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3 min read | अपडेटेड March 25, 2026, 09:39 IST
सारांश
अमीर चंद जगदीश कुमार का आईपीओ पहले दिन ही पूरा भर गया है, जिसमें एनआईआई (NII) कैटेगरी ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। दूसरी तरफ साई पैरेंट्रल और पावेरिका को अभी बड़े निवेशकों का इंतजार है। इन तीनों कंपनियों का बिजनेस मॉडल और फंड के इस्तेमाल का तरीका काफी अलग है। निवेश करने से पहले इनके रिस्क फैक्टर्स को समझना बहुत जरूरी है।

शेयर बाजार में एक साथ तीन कंपनियों के आईपीओ खुले, निवेशकों में बढ़ी हलचल।
शेयर बाजार में इस हफ्ते आईपीओ का मेला लगा हुआ है। तीन अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां अपना आईपीओ लेकर आई हैं, जिनमें अमीर चंद जगदीश कुमार, साई पैरेंट्रल और पावेरिका शामिल हैं। जो 24 मार्च को ओपन हुआ है और इसमें 26 मार्च तक निवेश किया जा सकता है। आज इन तीनों आईपीओ का दूसरा दिन है। अमीर चंद जगदीश कुमार के आईपीओ को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह दिख रहा है, जबकि बाकी दोनों कंपनियों को अभी रफ्तार पकड़नी बाकी है।
अमीर चंद जगदीश कुमार के आईपीओ को पहले दिन जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। 24 मार्च की शाम तक यह आईपीओ कुल 1.26 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। इसमें सबसे ज्यादा जोश एनआईआई कैटेगरी में दिखा, जो 4.86 गुना भरा है। रिटेल हिस्सा 0.39 गुना और क्यूआईबी हिस्सा 0.61 गुना सब्सक्राइब हुआ है। कंपनी का बिजनेस बासमती चावल के प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जुड़ा है, जिसका मशहूर ब्रांड 'एरोप्लेन' है। कंपनी आईपीओ से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में करेगी। हालांकि, चावल के बिजनेस में एक्सपोर्ट से जुड़े सरकारी नियम और धान की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। इसका जीएमपी फिलहाल 7 रुपये चल रहा है, जिससे 3.30 पर्सेंट के लिस्टिंग गेन की उम्मीद है।
दवा बनाने वाली कंपनी साई पैरेंट्रल के आईपीओ की शुरुआत पहले दिन काफी सुस्त रही। यह महज 0.05 गुना ही सब्सक्राइब हो पाया है। रिटेल निवेशकों ने इसे सिर्फ 0.03 गुना और एनआईआई ने 0.15 गुना भरा है, जबकि क्यूआईबी की तरफ से अभी कोई बोली नहीं लगी है। यह कंपनी मुख्य रूप से इंजेक्टेबल और ड्राई पाउडर जैसी दवाइयां बनाती है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने और कर्ज कम करने के लिए करना चाहती है। फार्मा सेक्टर में होने की वजह से इस कंपनी पर रेगुलेटरी नियमों और क्वालिटी कंट्रोल का बड़ा दबाव रहता है, जो इसके बिजनेस के लिए एक रिस्क है। फिलहाल इसका जीएमपी 0 रुपये है, जिसका मतलब है कि लिस्टिंग के समय किसी बड़े मुनाफे के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
पावर सॉल्यूशंस देने वाली कंपनी पावेरिका का आईपीओ भी पहले दिन निवेशकों को खींचने में थोड़ा पीछे रहा। यह आईपीओ सिर्फ 0.01 गुना ही सब्सक्राइब हुआ है। कंपनी का बिजनेस डीजल जनरेटर बनाने और विंड पावर के जरिए बिजली पैदा करने से जुड़ा है। यह कंपनी कमिंस जैसी बड़ी ग्लोबल कंपनी के साथ पार्टनरशिप में काम करती है। आईपीओ से मिलने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपना पुराना कर्ज चुकाने में खर्च करेगी। रिस्क की बात करें तो यह कंपनी अपनी पार्टनर कंपनी पर काफी ज्यादा निर्भर है और पावर सेक्टर में बढ़ता कॉम्पिटिशन भी इसके लिए चुनौती बन सकता है। इसका जीएमपी 4 रुपये है, जो कि इश्यू प्राइस के हिसाब से करीब 1 पर्सेंट की मामूली बढ़त दिखा रहा है।
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