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  1. क्या पंजाब के किसानों को खरीफ के सीजन में झेलनी पड़ रही है यूरिया की किल्लत? सरकार ने दी सफाई

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क्या पंजाब के किसानों को खरीफ के सीजन में झेलनी पड़ रही है यूरिया की किल्लत? सरकार ने दी सफाई

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड June 11, 2026, 12:47 IST

सारांश

मौजूदा समय में पंजाब में धान की रोपाई पूरी तरह गति पकड़ने वाली है, और राज्य के पास इस मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। सभी उर्वरक उत्पादक और आयातक कंपनियों को राज्य सरकार की वास्तविक मांग के हिसाब से उपलब्धता का ठीक से मैनेज करने की सलाह दी गई है।

खरीफ फसल

पंजाब में चालू खरीफ सीजन के लिए यूरिया की कोई किल्लत नहीं (Photo: Shutterstock)

भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत उर्वरक विभाग (Department of Fertilizers) ने साफ कहा है कि पंजाब में चालू खरीफ 2026 सीजन लिए यूरिया की उपलब्धता पूरी तरह बनी हुई है। । सरकार ने देश के किसानों को आश्वस्त किया है कि धान की रोपाई की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत सप्लाई और पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है । खरीफ 2026 सीजन के लिए पंजाब की कुल आवश्यकता 14.50 लाख मीट्रिक टन (LMT) अनुमानित है । चालू सीजन में 9 जून 2026 तक की आनुपातिक (pro rata) आवश्यकता 9.0 LMT की थी, जिसके मुकाबले उर्वरक विभाग ने राज्य में 10.71 LMT यूरिया की उपलब्धता पहले ही सुनिश्चित कर दी है । इस पीरियड के दौरान राज्य में यूरिया की वास्तविक बिक्री 6.25 LMT रही है, जिसके बाद भी मौजूदा समय में 4.46 LMT का बड़ा क्लोजिंग स्टॉक राज्य के पास उपलब्ध है। इसके अलावा, 39,167 मीट्रिक टन यूरिया इस समय रास्ते में (In-transit) है, जिससे राज्य में कुल उपलब्ध स्टॉक की स्थिति 4.85 LMT पहुंच जाती है। अमृतसर जिले में चालू खरीफ सीजन में अब तक कुल 64,720 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से आज की तारीख में 32,956 मीट्रिक टन यूरिया का सुरक्षित स्टॉक जिले में मौजूद है।

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ऐतिहासिक रबी सीजन का रिकॉर्ड

पिछले रबी 2025-26 सीजन में भी पंजाब की 15.00 LMT की अनुमानित डिमांड के उलट केंद्र सरकार ने 19.43 LMT की रिकॉर्ड उपलब्धता सुनिश्चित की थी, जिसमें कुल बिक्री 15.45 LMT दर्ज की गई थी। खरीफ सीजन के दौरान मुश्किलों का सामना करने से बचने के लिए सरकार ने एडवांस स्टोरेज की स्ट्रैटजी अपनाई। इस साल जनवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच पंजाब की 3.50 LMT की संयुक्त आवश्यकता के मुकाबले 6.08 LMT यूरिया की सप्लाई पहले ही कर दी गई थी । इस तरह सीजन की शुरुआत से पहले ही 2.58 LMT एक्स्ट्रा यूरिया का अग्रिम भंडारण (Pre-positioning) सुनिश्चित किया गया था। पंजाब में यूरिया की खपत की स्पीड में इस बार काफी ज्यादा तेजी दर्ज की गई है। 1 मार्च 2026 से 9 जून 2026 के बीच राज्य में 7.86 LMT यूरिया की बिक्री हुई है, जो पिछले साल के इसी पीरियड की बिक्री (7.10 LMT) से 76 हजार मीट्रिक टन अधिक है। इस भारी अग्रिम उठाव और पिछले रबी में अनुमान से 45,000 मीट्रिक टन अधिक हुई बिक्री के कारण राज्य सरकार के तात्कालिक बफर पर दबाव पड़ा था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लगातार इसकी प्रतिपूर्ति की जा रही है।

ग्लोबल जियो पॉलिटिकल चुनौतियां और भारत की उर्वरक रणनीति मौजूदा समय में ग्लोबल लेवल पर उर्वरक सप्लाई चेन गंभीर भू-राजनीतिक संकटों से प्रभावित रही है। खासतौर से अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष के कारण इंटरनेशनल मार्केट में यूरिया की उपलब्धता और समुद्री परिवहन पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इन ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार ने अपने घरेलू कृषि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। इसके लिए उर्वरक विभाग ने प्राकृतिक गैस की तत्काल खरीद (Spot Procurement) हेतु ईपीएमसी (EPMC) तंत्र को सक्रिय किया, जिससे घरेलू यूरिया उत्पादन को उल्लेखनीय गति मिली। इसके साथ ही, पूरे कैलेंडर ईयर के दौरान रणनीतिक रूप से आयात को सुचारु रखा गया, जिससे देश और खासतौर से पंजाब को निर्बाध सप्लाई मिलती रही।

राज्यों का दायित्व और प्रवर्तन (Enforcement) के कड़े निर्देश

भारत सरकार ने क्लियर किया है कि जहां थोक में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना केंद्र की जिम्मेदारी है, वहीं राज्य के अंदर तमाम जिलों और एक जिले से दूसरे जिले में इसका समान और सही से डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना पूरी तरह राज्य सरकार का दायित्व है ताकि किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी न होने पाए। सब्सिडी वाले यूरिया का दुरुपयोग रोकने और यह केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे, इसके लिए सचिव (कृषि एवं किसान कल्याण) तथा सचिव (उर्वरक विभाग) की सह-अध्यक्षता में राज्य के उच्चाधिकारियों के साथ निरंतर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं।

राज्य सरकारों को क्या निर्देश दिए गए हैं

  • रियायती यूरिया को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में डायवर्ट करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

-जमाखोरी और कालाबाजारी में करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत और कड़े कदम उठाए जाएं।

मौजूदा समय में पंजाब में धान की रोपाई पूरी तरह गति पकड़ने वाली है, और राज्य के पास इस मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। सभी उर्वरक उत्पादक और आयातक कंपनियों को राज्य सरकार की वास्तविक मांग के हिसाब से उपलब्धता का ठीक से मैनेज करने की सलाह दी गई है। भारत सरकार राज्य सरकार के साथ निरंतर संपर्क में है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे स्थिति की निगरानी कर रही है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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