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आयुष इकॉनमी ने पकड़ी रफ्तार, $36.92 अरब तक पहुंचा सेक्टर, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड October 08, 2026, 16:06 IST

सारांश

आयुष सर्विस इकॉनमी में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं। साल 2024-25 में आयुष सर्विस सेक्टर का अनुमानित साइज 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर था।

आयुष सर्विस सेक्टर

आयुष क्षेत्र में महिलाओं का दबदबा, 17.6 लाख लोगों को रोजगार का सहारा (Photo: Shutterstock)

आयुष सर्विस सेक्टर महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक भागीदारी के नए अवसर पैदा कर रहा है। सेक्टर के हालिया एसेसमेंट के मुताबिक आयुष सर्विस सेक्टर के कुल वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 43% है। वहीं, हॉस्पिटलों, डे-केयर सेंटरों, शैक्षणिक संस्थानों और वेलनेस प्रतिष्ठानों जैसे कई संगठित सेक्टरों में महिलाओं की भागीदारी 50% से अधिक है। आयुष सर्विस इकॉनमी में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं। साल 2024-25 में आयुष सर्विस सेक्टर का अनुमानित साइज 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर था। साल 2022-23 से इस सेक्टर में 16.91% की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है। यह सेक्टर स्वास्थ्य सेवा, वेलनेस, शिक्षा और इससे जुड़े अन्य सेक्टरों में लगभग 17.6 लाख आजीविकाओं को सीधे सहारा देता है।

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महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी?

आयुर्वेद डे 2026 के मौके पर RIS द्वारा जारी आयुष सर्विस सेक्टर रिपोर्ट के अनुसार संगठित आयुष संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्पा और वेलनेस रिसॉर्ट में महिलाओं की हिस्सेदारी 60% से अधिक, शैक्षणिक संस्थानों में 58%, डे-केयर सेंटरों में 57% और हॉस्पिटलों में 53% है। रिपोर्ट के ये आंकड़े आयुष सर्विस सेक्टर में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, वेलनेस और इससे जुड़े अन्य सेक्टरों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं। स्थानीय और स्वतंत्र रूप से संचालित क्लीनिकों में 10 लाख से अधिक आजीविकाएं जुड़ी हुई हैं। इससे पता चलता है कि आयुष सेक्टर का रोजगार संबंधी प्रभाव शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी व्यापक है।

आयुष सर्विस सेक्टर में कहां से आता है कितना रेवेन्यू?

स्वतंत्र और स्थानीय क्लीनिक आयुष सर्विस सेक्टर में सबसे अधिक रेवेन्यू देने वाले सेक्टर बने हुए हैं। इनसे लगभग 16.21 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी कुल सेक्टर के रेवेन्यू का 43.9% प्राप्त होता है। डे-केयर सेंटरों से लगभग 10.13 अरब अमेरिकी डॉलर का रेवेन्यू आता है। दोनों सेक्टरों को मिलाकर आयुष सर्विस सेक्टर के कुल रेवेन्यू में इनकी हिस्सेदारी 70% से अधिक है। आयुर्वेद आयुष की प्रमुख चिकित्सा प्रणालियों में सबसे बड़ा सेक्टर है, और इससे लगभग 17.73 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी आयुष सर्विस सेक्टर के कुल रेवेन्यू का लगभग 48% प्राप्त होता है।

योग सेंटरों को योगदान जबर्दस्त

वेलनेस सेक्टर में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। इस सेक्टर ने 21.29% की वार्षिक औसत वृद्धि दर दर्ज की है। वहीं, योग सेंटरों के रेवेन्यू में दो सालों के दौरान लगभग 75% की वृद्धि हुई है। यह लोगों के बीच रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है। आयुष सेक्टर मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) के सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2024-25 में इससे लगभग 1.77 अरब अमेरिकी डॉलर का रेवेन्यू हासिल हुआ। विदेशी मरीजों की संख्या कुल मरीजों का लगभग 5% है, लेकिन हॉस्पिटल सेक्टर के रेवेन्यू में उनका योगदान लगभग 15 से 25% है। आयुष से जुड़ी उपचार सेवाओं में मरीज आमतौर पर 5 से 11 दिनों तक रहते हैं।

216 से 318 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है इस सेक्टर का साइज

आकलन के मुताबिक आयुष सर्विस सेक्टर का साइज साल 2024-25 के 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर साल 2047 तक 216 से 318 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, वेलनेस, शिक्षा, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य और अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होने की संभावना है। आयुष सर्विस सेक्टर में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा इसके बढ़ते आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभाव से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, समावेशी विकास और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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