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4 min read | अपडेटेड June 19, 2026, 08:58 IST
सारांश
वैश्विक बाजार में मंदी के रुख के कारण भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त बयानों ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते के सकारात्मक असर को कम कर दिया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1 पर्सेंट और चांदी 2 पर्सेंट तक टूट गए हैं।

वैश्विक बाजारों में कमजोरी के चलते सोने और चांदी के दामों में गिरावट देखी जा रही है। | Image: Shutterstock.
वैश्विक सर्राफा बाजार में कमजोरी के रुख के चलते आज यानी 19 जून को भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सख्त बयानों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते से पैदा हुए सकारात्मक माहौल के असर को कम कर दिया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आए इस बदलाव का असर घरेलू कीमतों पर भी साफ दिखाई देगा और आने वाले दिनों में इसमें और हलचल हो सकती है।
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जैसा कि बाजार को पहले से ही उम्मीद थी। लेकिन इसके साथ ही फेड ने संकेत दिए हैं कि इस साल के अंत तक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। ब्याज दरें बढ़ने या कर्ज महंगा होने से सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों का आकर्षण काफी कम हो जाता है क्योंकि इससे निवेशकों की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसी वजह से निवेशकों ने सोने से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1 पर्सेंट गिरकर 4,180 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है, जबकि स्पॉट चांदी 2 पर्सेंट की भारी गिरावट के साथ 65 डॉलर प्रति औंस के नीचे ट्रेड कर रही है।
दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौता लागू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिसका निवेशकों ने दिल से स्वागत किया है। इस समझौते ने इतिहास के सबसे बड़े एनर्जी सप्लाई संकट और लंबे समय से चले आ रहे बड़े विवाद को खत्म कर दिया है। हालांकि, कमोडिटी बाजार के ट्रेडर्स अभी भी बाजार को लेकर काफी सतर्क हैं। उनका अनुमान है कि शिपिंग गतिविधियों और ऊर्जा के प्रवाह को विवाद शुरू होने से पहले यानी फरवरी के अंत वाले सामान्य स्तर पर पूरी तरह वापस लौटने में अभी कई महीनों का समय लग सकता है। इस वजह से बाजार में पूरी तरह से स्थिरता नहीं आ पाई है।
इस बीच, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी मामूली गिरावट देखी गई है। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड मामूली गिरावट के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। वहीं, ब्रेंट क्रूड भी करीब 0.5 पर्सेंट की कमजोरी के साथ 79.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में कमी का सीधा असर भी कमोडिटी मार्केट पर पड़ता है। इसके विपरीत, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है और यह बढ़कर 100.82 के स्तर को पार कर गया है। डॉलर के मजबूत होने से भी सोने की कीमतों पर दबाव और बढ़ गया है क्योंकि दुनिया भर के बाजारों के लिए डॉलर में निवेश ज्यादा फायदेमंद दिखने लगा है, जिससे सराफा बाजार में बिकवाली बढ़ी है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए द्वारा जारी किए गए रिटेल सेलिंग रेट्स के मुताबिक, 18 जून की शाम को सोने की अलग-अलग श्रेणियों के दाम भी दबाव में दिखे। इसमें 999 शुद्धता वाले फाइन गोल्ड का रेट 14,809 रुपये दर्ज किया गया। वहीं, 22 कैरेट सोने की कीमत 14,454 रुपये और 20 कैरेट सोने का भाव 13,180 रुपये रहा। इसके अलावा, 18 कैरेट सोने का रेट 11,996 रुपये पर बंद हुआ था। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ग्लोबल बाजार में फेडरल रिजर्व का रुख इसी तरह सख्त बना रहता है, तो आने वाले फ्यूचर में सोने और चांदी की कीमतों में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में निवेशकों को कोई भी कदम उठाने से पहले बाजार के इस नए रुख को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
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