बिजनेस न्यूज़
.png)
3 min read | अपडेटेड July 07, 2026, 09:23 IST
सारांश
कमजोर डिमांड और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बीच सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अपने मुख्य कच्चे तेल की कीमतों में भारी कटौती की है। यह पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय में सबसे बड़ी कटौती है। सरकारी कंपनी सऊदी अरामको ने अरब लाइट क्रूड की कीमत 11 डॉलर प्रति बैरल घटा दी है।

सऊदी अरब ने लिया बड़ा फैसला | Photo: Shutterstock
अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातक सऊदी अरब ने एशियाई देशों के लिए अपने सबसे मुख्य कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक कटौती करने का फैसला किया है। यह कटौती पिछले दो दशकों यानी बीस साल से भी ज्यादा समय में सबसे बड़ी मानी जा रही है। बाजार में कच्चे तेल की कमजोर पड़ती मांग और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कम होने के बाद सऊदी अरब ने यह बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले का सीधा असर आने वाले समय में दुनिया भर के तेल बाजार पर देखने को मिल सकता है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने अगस्त महीने की डिलीवरी के लिए अपने सबसे मशहूर 'अरब लाइट क्रूड' की सरकारी बिक्री कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की भारी कटौती की है। इस कटौती के बाद अब यह तेल क्षेत्रीय बेंचमार्क से 1.50 डॉलर के डिस्काउंट पर मिलेगा। हाल ही में इजरायल और ईरान के बीच हुए सीधे टकराव के बाद कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। लेकिन जैसे ही दोनों देशों के बीच जंग की स्थिति शांत हुई, बाजार से युद्ध का जोखिम कम हो गया और कीमतें तेजी से नीचे आ गईं। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही दोबारा सामान्य हो गई है, जिससे तेल की सप्लाई रुकने की चिंताएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। युद्ध की आशंकाएं टलने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर अब करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है। तनाव कम होने के बाद एशिया की रिफाइनरियों को अब मिडिल ईस्ट से ज्यादा मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई मिलने की उम्मीद है।
टकराव के दिनों में जब फारस की खाड़ी के रास्ते तेल भेजने में दिक्कत आ रही थी, तब सऊदी अरामको ने यानबू में अपने लाल सागर टर्मिनल से तेल की शिपमेंट का रास्ता बदल दिया था। अब जब होर्मुज के रास्ते जहाजों का आना-जाना पूरी तरह सामान्य हो गया है, तो सऊदी अरब की खाड़ी स्थित मुख्य फैक्ट्रियों से निर्यात फिर से पटरी पर लौट आया है। इसके कारण एशियाई क्षेत्र में कच्चे तेल की उपलब्धता काफी बढ़ गई है। सप्लाई बढ़ने और मांग घटने के इस दोहरे कॉम्बिनेशन ने सऊदी अरब को कीमतें घटाने के लिए मजबूर किया है।
कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है। ओपेक प्लस गठबंधन के देशों ने अगस्त महीने के लिए अपने प्रोडक्शन कोटे को बढ़ाने पर सहमति जताई है। खाड़ी के तेल उत्पादक देश अब होर्मुज के रास्ते बिना किसी रुकावट के खुलकर निर्यात करने की स्थिति में हैं। ऐसे में सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश आने वाले दिनों में अपना उत्पादन बढ़ाने जा रहे हैं। इससे ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई और ज्यादा बढ़ जाएगी, जिससे एशियाई बाजारों में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए उत्पादक देशों के बीच कंपटीशन काफी तेज होने की उम्मीद है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
How To Use Open Interest For Intraday Trading: Complete Guide
What Is Stop Loss In Trading? Meaning, Types, & How To Use It
What Is ICRA? Why Its Credit Ratings Matter To Investors
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs