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सरकार का दावा- E20 पेट्रोल के चलते खाद्य सुरक्षा से नहीं कोई समझौता, इथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को बड़ा फायदा

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड July 31, 2026, 16:00 IST

सारांश

पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि भारत अभी भी अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 88% आयात करता है। ऐसे में इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल प्रोग्राम केवल वैकल्पिक ईंधन की योजना नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति है।

ई20

भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखता है (Photo: Shutterstock)

भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol-E20) को लेकर हाल के दिनों में कई तरह के सवाल उठाए गए हैं। कुछ दावों में कहा गया कि सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) का चावल कम कीमत पर डिस्टिलरी को बेचकर हजारों करोड़ रुपये का नुकसान किया है। वहीं, यह भी आरोप लगाया गया कि इथेनॉल पेट्रोल से महंगा है और E20 प्रोग्राम केवल सरकारी सब्सिडी के सहारे चल रहा है। इन सभी दावों पर अब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने क्लैरिफिकेशन जारी करते हुए कहा है कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम देश की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की इनकम और खाद्य सुरक्षा को साथ लेकर चलने वाली महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।

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खाद्य सुरक्षा से नहीं किया गया कोई समझौता

सरकार ने क्लियर किया है कि इथेनॉल प्रोडक्शन के लिए ऐसा कोई अनाज इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे गरीबों के राशन या देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो। सबसे पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और बफर स्टॉक की जरूरत पूरी की जाती है। इन सभी आवश्यकताओं के बाद बचा हुआ अतिरिक्त अनाज ही इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूर किया जाता है।

सरकार के मुताबिक, इथेनॉल प्रोग्राम में मुख्य रूप से खराब हो चुका अनाज, टूटा हुआ चावल और ऐसा खाद्यान्न उपयोग किया जाता है, जो इंसानों के खाने के योग्य नहीं होता। इससे एक ओर गोदामों में अनाज खराब होने से बचता है, वहीं दूसरी ओर किसानों को भी बेहतर बाजार मिलता है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री जी-वन योजना (PM JI-VAN Yojana) के तहत कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी (2G) का इथेनॉल तैयार करने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में खाद्यान्न पर निर्भरता और कम होगी।

FCI चावल को नहीं मिला कोई खास लाभ

मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि FCI का चावल बेहद कम कीमत पर इथेनॉल कंपनियों को दिया गया। सरकार के मुताबिक, FCI चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कई स्वीकृत कच्चे माल में से केवल एक है। इसकी कीमत भी सरकार द्वारा तय समान मूल्य निर्धारण प्रणाली के तहत तय होती है।

मौजूदा प्राइस लिस्ट के मुताबिक, मक्का से बने इथेनॉल का मूल्य 71.86 रुपये प्रति लीटर, गन्ने के रस या सिरप से 65.61 रुपये प्रति लीटर, खराब खाद्यान्न से 64 रुपये प्रति लीटर, बी-भारी गुड़ से 60.73 रुपये प्रति लीटर, FCI चावल से 60.32 रुपये प्रति लीटर और सी-भारी सीरा से बने इथेनॉल का मूल्य 57.97 रुपये प्रति लीटर निर्धारित है। इससे क्लियर है कि FCI चावल को कोई खास आर्थिक लाभ नहीं दिया गया।

इथेनॉल से पेट्रोल क्यों हुआ सस्ता?

सरकार ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का उद्देश्य हर दिन पेट्रोल को सबसे सस्ता बनाना नहीं है, बल्कि इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव से देश और उपभोक्ताओं को बचाना है। सरकार के मुताबिक जब ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब अगर इथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। लेकिन E20 प्रोग्राम के कारण उपभोक्ताओं को पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिला। यानी उस समय प्रति लीटर करीब 30 रुपये की बचत हुई।

देश को मिले बड़े आर्थिक लाभ

सरकार का दावा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से देश को कई महत्वपूर्ण फायदे हुए हैं। इससे अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा 316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात की जरूरत कम हुई है। पर्यावरण के लिहाज से भी यह प्रोग्राम लाभदायक साबित हुआ है, क्योंकि इससे 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आई है। इतना ही नहीं, किसानों और डिस्टिलरी उद्योग को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी आर्थिक मजबूती मिली है।

पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि भारत अभी भी अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 88% आयात करता है। ऐसे में इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल प्रोग्राम केवल वैकल्पिक ईंधन की योजना नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति है। सरकार का मानना है कि इस पहल से विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी, किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक तेल संकट के दौरान आम उपभोक्ताओं को राहत मिलती रहेगी।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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