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4 min read | अपडेटेड May 11, 2026, 08:43 IST
सारांश
US-Iran टेंशन खत्म होने की बजाय बढ़ती हुई नजर आ रही है। दोनों देशों की वार्ता फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। अब इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध और कितने बिगड़ते हैं और इसका क्या असर होता है, यह आने वाला समय बताएगा।

अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन फिलहाल खत्म होने का नाम नहीं ले रही (Photo: Shutterstock)
US-Iran युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के लेटेस्ट शांति प्रस्ताव को ईरान ने आत्मसमर्पण जैसा बताते हुए खारिज कर दिया है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। दोनों देशों के बीच लेटेस्ट डेवलपमेंट के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष और खतरनाक मोड़ ले सकता है और अमेरिका-ईरान के बीच गतिरोध और ज्यादा गहराता नजर आ रहा है, क्योंकि करीब 10 हफ्ते से चल रहे इस संघर्ष का फिलहाल कोई हल निकलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। पाकिस्तान के जरिए हुई राजनयिक बातचीत प्लान के मुताबिक नहीं हो पाई, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की कि तेहरान ने इस्लामाबाद के जरिए वॉशिंगटन को अपना रुख बता दिया था, और कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसे सिरे से खारिज कर दिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' की प्रतिक्रिया पढ़ी है। मुझे यह पसंद नहीं आई - पूरी तरह अस्वीकार्य!’ इस तरह उन्होंने उस राजनयिक बातचीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया जो कुछ समय के लिए खुली लग रही थी। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने पहले ही परिणाम का संकेत दे दिया था, जिसमें बताया गया था कि ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, इसे आत्मसमर्पण के बराबर बताया है और इसे एकतरफा करार दिया है। इस बीच चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निमंत्रण दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन के दौरे पर आएंगे।’
ईरान की प्रतिक्रिया का अहम बिंदु पूरे क्षेत्र में, खासकर से लेबनान में, संघर्ष को खत्म करना और होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना था। हालांकि, अधिकारियों ने यह क्लियर नहीं किया कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग कब और कैसे फिर से खुलेगा। यह प्रतिक्रिया तब आई जब अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम जैसे अधिक विवादास्पद मुद्दों से निपटने से पहले, युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। तेहरान के लिए, यह बात अस्वीकार्य थी। वॉशिंगटन के लिए, न्यूक्लियर मुद्दे पर पूर्ण अनुपालन से कम कुछ भी उतना ही अस्वीकार्य था।
ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। रविवार को प्रसारित एक टेलीविजन इंटरव्यू में, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के अंदर अपने लक्षित लक्ष्यों में से करीब 70% टारगेट पूरे कर लिए हैं और बाकी के खिलाफ दो हफ्ते के अंदर कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने ईरान की मिलिट्री पोजिशन को एक अहम हार के रूप में पेश किया, और समृद्ध यूरेनियम भंडार के बारे में एक तीखी चेतावनी जारी की, जो वार्ता में केंद्रीय बाधा बन गया। ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा था, ‘हम इसे किसी भी समय, जब चाहें, हासिल कर लेंगे। हम इसकी निगरानी कर रहे हैं। मैंने स्पेस फोर्स नाम की एक चीज बनाई है, और वे निगरानी कर रहे हैं। अगर कोई अंदर आता है, तो वे आपको उसका नाम, पता, उसके बैज का नंबर बता सकते हैं। अगर कोई उस जगह के पास भी आता है, तो हमें इसकी जानकारी होगी, और हम उसे उड़ा देंगे।’
ईरान के यूरेनियम भंडार की जगह अभी भी अनिश्चित है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जून 2025 में अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु संयंत्रों के नीचे दबा हो सकता है। तेहरान ने सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि यह सामान कहां रखा है। अनुमान है कि ईरान के पास 60% शुद्धता तक संवर्धित 400 किलोग्राम से अधिक यूरेनियम है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग 90% शुद्धता तक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियारों में किया जा सकता है। ट्रंप ने ईरान से अपने पूरे भंडार को देश से बाहर ले जाने और अपने संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करने की मांग की है। तेहरान ने दोनों मांगों को खारिज करते हुए कहा है कि संवर्धन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु अधिकार है।
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