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3 min read | अपडेटेड April 21, 2026, 15:27 IST
सारांश
रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के अनुमान का भी उल्लेख किया गया जिसके अनुसार ग्लोबल लेवल पर लगभग 1.66 करोड़ हरित नौकरियां थीं और 2012 से 2024 के बीच हर साल लगभग आठ लाख नई नौकरियां पैदा हुईं जो 7% वार्षिक वृद्धि को दर्शाती हैं।

यूएन की एक रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर क्या कुछ है?
भारत की अर्थव्यवस्था के इस साल 6.4% और 2027 में 6.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग एशिया और प्रशांत (United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific, ESCAP) ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाएं 2025 में 5.4% की दर से बढ़ीं जबकि 2024 में वृद्धि दर 5.2% थी। इसमें भारत की मजबूत वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा। ‘इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026’ टाइटल वाली रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की वृद्धि दर 2025 में बढ़कर 7.4% हो गई। इसे मजबूत खपत, विशेष रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मांग, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती और अमेरिका के शुल्क लागू होने से पहले निर्यात में तेजी ने समर्थन दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 2025 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ीं क्योंकि अगस्त 2025 में 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिका को निर्यात में 25% की गिरावट आई। सर्विस सेक्टर प्रमुख वृद्धि चालक बना रहा। इसमें अनुमान लगाया गया है कि भारत 2026 में 6.4% और अगले साल 6.6% की दर से वृद्धि करेगा। देश में मुद्रास्फीति के इस साल 4.4% और 2027 में 4.3% रहने के आसार हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच विकासशील एशियाई एवं प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह घटा है। 2024 में 0.6% वृद्धि के बाद 2025 में इस क्षेत्र में एफडीआई 2% घटा जबकि वैश्विक प्रवाह में 14% की बढ़ोतरी हुई। इसमें कहा गया, ‘एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले तीन तिमाहियों में जिन देशों ने नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सबसे अधिक आकर्षित किया... वे भारत, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया गणराज्य और कजाखस्तान हैं... जहां क्रम से 50 अरब डॉलर, 30 अरब डॉलर, 25 अरब डॉलर और 21 अरब डॉलर के निवेश की घोषणाएं हुईं।’
रिपोर्ट में कहा गया कि अपने देश से बाहर कार्यरत एशिया और प्रशांत के श्रमिकों द्वारा भेजा जाने वाला व्यक्तिगत धन प्रेषण (पर्सनल रेमिटेंस) लगातार बढ़ रहा है, जिससे घरेलू रोजगार की कमजोर परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने में मदद मिली।
इसमें अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के अनुमान का भी उल्लेख किया गया जिसके अनुसार ग्लोबल लेवल पर लगभग 1.66 करोड़ हरित नौकरियां थीं और 2012 से 2024 के बीच हर साल लगभग आठ लाख नई नौकरियां पैदा हुईं जो 7% वार्षिक वृद्धि को दर्शाती हैं। इन 1.66 करोड़ नौकरियों में से 73 लाख चीन में, 13 लाख भारत में और 25 लाख एशिया के अन्य हिस्सों में पैदा हुईं, जो ग्लोबल टोटल का क्रम से 44%, 8% और 15% हैं। रिपोर्ट में साथ ही कहा गया, ‘सरकारें ऊर्जा बदलाव का उपयोग पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ अर्थव्यवस्था की दिशा में नए घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने और सहायक समूहों का निर्माण करने के लिए कर सकती हैं।’
इसमें भारत की उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह दर्शाता है कि किस प्रकार व्यापक आर्थिक नीतियां और फोटोवोल्टिक, बैटरी व हरित हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन देकर हरित औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे सकती हैं। साथ ही आयात निर्भरता को कम करते हुए नए औद्योगिक हितधारकों का निर्माण कर सकती हैं जिनकी इस परिवर्तन को बनाए रखने में हिस्सेदारी हो।
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