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  1. क्या RBI के उपायों से रुपये की गिरावट पर लगेगा ब्रेक? जानिए गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट क्या कहती है

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क्या RBI के उपायों से रुपये की गिरावट पर लगेगा ब्रेक? जानिए गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट क्या कहती है

Upstox

3 min read | अपडेटेड June 08, 2026, 13:23 IST

सारांश

पिछले महीने रुपया डॉलर के मुकाबले 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। आज की बात करें तो रुपया 17 पैसे गिरकर 95.35 पर आ गया। इसकी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की भारी निकासी है।

Rupee

भारतीय रुपये में हाल के महीनों में आई कमजोरी थमती हुई दिखाई दे सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये (Rupee) में लगातार आ रही गिरावट को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश पर टैक्स छूट का ऐलान किया गया है। इसके अलावा और भी उपाय किए गए हैं। Goldman Sachs की रिपोर्ट के मुताबिक इन उपायों से भारतीय रुपये में हाल के महीनों में आई कमजोरी थमती हुई दिखाई दे सकती है।

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Goldman Sachs की नई रिपोर्ट

निवेश बैंक Goldman Sachs का मानना है कि RBI और केंद्र सरकार द्वारा विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उठाए गए हालिया कदम रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम कर सकते हैं। बैंक के अनुसार डॉलर के मुकाबले रुपये में अब ज्यादा गिरावट की संभावना सीमित हो सकती है।

सरकार और RBI ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई घोषणाएं की हैं। इनमें सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश पर टैक्स छूट, कुछ और डेट कैटेगरी को विदेशी निवेशकों के लिए पूरी तरह खोलना और विदेशी मुद्रा में बॉन्ड व डिपॉजिट जुटाने वाले बैंकों को राहत देना शामिल है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इन कदमों से भारत में करीब 50 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आ सकता है।

Goldman Sachs ने अपना नजरिया थोड़ा बदला है। बैंक को उम्मीद है कि अगले तीन महीनों में डॉलर-रुपया विनिमय दर करीब 96 के आसपास रह सकती है। पहले उसका अनुमान 97 था। बैंक का मानना है कि रुपया स्थिर हो सकता है, लेकिन इसमें बड़ी मजबूती आने की संभावना भी फिलहाल नहीं दिख रही है।

रुपया अपने ऑल-टाइम लो के करीब

पिछले महीने रुपया डॉलर के मुकाबले 96.9650 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। आज की बात करें तो रुपया 17 पैसे गिरकर 95.35 पर आ गया। इसकी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की भारी निकासी है। इसके बाद कुछ एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई थी कि रुपया 100 प्रति डॉलर तक भी कमजोर हो सकता है।

क्या है एक्सपर्ट्स की राय

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर विदेशी निवेश दोबारा बढ़ता है, तो उसका इस्तेमाल भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और बाजार में अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए करेगा। यानी निवेश आने पर भी RBI रुपये को बहुत तेजी से मजबूत होने देने की बजाय अपने रिजर्व बढ़ाने पर ध्यान दे सकता है।

Goldman Sachs के मुताबिक, हाल के समय में रुपये पर मिलने वाला "कैरी रिटर्न" बढ़ा है और यह इंडोनेशियाई रुपिया व फिलीपींस पेसो जैसी कई एशियाई मुद्राओं से बेहतर दिखाई दे रहा है। बैंक का मानना है कि रुपया फिलहाल डॉलर के मुकाबले कुछ हद तक कम मूल्यांकित है, इसलिए वैश्विक निवेशकों के लिए यह फिर से आकर्षक विकल्प बन सकता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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