मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड March 24, 2026, 09:21 IST
सारांश
एचडीएफसी बैंक के लिए पिछला एक हफ्ता काफी मुश्किल भरा रहा है। बैंक ने साफ किया है कि दुबई की डीआईएफसी ब्रांच में हुई गड़बड़ी की जांच के बाद तीन बड़े अफसरों को हटाया गया है। इन पर हाई-रिस्क बॉन्ड्स की गलत बिक्री के आरोप हैं। चेयरमैन के इस्तीफे के बाद से निवेशक डरे हुए हैं और शेयर 10 पर्सेंट से ज्यादा टूट चुका है।
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एचडीएफसी बैंक ने तीन सीनियर अधिकारियों को नौकरी से निकालने पर अपनी सफाई पेश की है।
देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर के बैंक एचडीएफसी बैंक के लिए पिछला एक हफ्ता किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ है। बैंक के अंदरूनी कामकाज और लीडरशिप को लेकर आई खबरों ने निवेशकों के बीच डर का माहौल बना दिया है। सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर बैंक का शेयर 4.89% गिरकर 742 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि आज कंपनी के शेयर में हल्की खरीदारी देखी जा रही है, जिससे वह 1.26% की तेजी के साथ 752 रुपये पर कारोबार कर रहा है।
बैंक के शेयरों में आई इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह बैंक के अंदरूनी कामकाज को लेकर आई एक चौंकाने वाली खबर थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बैंक ने अपने तीन बहुत सीनियर अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से पद से हटा दिया है। अब इस मामले में एचडीएफसी बैंक ने अपनी सफाई पेश की है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि तीन कर्मचारियों को हटाने का फैसला एक अंदरूनी जांच के बाद लिया गया है। यह जांच दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (डीएफएसए) की ओर से 2025 में मिले एक रेगुलेटरी नोटिस के बाद शुरू की गई थी। यह पूरा मामला बैंक की दुबई स्थित डीआईएफसी ब्रांच से जुड़ा हुआ है। बैंक ने साफ किया है कि वह नियमों के पालन को लेकर बहुत गंभीर है और इसी वजह से यह कड़ा कदम उठाया गया है।
जिन अधिकारियों की छुट्टी की गई है, उनमें ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड संपत कुमार, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका बिजनेस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हर्ष गुप्ता और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पायल मंध्यान शामिल हैं। इन अधिकारियों पर क्रेडिट सुइस के एडिशनल टायर 1 (एटी1) बॉन्ड्स को गलत तरीके से बेचने यानी मिसेलिंग का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि बैंक अपनी दुबई ब्रांच से इन हाई-रिस्क बॉन्ड्स की बिक्री में हुई गड़बड़ी की गहराई से जांच कर रहा है। निवेशकों का आरोप है कि उन्हें इन बॉन्ड्स से जुड़े खतरों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। बैंक की साख पर लगे इस दाग ने निवेशकों को काफी परेशान कर दिया है, जिसका असर शेयर के भाव पर साफ दिख रहा है।
बैंक में संकट की शुरुआत कुछ दिन पहले ही हो गई थी, जब इसके नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे वैल्यूज और एथिक्स यानी मूल्यों और नैतिकता के मतभेदों का हवाला दिया था। यह पहली बार है जब एचडीएफसी बैंक का कोई चेयरमैन अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़कर गया है। उनकी जगह केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है। मिस्त्री ने हालांकि कहा है कि यह मामला लीडरशिप के बीच आपसी तालमेल की कमी का हो सकता है और बैंक का ऑपरेशन पूरी तरह स्थिर है, लेकिन निवेशक इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। सोमवार को एचडीएफसी बैंक का प्रदर्शन निफ्टी 50 इंडेक्स के मुकाबले भी काफी खराब रहा है।
मार्केट में मचे इस पूरे बवाल के केंद्र में एटी1 बॉन्ड्स हैं। एडिशनल टायर 1 (एटी1) बॉन्ड एक तरह के ऊंचे मुनाफे वाले कर्ज के इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जिन्हें बैंक अपनी पूंजी बढ़ाने के लिए जारी करते हैं। इन बॉन्ड्स की कोई फिक्स्ड मैच्योरिटी तारीख नहीं होती, यानी बैंक जब चाहे इन्हें वापस ले सकता है या इन्हें जारी रख सकता है। ये बॉन्ड्स काफी रिस्की माने जाते हैं क्योंकि अगर बैंक की आर्थिक हालत खराब होती है, तो इन बॉन्ड्स की वैल्यू को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है या इन्हें इक्विटी में बदला जा सकता है। निवेशकों का कहना है कि उन्हें बिना खतरों की जानकारी दिए ये बॉन्ड्स बेचे गए, जो अब बैंक के लिए गले की फांस बन गया है।
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