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4 min read | अपडेटेड March 24, 2026, 09:35 IST
सारांश
सरकार ने एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत देते हुए RoDTEP स्कीम के तहत मिलने वाले फायदों को पूरी तरह बहाल कर दिया है। पिछले महीने इन फायदों को आधा कर दिया गया था, जिससे एक्सपोर्टर्स परेशान थे। मिडिल ईस्ट में जारी संकट और बढ़ती माल ढुलाई की लागत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

एक्सपोर्टर्स को राहत देने के लिए सरकार ने स्कीम के पुराने रेट वापस लागू किए।
सरकार ने एक्सपोर्टर्स के चेहरों पर खुशी लौटाने वाला एक बड़ा फैसला लिया है। वेस्ट एशिया में चल रहे संकट और ग्लोबल ट्रेड में आ रही रुकावटों के बीच सरकार ने RoDTEP स्कीम के तहत मिलने वाले सभी फायदों को 31 मार्च तक के लिए पूरी तरह बहाल कर दिया है। पिछले महीने सरकार ने इन फायदों को आधा कर दिया था, जिससे एक्सपोर्टर्स काफी नाराज थे और उन्होंने सरकार से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी। अब सरकार ने उनकी बात मान ली है और नए नोटिफिकेशन के जरिए पुराने रेट्स को वापस लागू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय व्यापारियों को ग्लोबल मार्केट में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने सोमवार को एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि 22 फरवरी 2026 तक जो RoDTEP रेट्स और वैल्यू कैप लागू थे, उन्हें 23 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक के लिए सभी पात्र एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स पर बहाल कर दिया गया है। इस फैसले का मतलब है कि अब एक्सपोर्टर्स को उन सभी टैक्स और ड्यूटी का रिफंड फिर से पुराने रेट पर मिलेगा, जो सामान बनाने और डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान लगते हैं। इस स्कीम के तहत रिफंड की रेंज 0.3 पर्सेंट से लेकर 3.9 पर्सेंट तक होती है। सरकार के इस फैसले से लाखों छोटे और बड़े एक्सपोर्टर्स को सीधा फायदा पहुंचेगा।
वेस्ट एशिया संकट की वजह से लिया फैसला
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद समुद्री और हवाई माल ढुलाई के रेट काफी बढ़ गए हैं। इसके साथ ही इंश्योरेंस प्रीमियम में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए अपना सामान विदेशों में भेजना महंगा हो गया है। समुद्री रास्तों में बदलाव और देरी की वजह से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट काफी ऊपर चली गई है। सरकार ने इन चुनौतीपूर्ण हालातों को देखते हुए ही रेट्स को फिर से बढ़ाने का फैसला लिया है ताकि भारतीय एक्सपोर्टर्स को दुनिया भर के बाजारों में बराबरी का मौका मिल सके। माल भेजने में आ रही दिक्कतों के कारण एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ रही थी, जिसे इस स्कीम के जरिए कम करने की कोशिश की गई है।
इस स्कीम के लिए साल 2025-26 में 18,232 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। अगले साल यानी 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 21,709 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव था, लेकिन सरकार ने सिर्फ 10,000 करोड़ रुपये ही अलॉट किए हैं। इसके अलावा सरकार ने पिछले हफ्ते ही 487 करोड़ रुपये की रिलीफ (RELIEF) स्कीम भी लॉन्च की है। यह स्कीम एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स की मुश्किलों से निपटने में मदद करेगी। सरकार का मानना है कि इन कदमों से एक्सपोर्ट कम्युनिटी को जरूरी सपोर्ट मिलेगा और वे विदेशी बाजारों में अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देंगे।
भले ही सरकार ने अभी राहत दे दी है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि 31 मार्च के बाद क्या होगा, इसे लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। थिंक टैंक जीटीआरआई का कहना है कि यह फैसला सिर्फ एक हफ्ते के लिए ही वैध है। 31 मार्च के बाद कौन से रेट लागू होंगे, इसकी कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में एक्सपोर्टर्स के लिए नए कॉन्ट्रैक्ट करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि वे नहीं जानते कि उन्हें आगे इस स्कीम का फायदा किस रेट पर मिलेगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) ने हालांकि इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे एक्सपोर्टर्स का भरोसा बढ़ेगा, लेकिन भविष्य की पॉलिसी को लेकर क्लेरिटी की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
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