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4 min read | अपडेटेड May 19, 2026, 16:34 IST
सारांश
वहीं रेटिंग एजेंसी इक्रा ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.2% कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने पहले इसके 6.5% रहने का अनुमान लगाया था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए वृद्धि दर के अनुमान घटाया गया है।

चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमानः इंडिया रेटिंग्स (Photo: Shutterstock)
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.7% रहने का मंगलवार को अनुमान जताते हुए कहा कि डिमांड और सप्लाई दोनों में सुस्ती और ग्लोबल अनिश्चितताएं इसकी प्रमुख वजह होंगी। रेटिंग एजेंसी का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6.9% की वृद्धि दर के अनुमान से कम है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति दर 4.6% पर रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद खुदरा मुद्रास्फीति 4.4% पर रह सकती है, जो कि आरबीआई के लक्षित दायरे के भीतर ही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ेगा। साथ ही, 2026 के मध्य से मौसमी चक्र ‘अल नीनो’ की वजह से कृषि उत्पादन के प्रभावित होने की भी आशंका है, जिससे आर्थिक वृद्धि पर दबाव आएगा।
इंडिया रेटिंग्स की निदेशक (अर्थशास्त्र) मेघा अरोड़ा ने कहा, ‘प्रमुख चुनौतियों में भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची मुद्रास्फीति, कमजोर कैपिटल फ्लो के कारण रुपये में गिरावट, सरकार के पूंजीगत व्यय में संभावित कमी, वैश्विक व्यापार की धीमी रफ्तार और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की कमजोर स्थिति शामिल हैं।’ रेटिंग एजेंसी ने FY2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। इसके मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो आर्थिक वृद्धि दर पर लगभग 0.44% अंक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पूंजीगत व्यय में 10% की कमी आती है, तो वृद्धि दर घटकर करीब 6% तक आ सकती है। एजेंसी का मानना है कि सरकार सीधे नकद अंतरण के बजाय आसान कर्ज और ‘क्रेडिट गारंटी’ जैसे उपायों के जरिये छोटे उद्योगों और उपभोक्ताओं को राहत दे सकती है। रिपोर्ट कहती है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान है, जबकि अल नीनो का असर जुलाई-सितंबर तिमाही में अधिक दिख सकता है। इंडिया रेटिंग्स का अनुमान है कि रुपये की विनिमय दर औसतन 94.28 प्रति डॉलर रह सकती है, जो सालाना आधार पर 6.7% की गिरावट है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
वहीं रेटिंग एजेंसी इक्रा ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.2% कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने पहले इसके 6.5% रहने का अनुमान लगाया था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए वृद्धि दर के अनुमान घटाया गया है। इक्रा ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.5% लगाया है, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के दूसरे अग्रिम अनुमान 7.6% से मामूली कम है।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध के कारण कीमतों में अस्थिरता को देखते हुए, अब फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि हमारा पिछला अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था। परिणामस्वरूप, हमने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अपने अनुमान (2022-23 की स्थिर कीमतों पर) को घटाकर 6.2% कर दिया है, जो पहले 6.5% था।
रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि 2025-26 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर तीन तिमाहियों के निचले स्तर 7.0 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। तीसरी तिमाही में यह 7.8 प्रतिशत रही थी।’ औद्योगिक और सर्विस सेक्टरों में धीमी वृद्धि के कारण जीडीपी वृद्धि में कमी आने का अनुमान है। हालांकि, एग्रिकल्चरल सेक्टर के प्रदर्शन में मामूली सुधार की उम्मीद है।
नायर ने कहा, ‘हालांकि, विनिर्माण मात्रा में धीमी वृद्धि, निर्यात में गिरावट और पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्जिन पर दबाव के शुरुआती संकेतों को देखते हुए तिमाही में औद्योगिक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि पर असर पड़ा है। परिणामस्वरूप, हमारा अनुमान है कि जीडीपी वृद्धि दर 2025-26 की चौथी तिमाही में तीन तिमाहियों के निचले स्तर 7% पर आ जाएगी, जो कि एनएसओ के तिमाही के लिए 7.3% के अनुमान से कम है।’ वैश्विक वृद्धि में नरमी और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न पोत परिवहन को लेकर समस्याओं का असर 2025-26 की मार्च तिमाही में भारत के वस्तु निर्यात पर पड़ा है और सालाना आधार पर यह 2.8% घटा है। दिसंबर तिमाही में इसमें मामूली 1.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
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