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एलन मस्क के आरोपों पर सरकार का पलटवार, कहा- सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के नियम निष्पक्ष

Upstox

2 min read | अपडेटेड October 08, 2026, 12:33 IST

सारांश

मस्क ने बुधवार को आरोप लगाया था कि 'कुछ कुलीन कारोबारी' भारत में अपनी एकाधिकार स्थिति बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज को रोक रहे हैं।

स्टारलिंक

सैटेलाइट स्पेक्ट्रम पर मस्क के आरोप खारिज, सरकार ने बताया नियम निष्पक्ष (Photo Credit: Shutterstock)

सरकार ने अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क के इस आरोप पर आज कड़ी आपत्ति जताई कि उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज को रोका जा रहा है। सरकार ने क्लियर किया कि देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन के हर लाइसेंसधारक के लिए सुरक्षा मानकों का अनुपालन दिखाना अनिवार्य है . सरकार ने साथ ही कहा कि सैटेलाइट सर्विसेज समेत सभी टेलिकम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए निष्पक्ष और भेदभाव रहित व्यवस्था लागू है। दूरसंचार मंत्रालय ने आज जारी बयान में कहा कि यह कहना कि व्यवस्था या इसे लागू करने का तरीका अनुचित या भेदभावपूर्ण है, निराधार और गलत धारणा पर आधारित है।

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मस्क ने बुधवार को आरोप लगाया था कि 'कुछ कुलीन कारोबारी' भारत में अपनी एकाधिकार स्थिति बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज को रोक रहे हैं। दूरसंचार मंत्रालय ने कहा, 'सोशल मीडिया पर भारत की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए नियामकीय व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर एक 'पोस्ट' वायरल हो रही है और इसमें यह संकेत दिया गया है कि इसे भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जा रहा है।' मंत्रालय ने कहा, 'सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज समेत सभी टेलिकम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए निष्पक्ष और भेदभाव रहित नियामकीय व्यवस्था लागू की है।'

सरकार ने तीन सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों- मस्क की अगुवाई वाली स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब को भारत में परिचालन शुरू करने के लिए लाइसेंस दिए हैं। हालांकि, सभी कंपनियों को सर्विस शुरू करने से पहले स्पेक्ट्रम और सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। दूरसंचार मंत्रालय ने कहा कि लाइसेंस की शर्तों के तहत हर ऐसे लाइसेंसधारक को सुरक्षा संबंधी शर्तों के अनुपालन को प्रदर्शित करना जरूरी है। मंत्रालय ने कहा, 'इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सर्विसेज सभी उपयोगकर्ताओं और उनके आंकड़ों की रक्षा के लिए विभिन्न सुरक्षा जरूरतों को पूरा करती हों। इस प्रक्रिया के तहत तीनों लाइसेंसधारकों के संबंध में सुरक्षा आकलन फिलहाल जारी है।'

मंत्रालय ने कहा कि जब किसी लाइसेंसधारक यूनिट के लिए यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो वह स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के लिए आवेदन करने के अगले चरण में जा सकती है। बयान में कहा गया, 'फिलहाल तीनों इकाइयां मोटे तौर पर नियामकीय प्रक्रिया के एक ही चरण में हैं। ऐसे में यह सुझाव कि व्यवस्था या इसे लागू करने का तरीका अनुचित या भेदभावपूर्ण है, निराधार और गलत धारणा पर आधारित है।'

PTI इनपुट के साथ

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