return to news
  1. भारत के स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व में बढ़ सकती है UAE की भूमिका, LPG डील को लेकर भी चर्चा तेज

बिजनेस न्यूज़

भारत के स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व में बढ़ सकती है UAE की भूमिका, LPG डील को लेकर भी चर्चा तेज

Upstox

4 min read | अपडेटेड May 14, 2026, 12:35 IST

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केटों को अस्थिर कर दिया है। इसका मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी है। इस महत्वपूर्ण समुद्र मार्ग से दुनिया की कुल पेट्रोलियम सप्लाई का लगभग 20% गुजरता है।

यूएई-इंडिया

भारत-यूएई एलपीजी, स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व पर कर सकते हैं समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 मई को खाड़ी देश की यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates, UAE) तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (Liquefied petroleum gas, LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह संभावना जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री यूरोप के चार देशों के पांच-दिवसीय दौरे पर जाने से पहले खाड़ी देश में लगभग चार घंटे बिताएंगे। यह यात्रा तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से यूएई के अलग होने की घोषणा के कुछ दिनों बाद हो रही है। ऊर्जा सुरक्षा के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श करेंगे और पश्चिम एशिया संघर्ष पर अपने विचार साझा करेंगे।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केटों को अस्थिर कर दिया है। इसका मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी है। इस महत्वपूर्ण समुद्र मार्ग से दुनिया की कुल पेट्रोलियम सप्लाई का लगभग 20% गुजरता है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अल नाहयान के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। यह पिछले 25 सालों में कुल मिलाकर निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत है। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा, ‘हमारे पास यूएई के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं को शामिल करते हुए एक ठोस एजेंडा है।’

नीदरलैंड यात्रा पर किन चीजों पर दिया जाएगा जोर?

अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की यात्रा करेंगे। यह 2017 के बाद नीदरलैंड की दूसरी यात्रा होगी। इस दौरान वह राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी की यात्रा बहुआयामी साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने का अवसर प्रदान करेगी। नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े बिजनेस डेस्टिनेशन्स में से एक है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 27.8 अरब डॉलर का था। प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड के बाद स्वीडन की यात्रा पर जाएंगे। वह प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर 17 से 18 मई तक दो-दिवसीय यात्रा के लिए स्वीडन जा रहे हैं। मोदी ने इससे पहले 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन की यात्रा की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के साथ बातचीत करेंगे। इसमें द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी और आपसी व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशे जाएंगे। बातचीत में दोनों पक्ष हरित ऊर्जा बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, मजबूत सप्लाई चेनों, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन पर कदम और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान देंगे।

मोदी की नॉर्वे और इटली यात्रा से हैं क्या उम्मीदें?

अपनी यात्रा के चौथे चरण में, मोदी 18 से 19 मई तक नॉर्वे की यात्रा करेंगे। वहां वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी। यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की भी नॉर्वे की पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्जा से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने और व्यापार एवं निवेश पर ध्यान देने का अवसर है।

तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 19 मई को ओस्लो में होगा, जिसमें मोदी और नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के उनके समकक्ष शामिल होंगे। यह शिखर सम्मेलन अप्रैल 2018 में स्टॉकहोम और मई 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित पिछले दो शिखर सम्मेलनों पर आधारित होगा और इससे नॉर्डिक देशों के साथ भारत के संबंधों को एक अधिक रणनीतिक आयाम मिलने की उम्मीद है। अपनी यात्रा के अंतिम चरण में, प्रधानमंत्री मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर 19 से 20 मई तक इटली की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। मोदी ने आखिरी बार जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए हो रही है। मोदी की इटली यात्रा का मुख्य उद्देश्य निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवोन्मेष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करना है।

PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख