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क्या टाटा संस में होगा दो बड़ी कंपनियों का विलय, जानिए कैसे आरबीआई के नियमों के दायरे से बचेगी कंपनी?

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड September 29, 2026, 10:53 IST

सारांश

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचाने के लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया गया है। नोएल टाटा के नेतृत्व वाले टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस में दो कंपनियों, टीईएसएस और टीसीई के विलय का प्रस्ताव दिया है। इससे कंपनी आरबीआई के नियमों से बाहर हो जाएगी।

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टाटा संस को अनलिस्टेड कंपनी बनाए रखने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने दो कंपनियों के विलय का प्रस्ताव रखा है।

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। कंपनी को अनलिस्टेड बनाए रखने के इरादे से नोएल टाटा के नेतृत्व वाले टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को एक अहम प्रस्ताव रखा। बता दें कि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66% हिस्सेदारी है। इस प्रस्ताव के तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का टाटा संस में विलय किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य टाटा संस के रेगुलेटरी दर्जे को बदलना है ताकि यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अपर लेयर नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के ढांचे से बाहर आ सके। टाटा संस का मानना है कि इससे अनिवार्य पब्लिक लिस्टिंग यानी आईपीओ लाने की जरूरत खत्म हो जाएगी।

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अपने पुराने बिजनेस मॉडल पर लौट रही है कंपनी

यह प्रस्तावित पुनर्गठन कोई नया प्रयोग नहीं है बल्कि कंपनी अपने ऐतिहासिक मॉडल की तरफ वापस लौट रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह प्लान टाटा संस को उस मॉडल पर वापस ले जाता है जिसका पालन उसने अपने 100 साल के इतिहास में लगभग 80 सालों तक किया था। उस समय कंपनी अपने खुद के ऑपरेटिंग बिजनेस चलाती थी और इसकी कमाई से नए वेंचर्स को फंड दिया जाता था। दशकों तक टाटा संस केवल एक होल्डिंग कंपनी नहीं थी बल्कि यह एक सक्रिय ऑपरेशनल इकाई थी। उदाहरण के लिए साल 2004 में अलग कंपनी बनने से पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) कई सालों तक टाटा संस के सीधे बिजनेस डिवीजन के रूप में काम करती थी। अब टीईएसएस और टीसीई को सीधे अपने अंडर में लाकर टाटा संस इसी पुरानी व्यवस्था को वापस लागू करेगी।

विलय से पूरी तरह बदल जाएगा बैलेंस शीट का गणित

इन दोनों कंपनियों को टाटा संस में शामिल करना एक सोची समझी आर्थिक रणनीति है जिसे कंपनी की बैलेंस शीट को पूरी तरह से बदलने के लिए डिजाइन किया गया है। आरबीआई के नियमों के अनुसार सीआईसी कहलाने के लिए किसी कंपनी का अपनी ग्रुप कंपनियों में कम से कम 90% निवेश होना चाहिए और उसकी मुख्य आय फाइनेंशियल एसेट्स से आनी चाहिए। टीईएसएस और टीसीई के विलय से कंपनी को भारी ऑपरेशन से रेवेन्यू मिलेगा जो इस नियम को बाईपास कर देगा।

विलय के बाद 31 मार्च 2026 तक नई कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 1,05,043 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह कमाई इसके फाइनेंशियल एसेट्स से आने वाले अनुमानित 40,072 करोड़ रुपये से बहुत ज्यादा होगी। कुल आय में ऑपरेशन से रेवेन्यू की हिस्सेदारी 64.3% हो जाएगी जिससे टाटा संस एनबीएफसी के दायरे से बाहर आ जाएगी। इसके अलावा विलय के बाद टाटा संस का कुल नेट एसेट बेस 2,00,158 करोड़ रुपये हो जाएगा जबकि ग्रुप कंपनियों में इसका निवेश 1,77,120 करोड़ रुपये रहेगा। यह आंकड़ा 90% की सीमा से नीचे आ जाएगा जिससे यह सीआईसी की परिभाषा से भी बाहर हो जाएगी।

क्या काम करती हैं टीसीई और टीईएसएस

यह विलय भले ही नियमों से बचने के लिए किया जा रहा है लेकिन ये दोनों कंपनियां अपने आप में एक मजबूत बिजनेस मॉडल रखती हैं। टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की स्थापना 1962 में हुई थी और यह भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी है। यह पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग जैसे बड़े सेक्टर्स में काम करती है। वहीं टीईएसएस की शुरुआत 2018 में हुई थी और यह हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग में टाटा ग्रुप का एक बड़ा कदम है।

टाटा ग्रुप द्वारा खरीदे जाने से पहले इसे विस्ट्रॉन इन्फोकॉम मैन्युफैक्चरिंग के नाम से जाना जाता था। यह कंपनी कर्नाटक में मोबाइल फोन, टेलीविजन और साउंड उपकरणों जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजों की बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग करती है। इस विलय को पूरा करने के लिए पहले टाटा संस के बोर्ड की मंजूरी चाहिए होगी और फिर आरबीआई से एनओसी लेनी होगी। इसके सफल होने पर यह पुरानी दिग्गज कंपनी पब्लिक मार्केट में जाने की मजबूरी से बच जाएगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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