return to news
  1. अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों ने भरा ₹1.50 करोड़, जानें किन कंपनियों के नाम और क्या है पूरा मामला? शेयरों में भी एक्शन

मार्केट न्यूज़

अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों ने भरा ₹1.50 करोड़, जानें किन कंपनियों के नाम और क्या है पूरा मामला? शेयरों में भी एक्शन

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 23, 2026, 09:14 IST

सारांश

निपटान की शर्तों के तहत अडानी एंटरप्राइजेज ने 76.05 लाख रुपये और अडानी ग्रीन एनर्जी ने 45.50 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं, अडानी टोटल गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 9.75-9.75 लाख रुपये दिए।

शेयर सूची

ADANI-RE
--
ATGL
--
ADANIGREEN
--
अडानी ग्रुप

अडानी ग्रुप के शेयरों में आज हलचल (Photo: Shutterstock)

आज अडानी ग्रुप के शेयरों में कुछ हलचल देखने को मिल सकती है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन के खुलासे और ऑडिट और सीमित समीक्षा रिपोर्ट से जुड़े कथित नियम उल्लंघन के मामले में अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही का निपटारा कर दिया है। इन कंपनियों ने सम्मिलित रूप से 1.50 करोड़ रुपये का निपटान शुल्क दिया है। सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के निपटान आदेश के मुताबिक, मामले में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अडानी टोटल गैस लिमिटेड, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड (पूर्व में अडानी विल्मर लिमिटेड), अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (पूर्व में अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड) शामिल हैं। ये कार्यवाही सेबी की उस पड़ताल से जुड़ी थीं, जो अमेरिकी शोध एवं निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की जनवरी, 2023 में प्रकाशित रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों और कॉरपोरेट संचालन से जुड़े मुद्दों की जांच के तहत की गई थी। ऐसे में इस खबर का असर आज अडानी ग्रुप के इन शेयरों पर देखने को मिल सकता है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

इसमें सूचीबद्धता नियमों और तत्कालीन सूचीबद्धता समझौते के संभावित उल्लंघनों की भी जांच की गई थी। निपटान की शर्तों के तहत अडानी एंटरप्राइजेज ने 76.05 लाख रुपये और अडानी ग्रीन एनर्जी ने 45.50 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं, अडानी टोटल गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 9.75-9.75 लाख रुपये दिए। निपटान आदेश के मुताबिक, सेबी की कार्यवाही संबंधित पक्षों के कुछ लेनदेन का खुलासा नहीं करने के आरोपों और ऑडिट गुणवत्ता की पेशेवर समीक्षा से संबंधित वैध ‘पीयर रिव्यू प्रमाणपत्र’ नहीं रखने वाली ऑडिट फर्मों द्वारा ऑडिट या सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए जाने से जुड़ी थी।

बाजार नियामक ने फरवरी, 2024 में इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि कथित उल्लंघनों के संबंध में जांच क्यों न की जाए और जुर्माना क्यों न लगाया जाए। समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज पर आरोप था कि उसने वित्त वर्ष 2012-13 की वार्षिक रिपोर्ट में अपनी अनुषंगी अडानी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित पक्ष वाकोडर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के बीच कुछ संबंधित-पक्ष लेनदेन का खुलासा लागू लेखा मानकों के तहत नहीं किया था। आरोप था कि कंपनी की वित्त वर्ष 2014-15 की ऑडिट रिपोर्ट और जून, 2015 तिमाही की सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर ऐसी ऑडिट फर्म ने हस्ताक्षर किए थे जिसके पास वैध पीयर रिव्यू प्रमाणपत्र नहीं था। कंपनी की जून, 2017, सितंबर, 2017 और दिसंबर, 2021 तिमाहियों की सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर भी ऐसी ही ऑडिट फर्म ने हस्ताक्षर किए थे।

अडानी टोटल गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस से जुड़ी कार्यवाही भी ऐसी ऑडिट या सीमित समीक्षा रिपोर्ट से संबंधित थी, जिन पर वैध प्रमाणपत्र नहीं रखने वाली ऑडिट फर्म ने हस्ताक्षर किए थे। सेबी के आदेश के मुताबिक, इन कंपनियों ने तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों और कानूनी निष्कर्षों को स्वीकार या खारिज किए बिना मामला निपटाने का प्रस्ताव दिया था। सेबी की उच्चाधिकार-प्राप्त सलाहकार समिति ने जून, 2026 में निपटान की शर्तों की अनुशंसा की थी, जिसे 13 अगस्त को पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल ने मंजूरी दी थी। इसके पहले सितंबर, 2025 में सेबी ने हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में लगाए गए हेरफेर के आरोपों की जांच के बाद कहा था कि उसे अडानी ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों में धन भेजने के लिए संबंधित पक्षों के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला।

PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख