return to news
  1. RBI ने सख्त किए फॉरेक्स नियम, डॉलर की मांग घटने और रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद

बिजनेस न्यूज़

RBI ने सख्त किए फॉरेक्स नियम, डॉलर की मांग घटने और रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 12, 2026, 07:44 IST

सारांश

आरबीआई ने 10 अक्टूबर को जारी परिपत्रों के जरिये अधिकृत डीलरों को रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों को रद्द करने के बाद दोबारा बुक करने की अनुमति देने से रोक दिया।

रुपये और डॉलर

महंगी होगी डॉलर की हेजिंग, रुपये पर दबाव घटने का अनुमान (Photo: Shutterstock)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से रुपये में उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों से निकट अवधि में रुपये की गिरावट का दबाव कम हो सकता है और बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी निकालने में मदद मिल सकती है। विभिन्न शोध रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इन कदमों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए नामित बैंकों के जरिये डॉलर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव से बचाव के कुछ सौदों की लागत बढ़ाना शामिल है। इनसे हाजिर बाजार में डॉलर की मांग और रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

कोटक महिंद्रा बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'रुपये पर इसका तत्काल असर काफी सकारात्मक रहने की उम्मीद है। डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर के 95 से नीचे आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और अन्य आयातकों की ओर से बचाव के सौदों पर अंकुश लगने से वायदा प्रीमियम में नरमी आ सकती है।' हालांकि, बैंक ने आगाह किया कि ग्लोबल परिस्थितियां अब भी अनिश्चित बनी हुई हैं।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि इन कदमों से निकट अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और वायदा प्रीमियम में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, उसने कहा कि मध्यम अवधि में रुपये की दिशा ग्लोबल कारकों और पेमेंट बैलेंस की स्थिति पर निर्भर करेगी।

10 अक्टूबर से कौन से नियम बदले?

आरबीआई ने 10 अक्टूबर को जारी परिपत्रों के जरिये अधिकृत डीलरों को रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों को रद्द करने के बाद दोबारा बुक करने की अनुमति देने से रोक दिया। हालांकि, मौजूदा नियमों के अधीन परिपक्वता पर ऐसे सौदों को आगे बढ़ाने की अनुमति जारी रखी गई है। केंद्रीय बैंक ने अंतर्निहित जोखिम के बिना विदेशी मुद्रा वायदा सौदे करने की सीमा भी 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी है। यह सीमा अधिकृत डीलरों और मान्यता प्राप्त शेयर बाजारों, दोनों पर लागू होगी। आरबीआई ने विदेशी मुद्रा जोखिम आरक्षित निधि (एफईआरआर) भी शुरू की है। इसके तहत अधिकृत डीलरों को दो लाख डॉलर से अधिक के प्रत्येक रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा वायदा सौदे की सांकेतिक राशि के रुपये में मूल्य के 20% के बराबर रकम नकद में आरबीआई के पास रखनी होगी। यह प्रावधान उन सौदों पर लागू होगा, जो चालू खाते से जुड़े जोखिम से बचाव के लिए रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीदने के उद्देश्य से किए जाते हैं।

क्यों उठाए गए ये कदम?

आरबीआई ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य बाजार में अनुशासन मजबूत करना और जोखिम का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है, ताकि विदेशी मुद्रा बाजार व्यवस्थित और पारदर्शी बना रहे।

पीटीआई इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख