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4 min read | अपडेटेड October 09, 2026, 14:03 IST
सारांश
प्रस्ताव में Schedule H, Schedule H1 और Schedule X में शामिल दवाओं के विज्ञापन पर सख्ती करने की बात कही गई है। इन श्रेणियों में ऐसी दवाएं आती हैं, जिनकी बिक्री और इस्तेमाल पर विशेष नियम लागू होते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह और प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही लेना चाहिए।

सरकार का मकसद है कि बिना जरूरी अनुमति के ऐसी दवाओं का प्रचार न हो।
केंद्र सरकार प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं के विज्ञापन को लेकर नियम सख्त करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत दवा बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ मेडिकल स्टोर चलाने वालों, थोक दवा विक्रेताओं और दवाओं का वितरण करने वाली कंपनियों पर भी विज्ञापन से जुड़े प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। सरकार का मकसद है कि बिना जरूरी अनुमति के ऐसी दवाओं का प्रचार न हो, जिन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। मंत्रालय ने इस प्रस्ताव से जुड़ी अधिसूचना 28 सितंबर 2026 को जारी की थी। अब सरकार ने लोगों और दवा कारोबार से जुड़े लोगों से इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
प्रस्ताव में Schedule H, Schedule H1 और Schedule X में शामिल दवाओं के विज्ञापन पर सख्ती करने की बात कही गई है। इन श्रेणियों में ऐसी दवाएं आती हैं, जिनकी बिक्री और इस्तेमाल पर विशेष नियम लागू होते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह और प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही लेना चाहिए।
इनमें कुछ एंटीबायोटिक्स, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ दवाएं और अन्य प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं शामिल हैं। इनका गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर सेहत को नुकसान हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल न करें।
फिलहाल दवा बनाने वाली कंपनियां Schedule H, Schedule H1 और Schedule X की दवाओं का विज्ञापन केंद्र सरकार की पहले से अनुमति लिए बिना नहीं कर सकती हैं। हालांकि, मेडिकल स्टोर और थोक दवा विक्रेताओं पर विज्ञापन को लेकर यही प्रतिबंध स्पष्ट रूप से लागू नहीं थे।
सरकार अब इसी कमी को दूर करना चाहती है। इसके लिए Drugs Rules, 1945 के Rule 65 में एक नया नियम जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत दवाओं को बेचने, अपने पास रखने, बिक्री के लिए प्रदर्शित करने या एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का लाइसेंस रखने वालों को भी विज्ञापन संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
प्रस्तावित नियम के मुताबिक, Schedule H, Schedule H1 और Schedule X की दवाओं का विज्ञापन करने के लिए केंद्र सरकार की पहले से मंजूरी लेनी होगी। यह नियम केवल दवा बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मेडिकल स्टोर, थोक विक्रेताओं और दवाओं के वितरकों पर भी लागू हो सकता है। इसका मतलब है कि अगर कोई दवा विक्रेता इन श्रेणियों में आने वाली दवाओं का विज्ञापन करना चाहता है, तो उसे सरकार से पहले अनुमति लेनी होगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम से दवाओं के गलत प्रचार पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। कई बार लोग विज्ञापन देखकर या दूसरों की सलाह पर दवाएं लेने लगते हैं। लेकिन कुछ दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। खासकर एंटीबायोटिक्स और कुछ अन्य दवाओं का गलत इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इस प्रस्ताव पर Drugs Technical Advisory Board की 16 फरवरी 2026 को हुई बैठक में भी चर्चा की गई थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां देने के लिए 30 दिनों का समय दिया है। यह समय गजट अधिसूचना की प्रतियां आम लोगों के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से गिना जाएगा। सरकार को इस दौरान मिलने वाले सुझावों पर विचार करना है। फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है। सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही तय होगा कि नए नियम किस रूप में लागू होंगे।
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