा कर सकती है। रीसाइक्लिंग मॉडल अपनाने से कंपनी को नए खनन पर निर्भरता कम रखने का फायदा मिल सकता है। साथ ही, ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग स्पेसिफिकेशन वाले प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराना इसकी बिजनेस स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा है।
आरडी इंडस्ट्रीज ऐसे सेक्टर में काम करती है जहां रीसाइक्लिंग की भूमिका लगातार बढ़ रही है। पर्यावरणीय नियमों के सख्त होने और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर बढ़ते जोर के कारण इस उद्योग में लंबी अवधि के अवसर दिखाई देते हैं।
कंपनी का फोकस क्वॉलिटी, परिचालन दक्षता और कस्टमर्स के साथ लॉन्ग-टर्म संबंध बनाए रखने पर है। अगर वह उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए ग्राहकों को जोड़ने में सफल रहती है, तो भविष्य में कारोबार का विस्तार संभव हो सकता है।
डीआरएचपी के मुताबिक आरडी इंडस्ट्रीज के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स कुछ इस तरह हैं-
कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा ग्राहकों से आता है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में अकेले सबसे बड़े ग्राहक का योगदान लगभग 51.22% था। अगर इनमें से कोई बड़ा ग्राहक कारोबार बंद कर दे या ऑर्डर कम कर दे, तो कंपनी की आय और मुनाफे पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कंपनी की लगभग 87% से 91% आय बैटरी और मेटल उद्योग से आती है। अगर इन उद्योगों में मांग घटती है, तो आरडी इंडस्ट्रीज का कारोबार भी प्रभावित हो सकता है।
कंपनी को इंटरनेशनल गुणवत्ता मानकों का पालन करना पड़ता है। यदि उत्पादों की गुणवत्ता में कमी आती है, तो ऑर्डर रद्द हो सकते हैं, उत्पाद वापस मंगाने पड़ सकते हैं और कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। DRHP में एक गुणवत्ता संबंधी रिटर्न का भी उल्लेख है।
कंपनी तीसरे पक्ष के सप्लायरों से कच्चा माल खरीदती है। टॉप 10 सप्लायरों से कुल खरीद का लगभग 51–54% आता है। अगर सप्लाई बाधित होती है या लेड स्क्रैप की कीमतें बढ़ती हैं, तो लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
यह श्रम-प्रधान उद्योग है। यदि कॉन्ट्रैक्ट लेबर उपलब्ध न हो, मजदूरी बढ़ जाए या श्रमिक विवाद हो जाए, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कंपनी के अधिकांश ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक अनुबंध नहीं हैं। इसलिए ग्राहक कभी भी दूसरे सप्लायर चुन सकते हैं या बेहतर कीमत की मांग कर सकते हैं। कंपनी के कारोबार के लिए लगातार कार्यशील पूंजी और अतिरिक्त वित्त की जरूरत रहती है। अगर भविष्य में समय पर फंड नहीं मिला, तो विस्तार योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
लेड और कच्चे माल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बदलती रहती हैं। कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव कंपनी के मार्जिन और लाभ पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
कंपनी का वर्तमान विस्तार अपेक्षाकृत नया है। इसलिए पिछले वर्षों का प्रदर्शन भविष्य में भी उसी तरह जारी रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। कंपनी निर्यात बढ़ा रही है। विदेशी बाजारों में नियमों, मुद्रा विनिमय दर, राजनीतिक परिस्थितियों और व्यापार नीतियों में बदलाव से कारोबार प्रभावित हो सकता है।
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