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FCNR स्कीम के जरिए एनआरआई भारत में ला सकते हैं 70-80 अरब डॉलर, क्यों ऐसा बोले एक्सपर्ट्स?

भारत की सबसे बड़ी हिंदी समाचार एजेंसियों में से एक।

3 min read | अपडेटेड July 17, 2026, 12:53 IST

सारांश

विदेशी मुद्रा अनिवासी (Foreign Currency Non-Resident, FCNR) योजना के तहत एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्ति (Persons of Indian Origin, PIOs) भारतीय बैंकों में प्रमुख विदेशी मुद्राओं में अपनी विदेश में हुई कमाई को सुरक्षित रूप से जमा कर उस पर रिटर्न हासिल कर सकते हैं।

रुपये और डॉलर

एफसीएनआर जमा के जरिये एनआरआई भारत में ला सकते हैं 70-80 अरब डॉलर

अनिवासी भारतीय (एनआरआई) मौजूदा एफसीएनआर पहल के तहत भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं। इसके तहत बैंक सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर डिपॉजिट्स पर अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं। सिंगापुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने शुक्रवार को यह बात कही। भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (Institute of Chartered Accountants of India, ICAI) की सिंगापुर ब्रांच द्वारा बुधवार को आईसीएआई की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति और उसकी 25 विदेशी शाखाओं के सहयोग से आयोजित ग्लोबल वेबिनार में भी इस पर चर्चा की गई।

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क्या है FCNR?

विदेशी मुद्रा अनिवासी (Foreign Currency Non-Resident, FCNR) योजना के तहत एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्ति (Persons of Indian Origin, PIOs) भारतीय बैंकों में प्रमुख विदेशी मुद्राओं में अपनी विदेश में हुई कमाई को सुरक्षित रूप से जमा कर उस पर रिटर्न हासिल कर सकते हैं। यह पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करता है, लेकिन इसमें फंड भारतीय रुपये में परिवर्तित होने के बजाय विदेशी मुद्रा में ही रहता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने और रुपये को समर्थन देने की रणनीति के तहत सीमित अवधि के लिए बैंकों को एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की अनुमति दी है। आईसीएआई की सिंगापुर शाखा के चेयरमैन संजय गट्टानी ने कहा, ‘30 सितंबर, 2026 तक खुली इस एफसीएनआर पहल के तहत अब तक 10 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं।’ वेबिनार में विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त विचारों से सहमति जताते हुए गट्टानी ने कहा कि इस पहल के तहत एनआरआई भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘इस तरह की आमद से भारत की बाह्य वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी और साथ ही एनआरआई को देश के विकास में सीधे योगदान देने का अवसर भी मिलेगा।’ 15 जुलाई को आयोजित इस वेबिनार में दुनियाभर से करीब 1,800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, एनआरआई, मान्यता प्राप्त निवेशक, कारोबारी नेता, फैमिली ऑफिस और वित्त क्षेत्र के पेशेवर शामिल थे। वेबिनार का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों को हाल में घोषित एफसीएनआर अवसर और निवेशकों तथा भारतीय अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए इसके संभावित लाभों से परिचित कराना था।

एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी और भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने एफसीएनआर ढांचे, निवेश प्रक्रिया, नियामकीय आवश्यकताओं, कराधान संबंधी पहलुओं और एनआरआई के लिए उपलब्ध लाभों की जानकारी दी। आईसीएआई सिंगापुर शाखा के वाइस चेयरमैन कुशल जाजू ने कहा कि डायलॉग सेशन में निवेशकों के अनेक सवालों के जवाब दिए गए, जिससे प्रतिभागियों को योजना के तहत निवेश के व्यावहारिक पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।

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