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4 min read | अपडेटेड June 10, 2026, 20:02 IST
सारांश
भारत ने साल 2014-15 से 2025-26 के बीच 843 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हासिल किया है। DPIIT के मुताबिक, यह पिछले 12 सालों के मुकाबले 169 पर्सेंट की बड़ी बढ़त है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में 94 अरब डॉलर से ज्यादा का रिकॉर्ड निवेश आया है।

भारत ने साल 2014-15 से 2025-26 के बीच 843 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हासिल किया है।
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है। दुनिया भर में चल रही आर्थिक उथल-पुथल और चुनौतियों के बीच भारत विदेशी निवेश यानी FDI के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी DPIIT की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों ने इस बात को पूरी तरह साफ कर दिया है कि विदेशी कंपनियों और निवेशकों का भरोसा भारतीय इकोनॉमी पर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ सालों में रिकॉर्ड तोड़ विदेशी निवेश हासिल किया है, जो देश के आर्थिक विकास और बेहतरीन ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को दिखाता है। वैश्विक स्तर पर जारी मंदी के माहौल में भी भारत निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और पसंदीदा बाजार बनकर उभरा है।
DPIIT की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने साल 2014-15 से लेकर साल 2025-26 के बीच कुल 843 अरब अमेरिकी डॉलर का कंसोलिडेटेड FDI इनफ्लो आकर्षित किया है। यह आंकड़ा अपने आप में बेहद शानदार और ऐतिहासिक है। अगर हम इस निवेश की तुलना इससे पहले के 12 साल की अवधि से करें, तो इसमें 169 पर्सेंट की एक बहुत बड़ी और भारी बढ़त दर्ज की गई है। यह भारी उछाल यह साबित करता है कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक नीतियों और व्यापार करने के माहौल में कितना बड़ा सुधार हुआ है। विदेशी निवेशक अब भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं देख रहे हैं, बल्कि वे यहां लंबे समय के लिए अपनी कैपिटल लगा रहे हैं, जिससे देश में प्रोडक्शन कैपेसिटी और इंप्लीमेंटेशन के कामों को एक नई ताकत मिल रही है।
दुनिया भर के बाजारों में इस समय काफी ज्यादा आर्थिक अनिश्चितता और मंदी का माहौल बना हुआ है। कई बड़े देशों की विकास दर सुस्त पड़ गई है, लेकिन इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय बाजार में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आया है। DPIIT के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वैश्विक आर्थिक चिंताओं के बीच एक ही साल में 94 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का ऐतिहासिक FDI इनफ्लो दर्ज किया है। वैश्विक स्तर पर जारी चुनौतियों और मंदी के बीच इतनी बड़ी रकम का भारत आना यह दिखाता है कि दुनिया भर के बड़े निवेशकों को भारत के मजबूत डोमेस्टिक मार्केट और यहां के शानदार फ्यूचर पर पूरा भरोसा है। भारत सरकार द्वारा व्यापार को आसान बनाने के लिए उठाए गए कदमों का असर अब साफ तौर पर जमीन पर दिखने लगा है।
इस पूरी रिपोर्ट में सबसे खास और ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में आने वाले कुल इक्विटी इनफ्लो का एक बहुत बड़ा हिस्सा बेहद आसान तरीके से आया है। DPIIT ने बताया है कि भारत में आए कुल इक्विटी इनफ्लो का 90 पर्सेंट से भी अधिक हिस्सा सीधे ऑटोमेटिक रूट के जरिए आया है। ऑटोमेटिक रूट का मतलब यह होता है कि विदेशी निवेशकों को भारत में पैसा लगाने के लिए सरकार से पहले से कोई विशेष मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। निवेश की इस आसान प्रक्रिया की वजह से ही विदेशी कंपनियां बिना किसी कागजी देरी के भारतीय बाजार में अपना पैसा लगा पा रही हैं। यह इस बात का सबूत है कि भारत में अब निवेश के नियम कितने सरल और पारदर्शी हो चुके हैं, जिससे देश का ऑपरेशन काफी तेज हो गया है।
इस तरह के शानदार और रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े यह साफ करते हैं कि आने वाले समय यानी फ्यूचर में भी भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश की रफ्तार तेज बनी रहने वाली है। जब दुनिया के दूसरे बड़े बाजारों में मंदी का डर सता रहा है, तब भारत 94 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश हासिल करके दुनिया के सामने एक मिसाल पेश कर रहा है। इस बड़े निवेश से न केवल देश का रेवेन्यू बढ़ेगा बल्कि बड़ी संख्या में नए रोजगार के मौके भी तैयार होंगे। विदेशी कंपनियों के आने से भारतीय कंपनियों की ऑपरेशनल परफॉर्मेंस भी बेहतर हो रही है, जिससे उनके नेट प्रॉफिट में भी सुधार देखने को मिलेगा।
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