बिजनेस न्यूज़
.png)
4 min read | अपडेटेड July 16, 2026, 09:24 IST
सारांश
केंद्र सरकार ने डीजल, पेट्रोल और हवाई ईंधन पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती की है। यह नए नियम 16 जुलाई 2026 से लागू हो गए हैं।

सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी की नई दरें घोषित कीं। | Image: Shutterstock
देश में पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन यानी एटीएफ के एक्सपोर्ट को लेकर सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू ने एक नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए इन ईंधनों पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बदलाव कर दिया है। सरकार की तरफ से जारी किए गए इस नए आदेश के तहत डीजल और हवाई ईंधन के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को काफी बढ़ा दिया गया है, जबकि दूसरी तरफ पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर मिलने वाली ड्यूटी में बड़ी कटौती की गई है। सरकार का यह नया फैसला 16 जुलाई से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो गया है। इस फैसले के बाद तेल रिफाइनरी कंपनियों और पूरे एनर्जी मार्केट में बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
सरकार की तरफ से जारी की गई सेंट्रल एक्साइज की नई अधिसूचना के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। अब कंपनियों को डीजल बाहर भेजने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा टैक्स देना होगा। नए नियमों के तहत डीजल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को बढ़ाकर 15.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले कंपनियों को प्रति लीटर डीजल के एक्सपोर्ट पर 8.50 रुपये की ड्यूटी देनी पड़ती थी। सरकार ने इसमें सीधे 7 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की है। इस फैसले का सीधा और बड़ा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो बड़े पैमाने पर भारत से दूसरे देशों में डीजल का एक्सपोर्ट करती हैं और मुनाफा कमाती हैं।
डीजल के साथ-साथ हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी को काफी बढ़ा दिया है। एटीएफ के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को बढ़ाकर अब 14.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले इसके एक्सपोर्ट पर केवल 7.50 रुपये प्रति लीटर की दर से ड्यूटी वसूली जाती थी। सरकार ने एटीएफ पर भी सीधे 7 रुपये प्रति लीटर की जोरदार बढ़ोतरी की है। इस बड़े बदलाव के बाद विमानन ईंधन का एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के मुनाफे और उनकी फ्यूचर की कारोबारी रणनीति पर बहुत गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
एक तरफ जहां डीजल और हवाई ईंधन के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ाकर कंपनियों पर बोझ बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल के मामले में सरकार ने थोड़ी राहत दी है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती की घोषणा की गई है। नए नोटिफिकेशन के अनुसार, पेट्रोल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को घटाकर अब 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे पहले पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर 4 रुपये प्रति लीटर की दर से ड्यूटी लागू थी। सरकार ने इसमें 1.50 रुपये प्रति लीटर की राहत दी है, जिससे पेट्रोल का एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को कुछ हद तक अपना काम आसान करने में फायदा मिल सकता है।
डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू की तरफ से यह महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन नई दिल्ली से 15 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। सेंट्रल एक्साइज एक्ट 1944 के सेक्शन 5ए और फाइनेंस एक्ट 2002 के सेक्शन 147 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह जरूरी संशोधन किया है। इस नए आदेश के जरिए सरकार ने 26 मार्च 2026 को जारी किए गए पुराने नोटिफिकेशन में बदलाव किया है। इस नए नोटिफिकेशन को नंबर 38/2026-सेंट्रल एक्साइज के तहत जारी किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि जनता के हित को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था। यह सभी नए रेट्स 16 जुलाई 2026 से देश में पूरी तरह से लागू हो चुके हैं। इस बड़े बदलाव के इंप्लीमेंटेशन के बाद अब आने वाले समय में तेल कंपनियों के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और उनके ऑपरेशन से रेवेन्यू पर इसका क्या असर पड़ता है, इस पर बाजार के एक्सपर्ट्स की पैनी नजर बनी हुई है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
Additional Surveillance Measure (ASM)
How To Use Open Interest For Intraday Trading: Complete Guide
What Is Stop Loss In Trading? Meaning, Types, & How To Use It
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs