return to news
  1. पेट्रोल पंपों से इंडस्ट्रियल पेट्रोल-डीजल खरीदने पर सरकार ने लगा दी रोक, क्यों लेना पड़ा ऐसा फैसला?

बिजनेस न्यूज़

पेट्रोल पंपों से इंडस्ट्रियल पेट्रोल-डीजल खरीदने पर सरकार ने लगा दी रोक, क्यों लेना पड़ा ऐसा फैसला?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड June 12, 2026, 09:01 IST

सारांश

सरकार ने कहा कि उसने देश के कुछ हिस्सों में रिटेल आउटलेट्स के जरिए पेट्रोल और डीजल की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी देखी है, क्योंकि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कस्टमर्स रिटेल और बल्क बिक्री की कीमतों में अंतर के कारण फ्यूल स्टेशनों का रुख कर रहे थे।

पेट्रोल-डीजल

सरकार ने पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में इंडस्ट्रियल पेट्रोल और डीजल की खरीद पर रोक लगाई (Photo: Shutterstock)

पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है। सरकारी आदेश के मुताबिक सरकार ने गुरुवार को इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल कस्टमर्स को रिटेल फ्यूल स्टेशनों से पेट्रोल और डीजल खरीदने से रोक दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) और दूसरे अधिकृत फ्यूल मार्केटर्स को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि इंस्टीट्यूशनल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कस्टमर्स रिटेल आउटलेट्स से पेट्रोल या डीजल न खरीदें, बल्कि अपनी फ्यूल की जरूरतें अपने खुद के कंज्यूमर पंपों से पूरी करें।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

मंत्रालय ने 'एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट' (आवश्यक वस्तु अधिनियम) के तहत 'मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के जरिए सप्लाई का अस्थायी नियमन) आदेश, 2026' जारी किया। सरकार ने कहा कि उसने देश के कुछ हिस्सों में रिटेल आउटलेट्स के जरिए पेट्रोल और डीजल की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी देखी है, क्योंकि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कस्टमर्स रिटेल और बल्क बिक्री की कीमतों में अंतर के कारण फ्यूल स्टेशनों का रुख कर रहे थे। दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि बल्क बिक्री की कीमत 134.50 रुपये है। सरकार ने कहा कि इस तरह की खरीद से रिटेल कस्टमर्स के लिए तय सप्लाई दूसरी तरफ चली गई है और इससे ‘स्थानीय स्तर पर कमी हो सकती है और आम आदमी के लिए जरूरी सेवाओं में रुकावट आ सकती है।’

क्यों लिया सरकार ने यह फैसला?

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि रिटेल आउटलेट से बड़ी मात्रा में खरीद करने से असली रिटेल कस्टमर्स के लिए फ्यूल की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ सकता है और इससे जमाखोरी, डायवर्जन और दूसरी गलत गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इस आदेश के तहत, रिटेल आउटलेट डीलर सिर्फ गाड़ियों के फ्यूल टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से मंजूरी प्राप्त कंटेनरों में ही हाई-स्पीड डीजल दे सकेंगे। वे किसी ग्राहक या गाड़ी को एक दिन में 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं बेच सकेंगे और इस तरह खरीदा गया फ्यूल दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिटेल आउटलेट डीलरों को इन पाबंदियों का पालन सुनिश्चित करने और इनसे बचने की किसी भी कोशिश को रोकने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने कहा कि नए फ्रेमवर्क के तहत लगाई गई कोई भी पाबंदी शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रह सकती है (जब तक कि उसे पहले ही हटा न दिया जाए) और जरूरत पड़ने पर नए आदेश के जरिए इसे बढ़ाया जा सकता है।

नोटिफिकेसन में क्या कहा गया?

नोटिफिकेशन में कहा गया, ‘सरकार एक खास आदेश के जरिए किसी भी उपभोक्ता, उपभोक्ताओं के वर्ग, इलाके, लेन-देन या लेन-देन की कैटेगरी को इस आदेश के सभी या किसी भी प्रावधान से छूट दे सकती है।’ इसमें राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को भी आदेश को ‘लागू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने’ का निर्देश दिया गया, जिसमें ‘जमाखोरी, कालाबाजारी, बिना मंजूरी के खरीद, डायवर्जन और दूसरी गलत गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई’ शामिल है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर 'एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट' (आवश्यक वस्तु अधिनियम) और दूसरे लागू कानूनों के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

अगला लेख