return to news
  1. FY26 में सरकारी बैंकों का शानदार प्रदर्शन: ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा, NPA में भी जबरदस्त सुधार

बिजनेस न्यूज़

FY26 में सरकारी बैंकों का शानदार प्रदर्शन: ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा, NPA में भी जबरदस्त सुधार

Upstox

2 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 19:03 IST

सारांश

एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। 31 मार्च 2026 तक ग्रॉस NPA घटकर 1.93% और नेट NPA घटकर 0.39% रह गया। सभी सरकारी बैंकों ने 90% से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज रेशियो बनाए रखा है, जो बेहतर जोखिम प्रबंधन और मजबूत बैलेंस शीट को दिखाता है।

SBI

वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक सरकारी बैंकों का कुल कारोबार बढ़कर ₹283.3 लाख करोड़ हो गया।

Public Sector Banks: सरकारी बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार चौथे साल मुनाफा दर्ज किया है। इस दौरान PSBs का कुल नेट प्रॉफिट 11.1% बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ हो गया, जो अब तक का सबसे अधिक है। इसके साथ ही बैंकों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹3.21 लाख करोड़ रहा। यह प्रदर्शन बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और आय में वृद्धि का परिणाम है।
Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

कैसा है सरकारी बैंकों का कारोबार

वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक सरकारी बैंकों का कुल कारोबार बढ़कर ₹283.3 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले 12.8% ज्यादा है। इसमें डिपॉजिट 10.6% बढ़कर ₹156.3 लाख करोड़ हो गए। वहीं, बैंकों के कुल लोन 15.7% की दर से बढ़कर ₹127 लाख करोड़ तक पहुंच गए, जो अर्थव्यवस्था में मजबूत क्रेडिट डिमांड को दिखाता है। रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME सेक्टर में लोन ग्रोथ भी अच्छी रही। रिटेल लोन 18.1%, कृषि लोन 15.5% और MSME लोन 18.2% की दर से बढ़े हैं।

एसेट क्वालिटी में भी सुधार

एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। 31 मार्च 2026 तक ग्रॉस NPA घटकर 1.93% और नेट NPA घटकर 0.39% रह गया। सभी सरकारी बैंकों ने 90% से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज रेशियो बनाए रखा है, जो बेहतर जोखिम प्रबंधन और मजबूत बैलेंस शीट को दिखाता है। इसके अलावा, नए खराब लोन (Slippages) घटकर 0.7% रह गए हैं, जबकि कुल रिकवरी ₹86,971 करोड़ रही, जिसमें राइट-ऑफ किए गए खातों से वसूली भी शामिल है।

सरकारी बैंकों की पूंजी स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। 31 मार्च 2026 तक उनका कुल CRAR (कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट रेशियो) 16.6% रहा, जो नियामकीय आवश्यकता 11.5% से काफी ज्यादा है। यह मजबूती आंतरिक कमाई, रिटेन्ड अर्निंग्स और वित्त वर्ष के दौरान ₹50,551 करोड़ की पूंजी जुटाने से आई है, जिससे आगे भी लोन देने की क्षमता बनी रहेगी।

ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी सुधार हुआ है। बैंकों का कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो घटकर 49.67% हो गया, जो बेहतर लागत नियंत्रण, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का नतीजा है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख