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4 min read | अपडेटेड May 25, 2026, 08:26 IST
सारांश
चीन और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर रूबियो ने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता।

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर क्या है लेटेस्ट अपडेट? (Photo: Shutterstock)
India-USA Trade Talks: भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही ट्रेड डील हो सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर हैं और उन्होंने इस दौरान जो कुछ बातें कहीं उससे लगता है कि जल्द ही इन दोनों देशों के बीच ट्रेड डील हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील को जल्द ही अंतिम रूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद’ और ‘टिकाऊ’ होगी, साथ ही भारत-अमेरिका के पारस्परिक हितों को आगे बढ़ाएगी। भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आए रूबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ ट्रेड वार्ता के बाद यह टिप्पणी की। दोनों नेताओं के बीच बिजनेस, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री की यह पहली भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पिछले एक साल में ट्रेड और टैरिफ नीतियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखने को मिला।
रूबियो ने कहा, ‘हमने काफी प्रगति की है और मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसी ट्रेड डील होगी, जो लंबे समय तक कायम रहेगी, यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगी और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगी।’ उन्होंने कहा कि (अमेरिकी राष्ट्रपति) डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति किसी खास देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ग्लोबल ट्रेड व्यवस्था के प्रति अमेरिका के दृष्टिकोण को बैलेंस करना है। रूबियो ने कहा, ‘राष्ट्रपति ने यह नहीं कहा कि भारत के साथ व्यापार को लेकर तनाव पैदा किया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की व्यापार व्यवस्था में असंतुलन है और इसे ठीक करने की जरूरत है।’
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है और दुनिया के लगभग हर देश के साथ बातचीत में व्यापार असंतुलन का मुद्दा सामने आया है। रूबियो ने कहा, ‘अच्छी बात यह है कि इस संतुलन प्रक्रिया के जरिए हम ऐसी ट्रेड डील्स तक पहुंचना चाहते हैं जो अमेरिका के साथ-साथ हमारे व्यापारिक साझेदारों के लिए भी फायदेमंद हों। हमें उम्मीद है कि भारत के साथ भी ऐसा समझौता जल्द होगा।’ उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द भारत आ सकते हैं ताकि प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका के व्यापार संबंधी मुद्दे यूरोपीय संघ जैसे सहयोगी देशों के साथ भी रहे हैं। रूबियो ने कहा, ‘भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और अमेरिका का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी है। ऐसे बड़े और व्यापक व्यापारिक संबंध वाले देश के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने की प्रक्रिया अधिक जटिल और व्यापक है।’ उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध मजबूत बने हुए हैं और ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल के अंत तक इनके और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
रूबियो ने अमेरिका समर्थित ‘पैक्स सिलिका’ पहल का भी उल्लेख किया। यह पहल महत्वपूर्ण खनिजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेस्ड सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। भारत इस पहल में फरवरी में शामिल हुआ था।
चीन और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर रूबियो ने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता। रूबियो ने कहा, ‘जहां तक अन्य देशों के साथ हमारे संबंधों का सवाल है, हम दुनिया के कई देशों के साथ विभिन्न स्तरों पर सहयोग और संपर्क रखते हैं। भारत भी ऐसा करता है। जिम्मेदार देश इसी तरह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन मैं दुनिया के किसी भी देश के साथ अमेरिका के संबंधों को भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता। जैसा कि मैंने पहले भी कहा, भारत के साथ हमारे संबंध अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण हैं।’
जयशंकर ने भी ट्रेड डील पर जल्द सहमति की जरूरत को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘आर्थिक मोर्चे पर हमने पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद अंतरिम ट्रेड डील के अंतिम मसौदे को जल्द पूरा करने के महत्व पर चर्चा की।’ विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह समझौता व्यापक द्विपक्षीय ट्रेड डील की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में हुई वार्ता के दौरान की गई थी।
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