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  1. सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के बाद क्यों आई पिछले कुछ दिनों में गिरावट, किन फैक्टर्स से चमक पड़ी फीकी?

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सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के बाद क्यों आई पिछले कुछ दिनों में गिरावट, किन फैक्टर्स से चमक पड़ी फीकी?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड September 02, 2026, 13:58 IST

सारांश

भारत में घरेलू कीमतों पर रुपये की चाल और इंटरनेशनल बुलियन कीमतों दोनों का असर पड़ता है। इसलिए अगर डॉलर मजबूत रहता है और ग्लोबल गोल्ड कमजोर होता है, तो भारतीय बाजार में भी सोने-चांदी पर दबाव जारी रह सकता है।

सोना-चांदी

क्यों एकदम से सोने और चांदी की कीमतों में आने लगी गिरावट? (Photo: Shutterstock)

पिछले 10 दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। गोल्ड की बात करें तो 24 अगस्त के करीब ₹1.62 लाख/10 ग्राम के लेवल से घटकर 2 सितंबर को करीब ₹1.55 लाख हुआ। यानी हाल की ऊंचाई से लगभग ₹7,356 की कमी। वहीं चांदी 24 अगस्त के ₹2.45 लाख/किलो के आसपास से 1 सितंबर को ₹2.30 लाख तक आया, हालांकि 2 सितंबर को फिर बढ़कर करीब ₹2.35 लाख हुआ। IBJA के आंकड़ों में 27 अगस्त के बाद सोने और चांदी में काफी उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। हाल की कमजोरी के पीछे मजबूत डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स जैसे ग्लोबल फैक्टर्स भी रहे हैं। भारत में सोने और चांदी की कीमतों में हाल की तेजी के बाद आई गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई ग्लोबल और घरेलू फैक्टर्स हैं। 2 सितंबर 2026 को इंटरनेशनल मार्केट में सोना तीन हफ्ते के निचले स्तर तक आया, जबकि चांदी भी कमजोर हुई।

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किन फैक्टर्स का असर दिखा सोने और चांदी की कीमतों पर?

1- प्रॉफिट बुकिंगः पिछले दिनों तेज रैली के बाद जिन इन्वेस्टरों को अच्छा मुनाफा मिला, उन्होंने ऊंचे स्तर पर बेचना शुरू कर दिया। इससे गोल्ड और सिल्वर दोनों पर शॉर्ट-टर्म दबाव बढ़ा है।
2- अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआः सोने और चांदी की कीमतें इंटरनेशनल लेवल पर डॉलर में तय होती हैं। डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए बुलियन महंगा हो जाता है, जिससे डिमांड पर दबाव आता है।
3- यूएस बॉन्ड यील्ड्स बढ़ने से गोल्ड की चमक कमः अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में बढ़ोतरी से बिना ब्याज देने वाली संपत्ति यानी गोल्ड रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसलिए निवेशक कुछ पैसा बॉन्ड्स जैसी यील्ड देने वाले एसेट्स की ओर ले जा सकते हैं।
4- फेड की ब्याज दरों को लेकर चिंताः बढ़ती महंगाई की चिंता के कारण बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ज्यादा सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की आशंका बढ़ी है। रॉयटर्स के मुताबिक बाजार अब आगामी फेड मीटिंग में रेट हाइक की करीब 70% संभावना देख रहा है। इससे भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
5- कच्चे तेल की कीमतों में तेजीः मिडिल ईस्ट टेंशन के कारण कच्चा तेल महंगा हुआ है। महंगा क्रूड ऑयल इंफ्लेशन को बढ़ा सकता है, जिससे ब्याज दरें ऊंची रहने की चिंता बढ़ती है। यही कारण है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन इस बार गोल्ड के लिए पूरी तरह पॉजिटिव नहीं रही।

आगे क्या दिख सकता है असर?

इस गिरावट को अभी पूरी तरह ट्रेंड रिवर्सल मानना जल्दबाजी होगी। गोल्ड और सिल्वर की दिशा आगे डॉलर, यूएस बॉन्ड यील्ड्स, फेड के संकेत, मिडिल ईस्ट टेंशन और प्रॉफिट बुकिंग पर निर्भर करेगी।

भारत में घरेलू कीमतों पर रुपये की चाल और इंटरनेशनल बुलियन कीमतों दोनों का असर पड़ता है। इसलिए अगर डॉलर मजबूत रहता है और ग्लोबल गोल्ड कमजोर होता है, तो भारतीय बाजार में भी सोने-चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि गोल्ड और सिल्वर की कीमतों को लेकर किसी भी तरह की भविष्यवाणी करना काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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