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US-Iran शांति डील के बाद धड़ाम से गिरे कच्चे तेल के भाव, क्या भारत में पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता?

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड June 15, 2026, 09:02 IST

सारांश

पिछले सप्ताह 13 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। अब इस बीच देखना होगा कि क्या कच्चे तेल के दाम गिरने से भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी का ऐलान करती हैं या नहीं?

कच्चा तेल

कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट, क्या भारत में घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? (Photo: Shutterstock)

अमेरिका और ईरान के बीच शांति डील का जैसे ही ऐलान हुआ, कच्चे तेल के भाव गिरने शुरू हो गए। आज शुरुआती मार्केट के घंटों में कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा की गिरावट आई है। यह गिरावट तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान ने एक शांति समझौते पर पहुंच गए हैं। ट्रंप ने कहा कि दोनों देश शांति डील पर पहुंच गए हैं, जिस पर इस सप्ताह के आखिरी तक साइन भी हो जाएगा। पिछले सप्ताह 13 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। अब इस बीच देखना होगा कि क्या कच्चे तेल के दाम गिरने से भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी का ऐलान करती हैं या नहीं?

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कच्चे तेल के दामों का पूरा डेटा

अमेरिका-ईरान बातचीत से मिले पॉजिटिव संकेतों के चलते दोनों पक्ष युद्ध के 16वें सप्ताह में शांति समझौते पर सहमत हुए। Investing.com के डेटा के मुताबिक सोमवार के मार्केट में सुबह 7:05 बजे (IST) ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 4.28% गिरकर $83.59 प्रति बैरल (bbl) हो गईं, जबकि पिछले कमोडिटी मार्केट के बंद होने के समय यह $87.33 प्रति बैरल थीं। डेटा से यह भी पता चला कि ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में पिछले एक सप्ताह में 11% से ज्यादा की गिरावट आई है और पिछले एक महीने में इसमें 23% की कमी आई है। पिछले तीन महीनों के आधार पर तेल की कीमतें 18% कम पर कारोबार कर रही थीं। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक आज अमेरिका स्थित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतें 5% गिरकर $80.64 प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थीं, जबकि पिछले बाजार बंद होने के समय यह $84.88 प्रति बैरल थीं।

कब होंगे अमेरिका-ईरान पीस डील पर साइन?

सोमवार सुबह, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि बातचीत के तीसरे दौर के बाद, अमेरिका और ईरान एक शांति डील पर सहमत हो गए हैं, जिस पर इस सप्ताह के आखिर में साइन होने की उम्मीद है। ट्रंप ने कहा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। सभी को बधाई! नए शांति समझौते के तहत, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को टोल-फ्री आधार पर फिर से खोला जाएगा, और अमेरिकी सेना कच्चे तेल के ग्लोबल व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी नाकेबंदी से अपनी नौसेना को तुरंत हटा लेगी। दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल को बहने दो!’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर शुक्रवार, 19 जून, 2026 को साइन किए जाएंगे।

भारत के लिए क्यों इतना अहम होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से शिपिंग फिर से शुरू होने या सामान्य होने से भारत को बड़ी राहत मिलेगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल (crude oil) आयातकों में से एक है। इससे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होंगी, माल ढुलाई का खर्च घटेगा और महंगाई का दबाव भी कम होगा। ईरान और ओमान के बीच मौजूद यह स्ट्रेट दुनिया भर में होने वाली तेल की खपत का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। यह सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों के लिए मुख्य निर्यात मार्ग है, जो भारत को ऊर्जा की सप्लाई करने वाले प्रमुख देश हैं। फरवरी के आखिर में ईरान से जुड़ी घटनाओं के कारण इस स्ट्रेट से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित हो गई थी। कच्चा तेल पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनाने का कच्चा माल है, जबकि प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली बनाने, खाद बनाने, गाड़ियों को चलाने के लिए CNG बनाने और घरों की रसोई में खाना पकाने के लिए किया जाता है। इस रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम और माल ढुलाई की दरों में भारी बढ़ोतरी हुई थी।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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